हूद · 40/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ قُلْنَا احْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ وَمَنْ آمَنَ ۚ وَمَا آمَنَ مَعَهُ إِلَّا قَلِيلٌ ۝٤٠
Hattaaa izaa jaaa`a amrunaa wa faarat tannooru qulnah mil feehaa min kullin zawjainis naini wa ahlaka illaa man sabaqa `alaihil qawlu wa man aaman; wa maaa aamana ma`ahooo illaa qaleel
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَارَ التَّنُّورُ: तन्नूर (ओवन/तंदूर) से पानी उबलकर बाहर निकल आया। यह तूफ़ान के आरंभ होने की निशानी थी।
  • زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ: हर प्रकार के जानवरों में से नर और मादा (दो-दो)।
  • أَهْلَكَ: आपके परिवार के लोग।
  • سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ: जिनके बारे में पहले ही अल्लाह का फ़ैसला आ चुका था कि वे हलाक होंगे (यानी जो ईमान नहीं लाए)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के आदेश से जहाज़ बनाने का काम पूरा कर लिया, तो अल्लाह का वह वादा आ गया जो उसने अपने नबी से किया था कि काफ़िरों को हलाक किया जाएगा। उस समय तन्नूर (ओवन) में से पानी उबलकर बाहर निकलने लगा — यह तूफ़ान के शुरू होने की निशानी थी। यह वही तन्नूर था जिसमें रोटी पकाई जाती थी, और यह नूह (अलैहिस्सलाम) के लिए अल्लाह की ओर से एक स्पष्ट संकेत था कि अब तूफ़ान आने वाला है।

उस समय अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) से कहा: "इस जहाज़ में हर प्रकार के जानवरों में से एक नर और एक मादा (यानी दो-दो) ले लो, ताकि तूफ़ान के बाद उनकी नस्लें बनी रहें। और अपने परिवार के लोगों को भी जहाज़ में सवार कर लो, सिवाय उनके जिनके बारे में पहले ही हलाक होने का फ़ैसला आ चुका है — यानी तुम्हारा बेटा (कनान) और तुम्हारी पत्नी जो ईमान नहीं लाई। और उन लोगों को भी सवार करो जो तुम पर ईमान लाए हैं।"

लेकिन नूह (अलैहिस्सलाम) की लंबी दावत और सदियों की मेहनत के बावजूद, उनके साथ बहुत कम लोग ईमान लाए थे — केवल उनके तीन बेटे (साम, हाम, याफ़िस) और उनकी पत्नियाँ, और कुछ अन्य लोग। अल्लाह ने बताया कि उनके साथ ईमान लाने वालों की संख्या बहुत कम थी।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह का वादा सच्चा है: अल्लाह जब किसी को हलाक करने का वादा करता है, तो वह अपने समय पर पूरा होकर रहता है। नूह (अलैहिस्सलाम) की दावत के बाद अल्लाह का आदेश आया और तूफ़ान आया।
  2. निशानियों पर यक़ीन: तन्नूर से पानी का उबलना अल्लाह की क़ुदरत की निशानी थी। अल्लाह जिसे चाहता है, उसके लिए अपनी निशानियाँ स्पष्ट कर देता है।
  3. परिवार का साथ ईमान पर मुनहसिर है: नूह (अलैहिस्सलाम) का बेटा और पत्नी ईमान नहीं लाए, इसलिए वे जहाज़ में सवार नहीं हुए। यह सिखाता है कि रिश्तेदारी का नाता ईमान के बिना किसी काम नहीं आता। सच्ची नजात (मुक्ति) केवल ईमान और अच्छे कर्मों से मिलती है।
  4. कम संख्या में भी हक़ पर डटे रहना: नूह (अलैहिस्सलाम) के साथ बहुत कम लोग ईमान लाए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई पर चलने के लिए भीड़ की ज़रूरत नहीं, बल्कि सच्ची नीयत और अल्लाह पर भरोसा काफ़ी है।
  5. अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है: जो लोग ईमान लाए, उन्हें अल्लाह ने जहाज़ में सवार करके बचा लिया। यह दिखाता है कि अल्लाह अपने बंदों पर रहम करता है और उन्हें हलाक होने से बचाता है, बशर्ते वे उसकी ओर रुजू करें।
🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — हूद

38وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِّن قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ ۚ قَالَ إِن تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ
और नूह कश्ती बनाने लगे और जब कभी उनकी क़ौम के सरबर आवुरदा लोग उनके पास से गुज़रते थे तो उनसे मसख़रापन करते नूह (जवाब में) कहते कि अगर इस वक्त तुम हमसे मसखरापन करते हो तो जिस तरह तुम हम पर हँसते हो हम तुम पर एक वक्त हँसेगें
39فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
और तुम्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है कि (दुनिया में) उसे रुसवा कर दे और किस पर (क़यामत में) दाइमी अज़ाब नाज़िल होता है
40حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ قُلْنَا احْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ وَمَنْ آمَنَ ۚ وَمَا آمَنَ مَعَهُ إِلَّا قَلِيلٌ
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा और तन्नूर से जोश मारने लगा तो हमने हुक्म दिया (ऐ नूह) हर किस्म के जानदारों में से (नर मादा का) जोड़ा (यानि) दो दो ले लो और जिस (की) हलाकत (तबाही) का हुक्म पहले ही हो चुका हो उसके सिवा अपने सब घर वाले और जो लोग ईमान ला चुके उन सबको कश्ती (नाँव) में बैठा लो और उनके साथ ईमान भी थोड़े ही लोग लाए थे
41۞ وَقَالَ ارْكَبُوا فِيهَا بِسْمِ اللَّهِ مَجْرَاهَا وَمُرْسَاهَا ۚ إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
और नूह ने (अपने साथियों से) कहा बिस्मिल्ला मज़रीहा मुरसाहा (ख़ुदा ही के नाम से उसका बहाओ और ठहराओ है) कश्ती में सवार हो जाओ बेशक मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
42وَهِيَ تَجْرِي بِهِمْ فِي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ابْنَهُ وَكَانَ فِي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ الْكَافِرِينَ
और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में उन लोगों को लिए हुए चली जा रही है और नूह ने अपने बेटे को जो उनसे अलग थलग एक गोशे (कोने) में था आवाज़ दी ऐ मेरे फरज़न्द हमारी कश्ती में सवार हो लो और काफिरों के साथ न रह
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अनुवाद — हूद 40

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Tuesday, August 18, 2026

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