Falammaa ra aaa aidiyahum laa tasilu ilaihi nakirahum wa awjasa minhum kheefah; qaaloo la takhaf innaaa ursilnaaa ilaa qawmi Loot
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
🌐 Additional reference in اردو
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جب دیکھا کہ ان کے ہاتھ کھانے کی طرف نہیں جاتے (یعنی وہ کھانا نہیں کھاتے) تو ان کو اجنبی سمجھ کر دل میں خوف کیا۔ (فرشتوں نے) کہا کہ خوف نہ کیجیے، ہم قوم لوط کی طرف (ان کے ہلاک کرنے کو) بھیجے گئے ہیں
नकिरहुम (نَكِرَهُمْ): उन्हें अनजान समझा, उनके बारे में बुरा गुमान किया।
औजसा (أَوْجَسَ): अपने दिल में छिपाया, महसूस किया।
ख़ीफ़ा (خِيفَةً): डर, भय।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने देखा कि मेहमानों के हाथ उस भुने हुए बछड़े की तरफ़ नहीं बढ़ रहे हैं और वे उसे नहीं खा रहे हैं, तो वे उनसे अनजान हुए और उन्होंने अपने दिल में उनसे डर महसूस किया। यह डर इसलिए था क्योंकि उस समय के रिवाज के मुताबिक़, अगर कोई मेहमान खाना न खाए तो समझा जाता था कि उसका इरादा बुरा है। जब फ़रिश्तों ने हज़रत इब्राहीम का यह डर देखा, तो उन्होंने तसल्ली देते हुए कहा: "डरो मत, हम अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं, हम आपके दुश्मन नहीं हैं। हमें हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम की तरफ़ भेजा गया है ताकि उन्हें उनके गुनाहों की सज़ा दी जाए।"
यहाँ अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम की मेहमाननवाज़ी का ज़िक्र किया है कि उन्होंने फ़रिश्तों को मेहमान समझकर उनके लिए खाना तैयार किया, लेकिन जब उन्होंने खाना नहीं खाया तो वे घबरा गए। फ़रिश्तों ने उन्हें सुकून दिया और अपना परिचय दिया।
फ़ायदे (सबक):
मेहमाननवाज़ी इस्लाम की पहचान है: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मेहमानों के लिए भुना हुआ बछड़ा पेश किया, यह हमें सिखाता है कि मेहमान का सम्मान करना और उसकी ख़ातिरदारी करना इस्लामी अख़्लाक़ का हिस्सा है।
डर और घबराहट में अल्लाह पर भरोसा: जब इंसान किसी मुश्किल या डर की स्थिति में हो, तो उसे अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। फ़रिश्तों ने हज़रत इब्राहीम को तसल्ली दी, यह दिखाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है।
अल्लाह के फ़ैसले पर यक़ीन: फ़रिश्तों का हज़रत लूत की क़ौम की तरफ़ भेजा जाना यह बताता है कि अल्लाह की सज़ा उसकी मोहलत के बाद आती है, और अल्लाह का इंसाफ़ कभी ग़लत नहीं होता।
नेक लोगों की हिफ़ाज़त: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को मुसीबतों से बचाता है और उन्हें सुकून देता है, चाहे हालात कितने भी भयानक क्यों न हों।
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
और ऐसे मर मिटे कि गोया उनमें कभी बसे ही न थे तो देखो क़ौमे समूद ने अपने परवरदिगार की नाफरमानी की और (सज़ा दी गई) सुन रखो कि क़ौमे समूद (उसकी बारगाह से) धुत्कारी हुईहै
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुशख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोश्त) ले आए
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं
और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुई थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हेंफ़रिश्तों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की
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