Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَادٍ (आद): यह नबी हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम का नाम था, जो अरब की प्राचीन जातियों में से एक थी।
- أَخَاهُمْ (उनका भाई): यहाँ "भाई" से मुराद नसब (वंश) में भाईपन है, न कि दीन में, क्योंकि हूद (अलैहिस्सलाम) उन्हीं के क़बीले से थे।
- مُفْتَرُونَ (झूठे / बहतान लगाने वाले): यानी अल्लाह पर झूठ बोलने वाले और उसके साथ शिर्क करके बदतरीन इफ्तिरा (झूठ) करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से आद की क़ौम की तरफ उन्हीं के भाई हूद (अलैहिस्सलाम) को रसूल बनाकर भेजा। हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को पुकारा और कहा: "ऐ मेरी क़ौम! तुम सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला मानो और उसके साथ किसी को शरीक न ठहराओ। तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। जो माबूद तुम बनाकर पूजते हो, वे सब झूठे हैं। तुम्हारा यह काम कि तुम अल्लाह के साथ दूसरों को पूजते हो, यह अल्लाह पर बहुत बड़ा बोहतान और झूठ है, क्योंकि अल्लाह ने कभी अपने साथ किसी को पूजे जाने का हुक्म नहीं दिया। तुम अपनी इस इबादत से अल्लाह पर झूठ बोलते हो और अपने ऊपर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल होने का सबब बनते हो।"
हूद (अलैहिस्सलाम) की दावत बिल्कुल साफ़ और सीधी थी — तौहीद (अल्लाह की एकता) की दावत। उन्होंने अपनी क़ौम को बुतों की पूजा से रोका और उन्हें अल्लाह की तरफ बुलाया। यह दावत उन्होंने बड़ी शफ़्क़त और मुहब्बत के साथ पेश की, क्योंकि वह उनके भाई थे और उनकी भलाई चाहते थे।
फ़ायदे (सबक):
- तौहीद ही असली दीन है: हर नबी की दावत का पहला और बुनियादी पैग़ाम यही था कि अल्लाह की इबादत करो और शिर्क से बचो। यही इस्लाम का मरकज़ी नुक़्ता है।
- नसब का रिश्ता दीन से बड़ा नहीं: हूद (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम के भाई थे, लेकिन जब उन्होंने अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया तो क़ौम ने उन्हें झुठलाया। इससे सबक मिलता है कि रिश्तेदारी की मुहब्बत दीन की सच्चाई पर क़ुर्बान होनी चाहिए, और सच बोलने में किसी के डर या लिहाज़ से पीछे नहीं हटना चाहिए।
- शिर्क अल्लाह पर बोहतान है: जब इंसान अल्लाह के साथ किसी और को पूजता है, तो वह अल्लाह पर झूठ बोलता है, क्योंकि अल्लाह ने कभी इसकी इजाज़त नहीं दी। यह सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे बड़ा गुनाह है।
- दावत में नर्मी और मुहब्बत: हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को "ऐ मेरी क़ौम" कहकर पुकारा, जो दावत में मुहब्बत और शफ़्क़त का तरीक़ा सिखाता है। इस्लाम में दावत नफ़रत से नहीं, बल्कि प्यार और हिकमत से दी जाती है।
- अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा: अल्लाह ने हर क़ौम की तरफ उन्हीं में से रसूल भेजा, ताकि वे उनकी भाषा और उनके हालात समझ सकें। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की निशानी है कि वह हिदायत का ज़रिया हर क़ौम तक पहुँचाता है।
📜 आयत 48-52 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 50
सूरा हूद आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को…सूरा आयत 50/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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