Wamra atuhoo qaaa`imatun fadahikat fabashsharnaahaa bi Ishaaqa wa minw waraaa`i Ishaaqa Ya`qoob
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
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اور ابراہیم کی بیوی (جو پاس) کھڑی تھی، ہنس پڑی تو ہم نے اس کو اسحاق کی اور اسحاق کے بعد یعقوب کی خوشخبری دی
यह आयत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की पत्नी सारा (रज़ियल्लाहु अन्हा) का वर्णन कर रही है। जब अल्लाह के फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास आए और उन्हें शुभ सूचना दी, तो उस समय सारा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर्दे के पीछे खड़ी थीं और यह सब सुन रही थीं। जब उन्होंने फ़रिश्तों की बातें सुनीं, तो वे आश्चर्य और खुशी से हँस पड़ीं। उनके हँसने पर फ़रिश्तों ने उन्हें शुभ सूचना दी कि उन्हें एक पुत्र होगा जिसका नाम इस्हाक़ होगा, और इस्हाक़ के बाद उनका पोता याकूब होगा। यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी थी, क्योंकि सारा (रज़ियल्लाहु अन्हा) बूढ़ी हो चुकी थीं और उन्हें संतान की उम्मीद नहीं थी। यह अल्लाह की क़ुदरत का प्रत्यक्ष प्रमाण था कि वह जब चाहता है, असंभव को संभव कर देता है। यह शुभ सूचना यह भी दर्शाती है कि सारा (रज़ियल्लाहु अन्हा) जीवित रहेंगी और अपने पोते याकूब को भी देखेंगी, जो आगे चलकर एक नबी बने।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह की क़ुदरत की कोई सीमा नहीं है — वह बूढ़ी और बांझ स्त्री को भी संतान दे सकता है। इसलिए हमें कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
अल्लाह के फ़रिश्ते नेक लोगों के लिए खुशखबरी लेकर आते हैं, और नेक लोगों की दुआएँ और आशाएँ कभी बेकार नहीं जातीं।
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और सारा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की तरह हमें भी अल्लाह की बातों पर विश्वास करना चाहिए, भले ही वे हमारी समझ से परे क्यों न हों।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को उनकी उम्र के किसी भी पड़ाव पर अपनी रहमत से नवाज़ सकता है — हमें केवल सब्र और भरोसा रखना चाहिए।
संतान अल्लाह की ओर से एक बहुत बड़ी नेमत है, और इस नेमत के लिए हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसे अच्छी परवरिश देकर नेक बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुशख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोश्त) ले आए
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
वह फरिश्ते बोले (हाए) तुम ख़ुदा की कुदरत से ताज्जुब करती हो ऐ अहले बैत (नबूवत) तुम पर ख़ुदा की रहमत और उसकी बरकते (नाज़िल हो) इसमें शक़ नहीं कि वह क़ाबिल हम्द (वासना) बुज़ुर्ग हैं
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