हूद · 39/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ ۝٣٩
Fasawfa ta`lamoona mai yaateehi `azaabuny yaukhzeehi wa yahillu `alaihi `azaabum muqeem
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है कि (दुनिया में) उसे रुसवा कर दे और किस पर (क़यामत में) दाइमी अज़ाब नाज़िल होता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُخْزِيهِ: उसे अपमानित करेगा, उसे रुसवा करेगा।
  • مُقِيم: स्थायी, कभी समाप्त न होने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को चेतावनी दी कि जब अल्लाह का आदेश आएगा, तो तुम्हें स्वयं पता चल जाएगा कि वह कौन है जिस पर दुनिया में अपमानित करने वाला अज़ाब आएगा। यह अज़ाब तूफ़ान (पानी में डूबने) की शक्ल में आने वाला था, जो उन्हें रुसवा करके रख देगा। इसके बाद आख़िरत में उन पर ऐसा स्थायी अज़ाब नाज़िल होगा जो कभी ख़त्म नहीं होगा और जिससे कोई राहत या छुटकारा नहीं मिलेगा। यह अज़ाब जहन्नम की आग है जो हमेशा के लिए है। इस प्रकार नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को दोहरी सज़ा से आगाह किया—दुनिया में रुसवाई और आख़िरत में स्थायी यातना।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह के नबियों की चेतावनियाँ कभी ख़ाली नहीं जातीं—जो बात वे अल्लाह की ओर से कहते हैं, वह अवश्य पूरी होती है।
  2. दुनिया की सज़ा भले ही ख़त्म हो जाए, लेकिन आख़िरत का अज़ाब स्थायी है—इसलिए इंसान को चाहिए कि वह केवल दुनिया के अज़ाब से न डरे, बल्कि आख़िरत के हमेशा रहने वाले अज़ाब से सबसे अधिक डरे।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और अपने जीवन को उसकी रज़ा के अनुसार ढालें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
  4. इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो नबियों की बातों को झुठलाते हैं—उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की सज़ा देर से आए, तो भी ज़रूर आएगी।
🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — हूद

37وَاصْنَعِ الْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا وَلَا تُخَاطِبْنِي فِي الَّذِينَ ظَلَمُوا ۚ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ
और (बिस्मिल्लाह करके) हमारे रुबरु और हमारे हुक्म से कश्ती बना डालो और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके बारे में मुझसे सिफारिश न करना क्योंकि ये लोग ज़रुर डुबा दिए जाएँगें
38وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِّن قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ ۚ قَالَ إِن تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ
और नूह कश्ती बनाने लगे और जब कभी उनकी क़ौम के सरबर आवुरदा लोग उनके पास से गुज़रते थे तो उनसे मसख़रापन करते नूह (जवाब में) कहते कि अगर इस वक्त तुम हमसे मसखरापन करते हो तो जिस तरह तुम हम पर हँसते हो हम तुम पर एक वक्त हँसेगें
39فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
और तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है कि (दुनिया में) उसे रुसवा कर दे और किस पर (क़यामत में) दाइमी अज़ाब नाज़िल होता है
40حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ قُلْنَا احْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ وَمَنْ آمَنَ ۚ وَمَا آمَنَ مَعَهُ إِلَّا قَلِيلٌ
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे
41۞ وَقَالَ ارْكَبُوا فِيهَا بِسْمِ اللَّهِ مَجْرَاهَا وَمُرْسَاهَا ۚ إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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सूरा आयत 39/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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