हूद · 50/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ ۝٥٠
Wa ilaa `aadin akhaahum Hoodaa; qaala yaa qawmi` budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhooo in antum illaa muftaroon
📖 हिंदी अर्थ
और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को (पैग़म्बर बनाकर भेजा और) उन्होनें अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करों उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तुम बस निरे इफ़तेरा परदाज़ (झूठी बात बनाने वाले) हो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَادٍ (आद): यह नबी हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम का नाम था, जो अरब की प्राचीन जातियों में से एक थी।
  • أَخَاهُمْ (उनका भाई): यहाँ "भाई" से मुराद नसब (वंश) में भाईपन है, न कि दीन में, क्योंकि हूद (अलैहिस्सलाम) उन्हीं के क़बीले से थे।
  • مُفْتَرُونَ (झूठे / बहतान लगाने वाले): यानी अल्लाह पर झूठ बोलने वाले और उसके साथ शिर्क करके बदतरीन इफ्तिरा (झूठ) करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से आद की क़ौम की तरफ उन्हीं के भाई हूद (अलैहिस्सलाम) को रसूल बनाकर भेजा। हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को पुकारा और कहा: "ऐ मेरी क़ौम! तुम सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला मानो और उसके साथ किसी को शरीक न ठहराओ। तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। जो माबूद तुम बनाकर पूजते हो, वे सब झूठे हैं। तुम्हारा यह काम कि तुम अल्लाह के साथ दूसरों को पूजते हो, यह अल्लाह पर बहुत बड़ा बोहतान और झूठ है, क्योंकि अल्लाह ने कभी अपने साथ किसी को पूजे जाने का हुक्म नहीं दिया। तुम अपनी इस इबादत से अल्लाह पर झूठ बोलते हो और अपने ऊपर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल होने का सबब बनते हो।"

हूद (अलैहिस्सलाम) की दावत बिल्कुल साफ़ और सीधी थी — तौहीद (अल्लाह की एकता) की दावत। उन्होंने अपनी क़ौम को बुतों की पूजा से रोका और उन्हें अल्लाह की तरफ बुलाया। यह दावत उन्होंने बड़ी शफ़्क़त और मुहब्बत के साथ पेश की, क्योंकि वह उनके भाई थे और उनकी भलाई चाहते थे।


फ़ायदे (सबक):

  1. तौहीद ही असली दीन है: हर नबी की दावत का पहला और बुनियादी पैग़ाम यही था कि अल्लाह की इबादत करो और शिर्क से बचो। यही इस्लाम का मरकज़ी नुक़्ता है।
  2. नसब का रिश्ता दीन से बड़ा नहीं: हूद (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम के भाई थे, लेकिन जब उन्होंने अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया तो क़ौम ने उन्हें झुठलाया। इससे सबक मिलता है कि रिश्तेदारी की मुहब्बत दीन की सच्चाई पर क़ुर्बान होनी चाहिए, और सच बोलने में किसी के डर या लिहाज़ से पीछे नहीं हटना चाहिए।
  3. शिर्क अल्लाह पर बोहतान है: जब इंसान अल्लाह के साथ किसी और को पूजता है, तो वह अल्लाह पर झूठ बोलता है, क्योंकि अल्लाह ने कभी इसकी इजाज़त नहीं दी। यह सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे बड़ा गुनाह है।
  4. दावत में नर्मी और मुहब्बत: हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को "ऐ मेरी क़ौम" कहकर पुकारा, जो दावत में मुहब्बत और शफ़्क़त का तरीक़ा सिखाता है। इस्लाम में दावत नफ़रत से नहीं, बल्कि प्यार और हिकमत से दी जाती है।
  5. अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा: अल्लाह ने हर क़ौम की तरफ उन्हीं में से रसूल भेजा, ताकि वे उनकी भाषा और उनके हालात समझ सकें। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की निशानी है कि वह हिदायत का ज़रिया हर क़ौम तक पहुँचाता है।


📜 आयत 48-52 — हूद

48قِيلَ يَا نُوحُ اهْبِطْ بِسَلَامٍ مِّنَّا وَبَرَكَاتٍ عَلَيْكَ وَعَلَىٰ أُمَمٍ مِّمَّن مَّعَكَ ۚ وَأُمَمٌ سَنُمَتِّعُهُمْ ثُمَّ يَمَسُّهُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ
जो तुम पर हैं और जो लोग तुम्हारे साथ हैं उनमें से न कुछ लोगों पर और (तुम्हारे बाद) कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें हम थोड़े ही दिन बाद बहरावर करेगें फिर हमारी तरफ से उनको दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
49تِلْكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهَا إِلَيْكَ ۖ مَا كُنتَ تَعْلَمُهَا أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَٰذَا ۖ فَاصْبِرْ ۖ إِنَّ الْعَاقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ
(ऐ रसूल) ये ग़ैब की चन्द ख़बरे हैं जिनको तुम्हारी तरफ वही के ज़रिए पहुँचाते हैं जो उसके क़ब्ल न तुम जानते थे और न तुम्हारी क़ौम ही (जानती थी) तो तुम सब्र करो इसमें शक़ नहीं कि आख़िारत (की खूबियाँ) परहेज़गारों ही के वास्ते हैं
50وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ
और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को (पैग़म्बर बनाकर भेजा और) उन्होनें अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करों उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तुम बस निरे इफ़तेरा परदाज़ (झूठी बात बनाने वाले) हो
51يَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى الَّذِي فَطَرَنِي ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं मॉगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्श के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
52وَيَا قَوْمِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا مُجْرِمِينَ
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
50आयत

अनुवाद — हूद 50

सूरा हूद आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को…

सूरा आयत 50/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए