अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ابْلَعِي: निगल जाओ, सोख लो।
- أَقْلِعِي: रुक जाओ, बंद कर दो (वर्षा रोक दो)।
- غِيضَ: घट गया, सूख गया, कम हो गया।
- قُضِيَ الْأَمْرُ: मामला तय कर दिया गया, फैसला सुना दिया गया (यहाँ अर्थ: काफिरों का विनाश पूरा हो गया)।
- اسْتَوَتْ: ठहर गई, टिक गई (नाव का किनारे लगना)।
- الْجُودِيِّ: एक पहाड़ का नाम (जो वर्तमान में तुर्की और इराक की सीमा पर स्थित है)।
- بُعْدًا: दूर होना, विनाश, रहमत से महरूमी।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की दुआ क़बूल करके पूरी दुनिया में तूफ़ान भेज दिया, और काफिरों को हलाक करने का फैसला पूरा हो गया, तो अल्लाह ने ज़मीन को हुक्म दिया: "ऐ ज़मीन! अपना पानी निगल ले" यानी जो पानी तूने अपने अंदर से उगल रखा था, उसे वापस सोख ले। और आसमान को हुक्म दिया: "ऐ आसमान! रुक जा" यानी बारिश बंद कर दे। चुनांचे पानी घटने लगा और धीरे-धीरे सूख गया। इस तरह अल्लाह का फैसला पूरा हो गया और काफिरों का सफ़ाया हो गया। फिर नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती (नाव) पहाड़ "जूदी" पर जाकर ठहर गई। और अल्लाह की तरफ़ से कहा गया: "ज़ालिमों (अत्याचारियों) पर विनाश और रहमत से दूरी हो!" यानी जिन लोगों ने अल्लाह की नाफ़रमानी की और अपनी सरकशी से हद से आगे बढ़ गए, उन पर अल्लाह की लानत और हलाकत हो।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह का क़ुदरत (शक्ति) पर पूरा भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला जब चाहता है, तो ज़मीन और आसमान को अपने हुक्म के आगे झुका देता है। पानी जो तूफ़ान बनकर उठता है, वही अल्लाह के इशारे पर सूख जाता है। इसलिए हमें किसी भी मुसीबत में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
- अल्लाह का फैसला अटल होता है: जब अल्लाह किसी क़ौम पर अज़ाब का फैसला कर लेता है, तो कोई ताक़त उसे टाल नहीं सकती। यह हमें अल्लाह के अज़ाब से डरने और उसकी नाफ़रमानी से बचने की तरग़ीब देता है।
- ज़ालिमों का अंजाम बुरा होता है: इस आयत में ज़ालिमों (अत्याचारियों) के लिए "बु'दन" (विनाश और दूरी) की दुआ की गई है। यह हमें सिखाता है कि ज़ुल्म (अत्याचार) और सरकशी का अंजाम हमेशा तबाही होता है, चाहे ज़ालिम कितना भी ताक़तवर क्यों न हो।
- नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती का ठहरना अल्लाह की रहमत की निशानी है: अल्लाह ने अपने नबी और मोमिनों को बचाकर दुनिया में एक नई शुरुआत की। यह हमें बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को हमेशा मुसीबतों से निकालता है और उन्हें कामयाबी देता है।
- तौबा और इमान की अहमियत: यह वाक़िया हमें याद दिलाता है कि नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने 950 साल तक दावत सुनने के बाद भी इमान नहीं लाया, और अंजाम में हलाक हो गई। इसलिए हमें अल्लाह की तरफ़ जल्दी लौटना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को इस्लाह (सुधार) करना चाहिए।
📜 आयत 42-46 — हूद
अनुवाद — हूद 44
सूरा हूद आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि…सूरा आयत 44/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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