हूद · 44/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَقِيلَ يَا أَرْضُ ابْلَعِي مَاءَكِ وَيَا سَمَاءُ أَقْلِعِي وَغِيضَ الْمَاءُ وَقُضِيَ الْأَمْرُ وَاسْتَوَتْ عَلَى الْجُودِيِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ۝٤٤
Wa qeela yaaa ardubla`ee maaa`aki wa yaa samaaa`u aqi`ee wa gheedal maaa`u wa qudiyal amru wastawat `alal joodiyyi wa qeela bu`dal lilqawmiz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ابْلَعِي: निगल जाओ, सोख लो।
  • أَقْلِعِي: रुक जाओ, बंद कर दो (वर्षा रोक दो)।
  • غِيضَ: घट गया, सूख गया, कम हो गया।
  • قُضِيَ الْأَمْرُ: मामला तय कर दिया गया, फैसला सुना दिया गया (यहाँ अर्थ: काफिरों का विनाश पूरा हो गया)।
  • اسْتَوَتْ: ठहर गई, टिक गई (नाव का किनारे लगना)।
  • الْجُودِيِّ: एक पहाड़ का नाम (जो वर्तमान में तुर्की और इराक की सीमा पर स्थित है)।
  • بُعْدًا: दूर होना, विनाश, रहमत से महरूमी।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की दुआ क़बूल करके पूरी दुनिया में तूफ़ान भेज दिया, और काफिरों को हलाक करने का फैसला पूरा हो गया, तो अल्लाह ने ज़मीन को हुक्म दिया: "ऐ ज़मीन! अपना पानी निगल ले" यानी जो पानी तूने अपने अंदर से उगल रखा था, उसे वापस सोख ले। और आसमान को हुक्म दिया: "ऐ आसमान! रुक जा" यानी बारिश बंद कर दे। चुनांचे पानी घटने लगा और धीरे-धीरे सूख गया। इस तरह अल्लाह का फैसला पूरा हो गया और काफिरों का सफ़ाया हो गया। फिर नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती (नाव) पहाड़ "जूदी" पर जाकर ठहर गई। और अल्लाह की तरफ़ से कहा गया: "ज़ालिमों (अत्याचारियों) पर विनाश और रहमत से दूरी हो!" यानी जिन लोगों ने अल्लाह की नाफ़रमानी की और अपनी सरकशी से हद से आगे बढ़ गए, उन पर अल्लाह की लानत और हलाकत हो।


फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का क़ुदरत (शक्ति) पर पूरा भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला जब चाहता है, तो ज़मीन और आसमान को अपने हुक्म के आगे झुका देता है। पानी जो तूफ़ान बनकर उठता है, वही अल्लाह के इशारे पर सूख जाता है। इसलिए हमें किसी भी मुसीबत में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
  2. अल्लाह का फैसला अटल होता है: जब अल्लाह किसी क़ौम पर अज़ाब का फैसला कर लेता है, तो कोई ताक़त उसे टाल नहीं सकती। यह हमें अल्लाह के अज़ाब से डरने और उसकी नाफ़रमानी से बचने की तरग़ीब देता है।
  3. ज़ालिमों का अंजाम बुरा होता है: इस आयत में ज़ालिमों (अत्याचारियों) के लिए "बु'दन" (विनाश और दूरी) की दुआ की गई है। यह हमें सिखाता है कि ज़ुल्म (अत्याचार) और सरकशी का अंजाम हमेशा तबाही होता है, चाहे ज़ालिम कितना भी ताक़तवर क्यों न हो।
  4. नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती का ठहरना अल्लाह की रहमत की निशानी है: अल्लाह ने अपने नबी और मोमिनों को बचाकर दुनिया में एक नई शुरुआत की। यह हमें बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को हमेशा मुसीबतों से निकालता है और उन्हें कामयाबी देता है।
  5. तौबा और इमान की अहमियत: यह वाक़िया हमें याद दिलाता है कि नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने 950 साल तक दावत सुनने के बाद भी इमान नहीं लाया, और अंजाम में हलाक हो गई। इसलिए हमें अल्लाह की तरफ़ जल्दी लौटना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को इस्लाह (सुधार) करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — हूद

42وَهِيَ تَجْرِي بِهِمْ فِي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ابْنَهُ وَكَانَ فِي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ الْكَافِرِينَ
और कश्ती है कि पहाड़ों की सी (ऊँची) लहरों में उन लोगों को लिए हुए चली जा रही है और नूह ने अपने बेटे को जो उनसे अलग थलग एक गोशे (कोने) में था आवाज़ दी ऐ मेरे फरज़न्द हमारी कश्ती में सवार हो लो और काफिरों के साथ न रह
43قَالَ سَآوِي إِلَىٰ جَبَلٍ يَعْصِمُنِي مِنَ الْمَاءِ ۚ قَالَ لَا عَاصِمَ الْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ ۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا الْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ الْمُغْرَقِينَ
(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया
44وَقِيلَ يَا أَرْضُ ابْلَعِي مَاءَكِ وَيَا سَمَاءُ أَقْلِعِي وَغِيضَ الْمَاءُ وَقُضِيَ الْأَمْرُ وَاسْتَوَتْ عَلَى الْجُودِيِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो
45وَنَادَىٰ نُوحٌ رَّبَّهُ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ابْنِي مِنْ أَهْلِي وَإِنَّ وَعْدَكَ الْحَقُّ وَأَنتَ أَحْكَمُ الْحَاكِمِينَ
और (जिस वक्त नूह का बेटा ग़रक (डूब) हो रहा था तो नूह ने अपने परवरदिगार को पुकारा और अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार इसमें तो शक़ नहीं कि मेरा बेटा मेरे अहल (घर वालों) में शामिल है और तूने वायदा किया था कि तेरे अहल को बचा लूँगा) और इसमें शक़ नहीं कि तेरा वायदा सच्चा है और तू सारे (जहान) के हाकिमों से बड़ा हाकिम है
46قَالَ يَا نُوحُ إِنَّهُ لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ ۖ إِنَّهُ عَمَلٌ غَيْرُ صَالِحٍ ۖ فَلَا تَسْأَلْنِ مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ ۖ إِنِّي أَعِظُكَ أَن تَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ
(तू मेरे बेटे को नजात दे) ख़ुदा ने फरमाया ऐ नूह तुम (ये क्या कह रहे हो) हरगिज़ वह तुम्हारे अहल में शामिल नहीं वह बेशक बदचलन है (देखो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है मुझसे उसके बारे में (दरख्वास्त न किया करो और नादानों की सी बातें न करो) नूह ने अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार मै तुझ ही से पनाह मागँता हूँ कि जिस चीज़ का मुझे इल्म न हो मै उसकी दरख्वास्त करुँ
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अनुवाद — हूद 44

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Tuesday, August 18, 2026

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