हूद · 72/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
قَالَتْ يَا وَيْلَتَىٰ أَأَلِدُ وَأَنَا عَجُوزٌ وَهَٰذَا بَعْلِي شَيْخًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عَجِيبٌ ۝٧٢
Qaalat yaa wailataaa `aalidu wa ana `ajoozunw wa haaza ba`lee shaikhan inna haazaa lashai`un `ajeeb
📖 हिंदी अर्थ
वह कहने लगी ऐ है क्या अब मै बच्चा जनने बैठॅूगी मैं तो बुढ़िया हूँ और ये मेरे मियॉ भी बूढे है ये तो एक बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَا وَيْلَتَى: यह अरबी में आश्चर्य और हैरानी व्यक्त करने का शब्द है, जो किसी अत्यंत महत्वपूर्ण घटना पर बोला जाता है। इसका अर्थ है "हाय! कितना आश्चर्य है!"
  • بَعْلِي: मेरा पति।
  • شَيْخًا: बूढ़ा, वृद्ध।
  • عَجِيبٌ: आश्चर्यजनक, हैरान करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह के फ़रिश्तों ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की पत्नी सारा को इस ख़ुशख़बरी की बशारत दी कि उन्हें एक बेटा (इस्हाक़) होगा, तो वे बड़े आश्चर्य में पड़ गईं। उन्होंने कहा: "हाय! मुझ पर क्या आश्चर्य की बात है! मैं कैसे बच्चे को जन्म दूँ, जबकि मैं एक बूढ़ी औरत हूँ और यह मेरा पति भी बहुत बुज़ुर्ग हो चुका है? यह तो बड़ी ही अजीब और हैरान करने वाली बात है!"

उनका यह आश्चर्य अल्लाह की क़ुदरत पर शक करने के कारण नहीं था, बल्कि यह उस उम्र में बच्चे के पैदा होने की आम रीति और प्राकृतिक नियम के विपरीत होने की वजह से था। वे जानती थीं कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, लेकिन यह बात उनके लिए हैरानी का सबब बनी कि इस उम्र में यह कैसे मुमकिन है? यह उनकी फ़ितरती और स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी, जो किसी अनोखी बात को सुनकर इंसान के ज़ेहन में आती है।

फ़ायदे और सबक:

  1. अल्लाह की क़ुदरत की अज़मत: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत किसी उम्र, हालत या वज़ाह से मुक़य्यद नहीं है। जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो उसके लिए सिर्फ़ "कुन" (हो जा) कहना काफ़ी है। इसलिए हमें कभी भी अल्लाह की रहमत और क़ुदरत से मायूस नहीं होना चाहिए।
  2. आश्चर्य का जायज़ होना: इंसान का किसी अनोखी बात पर हैरान होना कोई बुरी बात नहीं है, बशर्ते वह अल्लाह की क़ुदरत पर शक न करे। हज़रत सारा का आश्चर्य ईमान के साथ था, इसलिए अल्लाह ने उन्हें माफ़ फ़रमाया और यह बात क़ुरआन में बयान की।
  3. अल्लाह की रहमत से उम्मीद: जब इंसान उम्र के आख़िरी हिस्से में होता है, तो उसे लगता है कि अब कोई ख़ैर और भलाई नहीं हो सकती। लेकिन यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और उसकी अता किसी भी हालत में इंसान तक पहुँच सकती है। हमें हमेशा अल्लाह से अच्छी उम्मीद रखनी चाहिए।
  4. पैग़म्बरों के घराने की बरकत: यह घटना बताती है कि अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के घराने को बुज़ुर्गी की उम्र में भी संतान देकर सम्मानित किया, ताकि यह साबित हो कि यह संतान अल्लाह की ख़ास देन है, न कि सिर्फ़ प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा।
🎧 सुनें

📜 आयत 70-74 — हूद

70فَلَمَّا رَأَىٰ أَيْدِيَهُمْ لَا تَصِلُ إِلَيْهِ نَكِرَهُمْ وَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۚ قَالُوا لَا تَخَفْ إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمِ لُوطٍ
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
71وَامْرَأَتُهُ قَائِمَةٌ فَضَحِكَتْ فَبَشَّرْنَاهَا بِإِسْحَاقَ وَمِن وَرَاءِ إِسْحَاقَ يَعْقُوبَ
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
72قَالَتْ يَا وَيْلَتَىٰ أَأَلِدُ وَأَنَا عَجُوزٌ وَهَٰذَا بَعْلِي شَيْخًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عَجِيبٌ
वह कहने लगी ऐ है क्या अब मै बच्चा जनने बैठॅूगी मैं तो बुढ़िया हूँ और ये मेरे मियॉ भी बूढे है ये तो एक बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है
73قَالُوا أَتَعْجَبِينَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۖ رَحْمَتُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الْبَيْتِ ۚ إِنَّهُ حَمِيدٌ مَّجِيدٌ
वह फरिश्ते बोले (हाए) तुम ख़ुदा की कुदरत से ताज्जुब करती हो ऐ अहले बैत (नबूवत) तुम पर ख़ुदा की रहमत और उसकी बरकते (नाज़िल हो) इसमें शक़ नहीं कि वह क़ाबिल हम्द (वासना) बुज़ुर्ग हैं
74فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ الرَّوْعُ وَجَاءَتْهُ الْبُشْرَىٰ يُجَادِلُنَا فِي قَوْمِ لُوطٍ
फिर जब इबराहीम (के दिल) से ख़ौफ जाता रहा और उनके पास (औलाद की) खुशख़बरी भी आ चुकी तो हम से क़ौमे लूत के बारे में झगड़ने लगे
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अनुवाद — हूद 72

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Tuesday, August 18, 2026

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