हूद · 83/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَمَا هِيَ مِنَ الظَّالِمِينَ بِبَعِيدٍ ۝٨٣
Musawwamatan `inda Rabbik; wa maa hiya minaz zaalimena biba`eed
📖 हिंदी अर्थ
जिन पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान बनाए हुए थे और वह बस्ती (उन) ज़ालिमों (कुफ्फ़ारे मक्का) से कुछ दूर नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُسَوَّمَةً: निशान लगाई हुई, चिह्नित।
  • عِندَ رَبِّكَ: तेरे पालनहार के पास।
  • مِنَ الظَّالِمِينَ: अत्याचारियों (यहाँ अर्थ: मक्का के मुशरिकों) से।
  • بِبَعِيدٍ: दूर नहीं।

व्याख्या:

ये पत्थर (जो क़ौमे-लूत पर बरसाए गए थे) तेरे पालनहार के पास विशेष निशान लगाए हुए थे — हर पत्थर पर उस व्यक्ति का नाम अंकित था जिस पर वह गिरना था। ये पत्थर अल्लाह के ख़ज़ानों में सुरक्षित थे, और अल्लाह के आदेश से ही इन्हें नीचे भेजा गया।

ये पत्थर (या ये अज़ाब) अत्याचारियों — विशेषकर मक्का के मुशरिकों — से दूर नहीं हैं। अर्थात् जिस प्रकार अल्लाह ने क़ौमे-लूत को इन पत्थरों से दण्ड दिया, उसी प्रकार वह इन ज़ालिमों को भी कभी भी इसी तरह के अज़ाब में डाल सकता है। यह एक चेतावनी है कि अल्लाह की पकड़ किसी भी समय आ सकती है, और वह ज़ालिमों से दूर नहीं है — बल्कि उनके बहुत करीब है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह की शक्ति असीम है — वह जिसे चाहे, जिस तरह चाहे, दण्ड दे सकता है। उसके आदेश के आगे कोई रुकावट नहीं।
  2. अल्लाह का अज़ाब ज़ालिमों के लिए बहुत निकट है — भले ही वे इसे दूर समझें। यह हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है जो अत्याचार और पाप में लिप्त है।
  3. अल्लाह का न्याय अत्यंत सूक्ष्म है — हर पत्थर पर निशान था, यह दर्शाता है कि अल्लाह की पकड़ में कोई बेइंसाफ़ी नहीं; हर कर्म का हिसाब ठीक-ठीक होगा।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे अल्लाह की पकड़ से डरें और उसकी रहमत की ओर लौटें — क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को क्षमा कर देता है, लेकिन ज़ालिमों के लिए उसकी पकड़ बहुत सख्त है।
  5. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नबी (ﷺ) को दिलासा दे रहा है कि जिस प्रकार क़ौमे-लूत का अंत हुआ, उसी प्रकार तेरी उम्मत के ज़ालिमों का भी अंत होगा — अतः धैर्य रखो और अपने मिशन पर दृढ़ रहो।


📜 आयत 81-85 — सूरा हूद

81قَالُوا يَا لُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلُوا إِلَيْكَ ۖ فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ اللَّيْلِ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ إِلَّا امْرَأَتَكَ ۖ إِنَّهُ مُصِيبُهَا مَا أَصَابَهُمْ ۚ إِنَّ مَوْعِدَهُمُ الصُّبْحُ ۚ أَلَيْسَ الصُّبْحُ بِقَرِيبٍ
वह फरिश्ते बोले ऐ लूत हम तुम्हारे परवरदिगार के भेजे हुए (फरिश्ते हैं तुम घबराओ नहीं) ये लोग तुम तक हरगिज़ (नहीं पहुँच सकते तो तुम कुछ रात रहे अपने लड़कों बालों समैत निकल भागो और तुममें से कोई इधर मुड़ कर भी न देखे मगर तुम्हारी बीबी कि उस पर भी यक़ीनन वह अज़ाब नाज़िल होने वाला है जो उन लोगों पर नाज़िल होगा और उन (के अज़ाब का) वायदा बस सुबह है क्या सुबह क़रीब नहीं
82فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ مَّنضُودٍ
फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने (बस्ती की ज़मीन के तबके) उलट कर उसके ऊपर के हिस्से को नीचे का बना दिया और उस पर हमने खरन्जेदार पत्थर ताबड़ तोड़ बरसाए
83مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَمَا هِيَ مِنَ الظَّالِمِينَ بِبَعِيدٍ
जिन पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान बनाए हुए थे और वह बस्ती (उन) ज़ालिमों (कुफ्फ़ारे मक्का) से कुछ दूर नहीं
84۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ وَلَا تَنقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ ۚ إِنِّي أَرَاكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ
और हमने मदयन वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बना कर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई ख़ुदा नहीं और नाप और तौल में कोई कमी न किया करो मै तो तुम को आसूदगी (ख़ुशहाली) में देख रहा हूँ (फिर घटाने की क्या ज़रुरत है) और मै तो तुम पर उस दिन के अज़ाब से डराता हूँ जो (सबको) घेर लेगा
85وَيَا قَوْمِ أَوْفُوا الْمِكْيَالَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और ऐ मेरी क़ौम पैमाने और तराज़ू ऌन्साफ़ के साथ पूरे पूरे रखा करो और लोगों को उनकी चीज़े कम न दिया करो और रुए ज़मीन में फसाद न फैलाते फिरो
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
83आयत

अनुवाद — हूद 83

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Thursday, October 1, 2026

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