Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِفَضْلِ اللَّهِ: अल्लाह की कृपा और उपकार से।
- وَبِرَحْمَتِهِ: और उसकी दया और रहमत से।
- فَلْيَفْرَحُوا: तो उन्हें खुशी मनानी चाहिए।
- خَيْرٌ: बेहतर और उत्तम है।
- مِمَّا يَجْمَعُونَ: उस चीज़ से जो वे इकट्ठा करते हैं (यानी दुनिया का माल और ऐश्वर्य)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप सभी लोगों से कह दीजिए कि जो कुछ आपके पास आया है—यानी कुरआन और इस्लाम का मार्गदर्शन—यह अल्लाह की ओर से एक महान कृपा और उसकी विशेष रहमत है। अल्लाह ने यह कुरआन उतारकर और सच्चे दीन (इस्लाम) को पेश करके लोगों पर बड़ा एहसान किया है। यही वह चीज़ है जिस पर उन्हें खुशी मनानी चाहिए, न कि दुनिया के अस्थायी सामान और उसके फ़ानी सुखों पर। क्योंकि यह कुरआन और ईमान उन सब चीज़ों से कहीं बेहतर है जो लोग दुनिया में जमा करते हैं—चाहे वह धन हो, संपत्ति हो या कोई और दुनियावी लाभ। दुनिया का सामान तो जल्दी नष्ट होने वाला है, जबकि अल्लाह की कृपा और रहमत से मिलने वाला मार्गदर्शन स्थायी और आख़िरत में काम आने वाला है। इसलिए सच्चे मोमिनों को चाहिए कि वे इसी पर खुशी मनाएँ और इसे ही अपनी सबसे बड़ी नेमत समझें।
फ़ायदे (सबक़):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्ची खुशी और संतोष का स्रोत अल्लाह की कृपा और उसकी रहमत है, न कि दुनिया के माल और ऐश्वर्य में। जो व्यक्ति ईमान और कुरआन को अपनी सबसे बड़ी नेमत समझता है, उसका दिल हमेशा शांत और खुश रहता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चीज़ें फ़ानी (नाशवान) हैं, लेकिन अल्लाह का दीन और उसका कलाम (कुरआन) बाकी रहने वाला है। इसलिए हमें अपनी प्राथमिकताएँ सही रखनी चाहिए और आख़िरत की भलाई को दुनिया की भलाई पर तरजीह देनी चाहिए।
- इस आयत में मोमिनों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह ने उन्हें कुरआन और इस्लाम जैसी नेमत देकर उन पर एहसान किया है। यह उनके लिए गर्व और खुशी का कारण होना चाहिए, और उन्हें इस पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि खुशी मनाने का सही तरीक़ा यह है कि हम अल्लाह की नेमतों को पहचानें, उनकी क़द्र करें और उनके लिए अल्लाह की तारीफ़ करें, न कि दुनियावी चीज़ों पर इतराएँ और घमंड करें।
📜 आयत 56-60 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 58
सूरा यूनुस आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़ुरान) ख़ुदा के…सूरा आयत 58/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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