अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَوَكَّلْتُ: मैंने भरोसा किया, अपना मामला सौंप दिया।
- دَابَّة: चलने-फिरने वाला प्राणी, धरती पर चलने वाला हर जीव।
- آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا: उसके माथे (अगले हिस्से) को पकड़ने वाला, यानी उस पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाला।
- صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ: सीधा रास्ता, न्याय और सत्य का मार्ग।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यह स्पष्ट कर दिया कि मैंने अकेले अल्लाह पर भरोसा किया है, जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब है। वही सारे संसार का पालनहार, स्वामी और शासक है। मैंने उसी पर अपना पूरा भरोसा और आश्रय टिका दिया है, क्योंकि वही सब कुछ करने की शक्ति रखता है।
फिर उन्होंने यह बताया कि धरती पर चलने-फिरने वाला कोई भी प्राणी ऐसा नहीं है जो अल्लाह के नियंत्रण और अधिकार से बाहर हो। हर जीव की लगाम उसी के हाथ में है, वही उसकी रक्षा करता है, उसे रिज़्क़ देता है और उसके मामलों को चलाता है। कोई भी चीज़ उसकी इच्छा के बिना हिल नहीं सकती, न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती है और न फ़ायदा।
उन्होंने आगे कहा: "मेरा रब सीधे रास्ते पर है" यानी अल्लाह के सारे काम न्याय, हिकमत और सत्य पर आधारित हैं। वह अपने फ़ैसलों में कभी ज़ुल्म नहीं करता, अपने वादों में कभी ख़िलाफ़ नहीं करता। वह नेकी करने वाले को उसकी नेकी का बदला देता है और बुराई करने वाले को उसकी बुराई की सज़ा देता है। इसलिए मुझे पूरा यक़ीन है कि अल्लाह मुझे तुम्हारे ज़ुल्म से बचाएगा, क्योंकि मैं सत्य पर हूँ और तुम बातिल पर हो। वह कभी सत्य को बातिल पर हावी नहीं होने देता।
फ़ायदे (सबक़):
- तवक्कुल की ताक़त: जब इंसान सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करता है, तो उसे किसी इंसानी ताक़त का डर नहीं रहता। यही तवक्कुल मोमिन की सबसे बड़ी ताक़त है।
- अल्लाह का पूर्ण नियंत्रण: यह आयत हमें सिखाती है कि इस कायनात का हर ज़र्रा अल्लाह के इख़्तियार में है। कोई चीज़ उसकी मर्ज़ी के बिना नहीं होती, इसलिए हमें सिर्फ़ उसी से डरना चाहिए और उसी से उम्मीद रखनी चाहिए।
- अल्लाह का न्याय: अल्लाह हमेशा सत्य और न्याय के रास्ते पर है। वह कभी ज़ुल्म नहीं करता। यह बात मोमिन के दिल को सुकून देती है कि चाहे दुनिया में कितना भी ज़ुल्म हो, अल्लाह का इन्साफ़ ज़रूर आएगा।
- सत्य का साथ: हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) का यह क़ौल हमें सिखाता है कि सत्य पर डटे रहना चाहिए, भले ही सामने कितनी भी बड़ी ताक़त क्यों न हो। अल्लाह सत्य पर क़ायम रहने वालों की हिफ़ाज़त करता है।
- अल्लाह की रक्षा: जो इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। दुश्मनों की साज़िशें उसे नुक़सान नहीं पहुँचा सकतीं, क्योंकि उसका रब उसके साथ है।
📜 आयत 54-58 — हूद
अनुवाद — हूद 56
सूरा हूद आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मै तो सिर्फ ख़ुदा पर भरोसा रखता हूँ जो मेरा…सूरा आयत 56/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








