यूनुस · 57/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَتْكُم مَّوْعِظَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَشِفَاءٌ لِّمَا فِي الصُّدُورِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ ۝٥٧
Yaaa aiyuhan naasu qad jaaa`atkum maw `izatum mir Rabbikum wa shifaaa`ul limaa fis sudoori wa hudanw wa rahmatul lilmu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगैरह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَوْعِظَةٌ (मौ'इज़ा): नसीहत, उपदेश, वह बात जो दिल को नरम करे और अल्लाह की याद दिलाए।
  • شِفَاءٌ (शिफ़ा): इलाज, दवा, रोग से मुक्ति।
  • لِمَا فِي الصُّدُورِ (लिमा फ़िस्सुदूर): उन चीज़ों के लिए जो सीनों (दिलों) में हैं, जैसे संदेह, शिर्क, ईर्ष्या, बुरे विचार आदि।
  • هُدًى (हुदा): मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता दिखाना।
  • رَحْمَةٌ (रहमत): दया, कृपा।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक ऐसी चीज़ आ चुकी है जो नसीहत और उपदेश देती है—यह क़ुरआन है। यह तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराता है, उसके वादों और वायदों की याद दिलाता है, और तुम्हारे अख़लाक़ (चरित्र) और आमाल (कर्मों) को सुधारने का ज़रिया है। यह किताब उन बीमारियों का इलाज है जो दिलों में पनप जाती हैं—जैसे अल्लाह के बारे में संदेह, शिर्क (किसी को अल्लाह का साझी बनाना), अहंकार, ईर्ष्या, और दूसरे दिली रोग। यह क़ुरआन उन लोगों के लिए मार्गदर्शन है जो इस पर अमल करते हैं, उन्हें गुमराही से निकालकर सीधे रास्ते पर लाता है और हलाकत (विनाश) से बचाता है। अल्लाह ने इसे मोमिनों (ईमानवालों) के लिए रहमत और नेमत बनाया है, क्योंकि वही इससे लाभ उठाते हैं। जहाँ तक काफ़िरों का सवाल है, यही क़ुरआन उनके लिए अंधेपन और हिदायत से महरूमी का सबब बन जाता है, क्योंकि उन्होंने इसे क़बूल नहीं किया।


फ़ायदे (निष्कर्ष):

  1. क़ुरआन हर दिल की बीमारी का इलाज है: चाहे वह शक (संदेह) हो, शिर्क हो, या दिल की सख़्ती—क़ुरआन को पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने से हर दिली बीमारी ठीक हो सकती है। यह अल्लाह की सबसे बड़ी रहमत है।
  2. क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अमल के लिए है: यह हमें सिखाता है कि क़ुरआन को अपनी ज़िंदगी में उतारना चाहिए। जो इसे अपनाता है, वह सीधे रास्ते पर चलता है और दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।
  3. अल्लाह की रहमत ख़ास मोमिनों के लिए है: यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो ईमान लाते हैं और उसकी किताब पर अमल करते हैं। यह हमें ईमान की अहमियत समझाती है और उस पर क़ायम रहने की तरग़ीब देती है।
  4. क़ुरआन हर इंसान के लिए नसीहत है: यह सिर्फ़ किसी ख़ास गिरोह के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहनुमा किताब है। जो कोई भी इसे अपनाएगा, उसकी ज़िंदगी बदल जाएगी और उसे सुकून मिलेगा।


📜 आयत 55-59 — सूरा यूनुस

55أَلَا إِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ أَلَا إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं
56هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
वही ज़िन्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें
57يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَتْكُم مَّوْعِظَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَشِفَاءٌ لِّمَا فِي الصُّدُورِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगैरह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत
58قُلْ بِفَضْلِ اللَّهِ وَبِرَحْمَتِهِ فَبِذَٰلِكَ فَلْيَفْرَحُوا هُوَ خَيْرٌ مِّمَّا يَجْمَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़ुरान) ख़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए
59قُلْ أَرَأَيْتُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ لَكُم مِّن رِّزْقٍ فَجَعَلْتُم مِّنْهُ حَرَامًا وَحَلَالًا قُلْ آللَّهُ أَذِنَ لَكُمْ ۖ أَمْ عَلَى اللَّهِ تَفْتَرُونَ
और जो कुछ वह जमा कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम्हारा क्या ख्याल है कि ख़ुदा ने तुम पर रोज़ी नाज़िल की तो अब उसमें से बाज़ को हराम बाज़ को हलाल बनाने लगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा ने तुम्हें इजाज़त दी है या तुम ख़ुदा पर बोहतान बाँधते हो
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
57आयत

अनुवाद — यूनुस 57

सूरा यूनुस आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे…

सूरा आयत 57/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए