अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مِن دُونِهِ: उस (अल्लाह) के अतिरिक्त जिन्हें तुम पूजते हो।
- فَكِيدُونِي: मेरे विरुद्ध चाल चलो, मुझे हानि पहुँचाने का प्रयत्न करो।
- جَمِيعًا: सब मिलकर, तुम और तुम्हारे देवता।
- لَا تُنظِرُونِ: मुझे बिल्कुल भी मोहलत न दो, देर न करो।
तफ़सीर (व्याख्या):
हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उनसे कहा था कि हमारा ख़याल है कि हमारे किसी देवता ने तुम्हें जिन्न या पागलपन में डाल दिया है, क्योंकि तुम हमें उनकी पूजा से रोकते हो। इस पर हूद (अलैहिस्सलाम) ने स्पष्ट और दृढ़ उत्तर दिया: "मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं उन सबसे बरी (मुक्त) हूँ जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो।" फिर उन्होंने चुनौती देते हुए कहा: "तो अब तुम सब मिलकर—तुम और तुम्हारे वे देवता जिन्हें तुम मेरे बारे में बुरा गुमान रखते हो—मेरे विरुद्ध अपनी सारी चालें चल लो, मुझे कोई मोहलत मत दो, एक पल की भी देर न करो।" यह कहकर हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी पूर्ण निडरता और अल्लाह पर अटूट भरोसे का प्रदर्शन किया, क्योंकि उन्हें पूरा यक़ीन था कि अल्लाह की हिफ़ाज़त में उन्हें न तो क़ौम का नुक़्सान पहुँच सकता है और न ही उनके देवताओं का।
फ़ायदे (सीख):
- तौहीद का एलान: यह आयत सिखाती है कि सच्चा मोमिन हर उस चीज़ से बरी हो जाता है जो अल्लाह के सिवा पूजी जाती है, और वह इस बात का ऐलान करने में किसी भी तरह का डर या झिझक महसूस नहीं करता।
- अल्लाह पर भरोसा: हूद (अलैहिस्सलाम) का यह क़ौल हमें सिखाता है कि जब इंसान का भरोसा अल्लाह पर पूरा होता है, तो वह दुनिया की सारी ताक़तों के सामने अकेला भी निडर खड़ा रहता है, क्योंकि उसे मालूम होता है कि अल्लाह ही सबसे बड़ा हिफ़ाज़त करने वाला है।
- सच्चाई पर अडिग रहना: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए किसी की धमकी, ताने या बुरे गुमान से विचलित नहीं होना चाहिए; बल्कि सच्चाई का ऐलान करते रहना चाहिए।
- बुतपरस्ती की बेबुनियादी: यहाँ अल्लाह ने बताया कि जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पूजते हैं, वे न तो किसी को फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न ही नुक़्सान; इसलिए उनसे डरना मूर्खता है। यह हमें सिखाता है कि हमें केवल अल्लाह से डरना चाहिए और उसी से उम्मीद रखनी चाहिए।
📜 आयत 53-57 — हूद
अनुवाद — हूद 55
सूरा हूद आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमे मै बेज़ार हूँ तो तुम सब के सब मेरे…सूरा आयत 55/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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