क़ुरैश · 4/4
अनुवाद उच्चारण — क़ुरैश
الَّذِي أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍ وَآمَنَهُم مِّنْ خَوْفٍ ۝٤
Allazi at`amahum min ju`inw-wa-aamana hum min khawf
📖 हिंदी अर्थ
जिसने उनको भूख में खाना दिया और उनको खौफ़ से अमन अता किया

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अनुवाद — Tafsir

الَّذِي أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍ وَآمَنَهُم مِّنْ خَوْفٍ

शब्दों के अर्थ:

  • أَطْعَمَهُم: उन्हें खाना खिलाया।
  • مِّن جُوعٍ: भूख की हालत से (बचाते हुए)।
  • آمَنَهُم: उन्हें सुरक्षा प्रदान की।
  • مِّنْ خَوْفٍ: भय और डर से।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अपने से पहले वाली आयतों का परिणाम बयान कर रही है। अल्लाह तआला ने क़ुरैश क़बीले पर जो अनगिनत कृपाएँ कीं, उनमें से दो सबसे बड़ी नेमतों का ज़िक्र यहाँ किया गया है:

पहली नेमत: अल्लाह ने उन्हें भूख से बचाकर खाना दिया। क़ुरैश मक्का की घाटी में रहते थे, जो एक बंजर और खेती से वंचित इलाक़ा था। वहाँ न तो खेती होती थी और न ही पानी और चारागाह की सुविधा थी। अगर अल्लाह की विशेष मेहरबानी न होती, तो वे भूख और क़हत (सूखे) का शिकार हो जाते। अल्लाह ने उनके लिए व्यापार के रास्ते आसान किए — सर्दियों में यमन की तरफ़ और गर्मियों में शाम (सीरिया) की तरफ़ उनके क़ाफ़िले जाते थे, और इस तरह वे अनाज और रोज़ी हासिल करते थे। यह अल्लाह की तरफ़ से एक अदृश्य मदद थी जो उन्हें हर साल मिलती रही।

दूसरी नेमत: अल्लाह ने उन्हें डर और ख़ौफ़ से अमन (सुरक्षा) दी। अरब के दूसरे क़बीले आपस में लड़ते रहते थे, लूट-पाट और क़त्ल-ओ-ख़ून आम बात थी। लेकिन क़ुरैश को अल्लाह ने ख़ास सुरक्षा दी, क्योंकि वे बैतुल्लाह (काबा) के ख़ादिम और पड़ोसी थे। अरब के सभी क़बीले काबा की इज़्ज़त करते थे और उसके पड़ोसियों को भी सम्मान की नज़र से देखते थे। इसलिए क़ुरैश के लोग अपने व्यापारिक सफ़रों में और मक्का में रहते हुए भी पूरी तरह सुरक्षित और निडर रहते थे, जबकि उनके आस-पास के दूसरे लोग ख़ौफ़ और डर में जीते थे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितनी बड़ी मेहरबानियाँ करता है। जब हम अपनी ज़िंदगी में नज़र डालें — हमारा खाना, हमारी सुरक्षा, हमारा घर, हमारी सेहत — यह सब अल्लाह की देन है। जिस तरह क़ुरैश को अल्लाह ने भूख और डर से बचाया, उसी तरह वह हमें भी हर मुसीबत से बचाने की क़ुदरत रखता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी इबादत करें और उसके दिए हुए आराम और सुकून को याद करके उसकी तारीफ़ करें। यही वह चीज़ है जो हमें जन्नत की तरफ़ ले जाती है — जहाँ हमेशा का खाना और हमेशा का अमन है। अल्लाह हमें अपनी नेमतों का एहसास कराए और उनका सही इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 2-4 — क़ुरैश

2إِيلَافِهِمْ رِحْلَةَ الشِّتَاءِ وَالصَّيْفِ
तो उनको मानूस कर देने की वजह से
3فَلْيَعْبُدُوا رَبَّ هَٰذَا الْبَيْتِ
इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करनी चाहिए
4الَّذِي أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍ وَآمَنَهُم مِّنْ خَوْفٍ
जिसने उनको भूख में खाना दिया और उनको खौफ़ से अमन अता किया
क़ुरैशकुरान सूची
4आयत
मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — क़ुरैश 4

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Tuesday, August 18, 2026

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