हूद · 55/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
مِن دُونِهِ ۖ فَكِيدُونِي جَمِيعًا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ ۝٥٥
Min doonihee fakeedoonee jamee`an summa laa tunziroon
📖 हिंदी अर्थ
इसमे मै बेज़ार हूँ तो तुम सब के सब मेरे साथ मक्कारी करो और मुझे (दम मारने की) मोहलत भी न दो तो मुझे परवाह नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مِن دُونِهِ: उस (अल्लाह) के अतिरिक्त जिन्हें तुम पूजते हो।
  • فَكِيدُونِي: मेरे विरुद्ध चाल चलो, मुझे हानि पहुँचाने का प्रयत्न करो।
  • جَمِيعًا: सब मिलकर, तुम और तुम्हारे देवता।
  • لَا تُنظِرُونِ: मुझे बिल्कुल भी मोहलत न दो, देर न करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उनसे कहा था कि हमारा ख़याल है कि हमारे किसी देवता ने तुम्हें जिन्न या पागलपन में डाल दिया है, क्योंकि तुम हमें उनकी पूजा से रोकते हो। इस पर हूद (अलैहिस्सलाम) ने स्पष्ट और दृढ़ उत्तर दिया: "मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं उन सबसे बरी (मुक्त) हूँ जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो।" फिर उन्होंने चुनौती देते हुए कहा: "तो अब तुम सब मिलकर—तुम और तुम्हारे वे देवता जिन्हें तुम मेरे बारे में बुरा गुमान रखते हो—मेरे विरुद्ध अपनी सारी चालें चल लो, मुझे कोई मोहलत मत दो, एक पल की भी देर न करो।" यह कहकर हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी पूर्ण निडरता और अल्लाह पर अटूट भरोसे का प्रदर्शन किया, क्योंकि उन्हें पूरा यक़ीन था कि अल्लाह की हिफ़ाज़त में उन्हें न तो क़ौम का नुक़्सान पहुँच सकता है और न ही उनके देवताओं का।

फ़ायदे (सीख):

  1. तौहीद का एलान: यह आयत सिखाती है कि सच्चा मोमिन हर उस चीज़ से बरी हो जाता है जो अल्लाह के सिवा पूजी जाती है, और वह इस बात का ऐलान करने में किसी भी तरह का डर या झिझक महसूस नहीं करता।
  2. अल्लाह पर भरोसा: हूद (अलैहिस्सलाम) का यह क़ौल हमें सिखाता है कि जब इंसान का भरोसा अल्लाह पर पूरा होता है, तो वह दुनिया की सारी ताक़तों के सामने अकेला भी निडर खड़ा रहता है, क्योंकि उसे मालूम होता है कि अल्लाह ही सबसे बड़ा हिफ़ाज़त करने वाला है।
  3. सच्चाई पर अडिग रहना: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए किसी की धमकी, ताने या बुरे गुमान से विचलित नहीं होना चाहिए; बल्कि सच्चाई का ऐलान करते रहना चाहिए।
  4. बुतपरस्ती की बेबुनियादी: यहाँ अल्लाह ने बताया कि जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पूजते हैं, वे न तो किसी को फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न ही नुक़्सान; इसलिए उनसे डरना मूर्खता है। यह हमें सिखाता है कि हमें केवल अल्लाह से डरना चाहिए और उसी से उम्मीद रखनी चाहिए।


📜 आयत 53-57 — सूरा हूद

53قَالُوا يَا هُودُ مَا جِئْتَنَا بِبَيِّنَةٍ وَمَا نَحْنُ بِتَارِكِي آلِهَتِنَا عَن قَوْلِكَ وَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई दलील लेकर तो आए नहीं और तुम्हारे कहने से अपने ख़ुदाओं को तो छोड़ने वाले नहीं और न हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं
54إِن نَّقُولُ إِلَّا اعْتَرَاكَ بَعْضُ آلِهَتِنَا بِسُوءٍ ۗ قَالَ إِنِّي أُشْهِدُ اللَّهَ وَاشْهَدُوا أَنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
हम तो बस ये कहते हैं कि हमारे ख़ुदाओं में से किसने तुम्हें मजनून (दीवाना) बना दिया है (इसी वजह से तुम) बहकी बहकी बातें करते हो हूद ने जवाब दिया बेशक मै ख़ुदा को गवाह करता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि तुम ख़ुदा के सिवा (दूसरों को) उसका शरीक बनाते हो
55مِن دُونِهِ ۖ فَكِيدُونِي جَمِيعًا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ
इसमे मै बेज़ार हूँ तो तुम सब के सब मेरे साथ मक्कारी करो और मुझे (दम मारने की) मोहलत भी न दो तो मुझे परवाह नहीं
56إِنِّي تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُم ۚ مَّا مِن دَابَّةٍ إِلَّا هُوَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
मै तो सिर्फ ख़ुदा पर भरोसा रखता हूँ जो मेरा भी परवरदिगार है और तुम्हारा भी परवरदिगार है और रुए ज़मीन पर जितने चलने वाले हैं सबकी चोटी उसी के साथ है इसमें तो शक़ ही नहीं कि मेरा परवरदिगार (इन्साफ की) सीधी राह पर है
57فَإِن تَوَلَّوْا فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّي قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُ شَيْئًا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ
इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक़ नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — हूद 55

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Saturday, October 3, 2026

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