Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اعْتَرَاكَ: तुझे छू लिया, तुझ पर हावी हो गया।
- بِسُوءٍ: किसी बुराई या नुक़सान से, यानी पागलपन या सिज़्दा।
- أُشْهِدُ اللهَ: मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ।
- بَرِيءٌ: मैं बरी हूँ, मेरा कोई संबंध नहीं है।
- مِمَّا تُشْرِكُونَ: उन चीज़ों से जिन्हें तुम (अल्लाह के साथ) साझीदार बनाते हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम 'आद' को एक अल्लाह की इबादत की दावत दी और उन्हें उनके बुतों की पूजा से रोका, तो उनकी क़ौम ने जवाब में कहा: "हम तो यही कहते हैं कि हमारे किसी देवता ने तुझ पर कोई बुराई भेज दी है, यानी तुझे पागल बना दिया है, क्योंकि तू हमारे देवताओं को बुरा भला कहता है और हमें उनकी पूजा से रोकता है।"
इस पर हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने बड़े साहस और दृढ़ विश्वास के साथ जवाब दिया: "मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं उन सब चीज़ों से बरी और पाक हूँ जिन्हें तुम अल्लाह के साथ साझीदार बनाकर पूजते हो। मेरा उनसे कोई संबंध नहीं, न मैं उनकी इबादत करता हूँ और न उनसे कोई डर रखता हूँ।"
यह कहकर उन्होंने अपनी क़ौम को चुनौती दी कि तुम सब मिलकर और अपने उन देवताओं को बुलाकर जिनके बारे में तुम्हारा ख़्याल है कि उन्होंने मुझे पागल किया है, मेरे साथ जो चाहो करो, मुझे कोई परवाह नहीं। क्योंकि मुझे पूरा यक़ीन है कि न तो तुम मुझे कोई नुक़सान पहुँचा सकते हो और न तुम्हारे देवता। मेरा भरोसा केवल अल्लाह पर है, जो सारी दुनिया का रब है।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- सच्चे ईमान की निशानी यह है कि इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और किसी मख़लूक़ या झूठे देवता से न डरे। हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) का यह क़ौल हमें सिखाता है कि हक़ पर होने की हालत में किसी की धमकी या ताने से घबराना नहीं चाहिए।
- शिर्क (बुतपरस्ती) से बरी होने का ऐलान करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है। जिस तरह हज़रत हूद ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि मैं तुम्हारे शिर्क से बरी हूँ, उसी तरह हमें भी हर उस चीज़ से बरी होने का इज़हार करना चाहिए जो अल्लाह के साथ शिर्क हो।
- दुश्मनों की बातों से दिल पर असर नहीं होना चाहिए। क़ौम ने उन्हें पागल कहा, लेकिन उन्होंने इसका जवाब सब्र और हिकमत से दिया, ग़ुस्से में नहीं आए। यह हमारे लिए बड़ा सबक़ है कि बुरे लोगों की बातों का जवाब अच्छे अख़्लाक़ से दें।
- अल्लाह को गवाह बनाना एक बहुत बड़ी ताक़त है। जब इंसान अपने दावे में सच्चा होता है और अल्लाह को गवाह बनाता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसे कामयाबी देता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ की राह पर चलने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अंजाम हमेशा सब्र करने वालों के हक़ में होता है। हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब आया और उन्हें और उनके साथियों को नजात मिली।
📜 आयत 52-56 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 54
सूरा हूद आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम तो बस ये कहते हैं कि हमारे ख़ुदाओं में…सूरा आयत 54/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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