हूद · 82/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ مَّنضُودٍ ۝٨٢
Falammaa jaaa`a amrunaa ja`alnaa `aaliyahaa saafilahaa wa amtamaa `alaihaa hijaaratam min sijjeelim mandood
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने (बस्ती की ज़मीन के तबके) उलट कर उसके ऊपर के हिस्से को नीचे का बना दिया और उस पर हमने खरन्जेदार पत्थर ताबड़ तोड़ बरसाए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سِجِّيل (सिज्जील): पकी हुई मिट्टी का सख्त पत्थर।
  • مَّنضُود (मनज़ूद): क्रमबद्ध, एक के ऊपर एक लगातार गिरने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हमारा आदेश आया और उन पर अज़ाब का वक़्त आ गया, तो हमने उनकी बस्तियों को उलट दिया—उनके ऊपर वाले हिस्से को नीचे कर दिया और नीचे वाले को ऊपर। यानी पूरी बस्ती को ज़मीन में धँसा दिया और उलट-पलट कर तबाह कर दिया। फिर उन पर पकी हुई सख्त मिट्टी के पत्थरों की बारिश कर दी, जो लगातार और क्रमबद्ध तरीके से एक के बाद एक गिरते रहे। ये पत्थर आम पत्थरों की तरह नहीं थे, बल्कि अल्लाह के पास से निशान लगे हुए थे। यह अज़ाब उन लोगों के लिए था जो हद से गुज़र गए थे और अल्लाह के नबी लूत (अलैहिस्सलाम) की बात नहीं मानी थी। यह घटना सिर्फ इतिहास का एक क़िस्सा नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए चेतावनी है जो अल्लाह की नाफ़रमानी और बुराई में डूबा रहता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का अज़ाब जब आता है तो कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती, चाहे वो बस्ती कितनी भी मज़बूत क्यों न हो।
  2. अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है—वो गुनाहगारों को उनकी बुराइयों की सज़ा ऐसे अंदाज़ में देता है जिसका अंदाज़ा इंसान नहीं लगा सकता।
  3. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के नबियों की बात मानना और उनकी उम्मत में शामिल होना ही नजात का ज़रिया है।
  4. अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके हुक्म से हैं—जो लोग नेकी करते हैं वो रहमत के हक़दार बनते हैं, और जो बुराई में डूबे रहते हैं वो अज़ाब से नहीं बच सकते।
  5. यह घटना हमें याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है, और असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा और उसके दीन पर चलने में है।


📜 आयत 80-84 — हूद

80قَالَ لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَىٰ رُكْنٍ شَدِيدٍ
लूत ने कहा काश मुझमें तुम्हारे मुक़ाबले की कूवत होती या मै किसी मज़बूत क़िले मे पनाह ले सकता
81قَالُوا يَا لُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلُوا إِلَيْكَ ۖ فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ اللَّيْلِ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ إِلَّا امْرَأَتَكَ ۖ إِنَّهُ مُصِيبُهَا مَا أَصَابَهُمْ ۚ إِنَّ مَوْعِدَهُمُ الصُّبْحُ ۚ أَلَيْسَ الصُّبْحُ بِقَرِيبٍ
वह फरिश्ते बोले ऐ लूत हम तुम्हारे परवरदिगार के भेजे हुए (फरिश्ते हैं तुम घबराओ नहीं) ये लोग तुम तक हरगिज़ (नहीं पहुँच सकते तो तुम कुछ रात रहे अपने लड़कों बालों समैत निकल भागो और तुममें से कोई इधर मुड़ कर भी न देखे मगर तुम्हारी बीबी कि उस पर भी यक़ीनन वह अज़ाब नाज़िल होने वाला है जो उन लोगों पर नाज़िल होगा और उन (के अज़ाब का) वायदा बस सुबह है क्या सुबह क़रीब नहीं
82فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ مَّنضُودٍ
फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने (बस्ती की ज़मीन के तबके) उलट कर उसके ऊपर के हिस्से को नीचे का बना दिया और उस पर हमने खरन्जेदार पत्थर ताबड़ तोड़ बरसाए
83مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَمَا هِيَ مِنَ الظَّالِمِينَ بِبَعِيدٍ
जिन पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान बनाए हुए थे और वह बस्ती (उन) ज़ालिमों (कुफ्फ़ारे मक्का) से कुछ दूर नहीं
84۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ وَلَا تَنقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ ۚ إِنِّي أَرَاكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा
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अनुवाद — हूद 82

सूरा हूद आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने…

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Tuesday, August 18, 2026

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