यूसुफ · 10/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا يُوسُفَ وَأَلْقُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ السَّيَّارَةِ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ ۝١٠
Qaalaa qaaa`ilum minhum laa taqtuloo Yoosufa wa alqoohu fee ghayaabatil jubbi yaltaqithu badus sai yaarati in kuntum faa `ileen
📖 हिंदी अर्थ
उनमें से एक कहने वाला बोल उठा कि यूसुफ को जान से तो न मारो हाँ अगर तुमको ऐसा ही करना है तो उसको किसी अन्धे कुएँ में (ले जाकर) डाल दो कोई राहगीर उसे निकालकर ले जाएगा (और तुम्हारा मतलब हासिल हो जाएगा)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • غَيَابَةِ الْجُبِّ: कुएँ की गहराई या तल, जहाँ पहुँचकर चीज़ आँखों से ओझल हो जाए।
  • السَّيَّارَةِ: क़ाफ़िला, यात्री, या राहगीरों का समूह।
  • يَلْتَقِطْهُ: उसे उठा ले, बिना तलाश किए पा ले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उन्हें मार डालने या दूर फेंक देने की साज़िश रची, तो उन्हीं में से एक व्यक्ति (जो अक्सर बड़ा भाई या रहमदिल भाई था) बोला: "यूसुफ़ को क़त्ल मत करो। यह बहुत बड़ा ज़ुल्म और भयानक गुनाह होगा। इसके बजाय, उसे कुएँ की गहराई में डाल दो, जहाँ से वह निकल न सके। वहाँ से कोई गुज़रता हुआ क़ाफ़िला या यात्री उसे उठा ले जाएगा, और इस तरह हम उससे छुटकारा पा लेंगे।" उसने यह सुझाव इसलिए दिया ताकि भाइयों को क़त्ल के गुनाह से बचाया जा सके, और यह भी कहा: "अगर तुम लोगों ने यूसुफ़ के बारे में कुछ करने का फ़ैसला ही कर लिया है, तो यही रास्ता अपनाओ — क़त्ल नहीं, बल्कि कुएँ में डाल देना।"

यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि भाइयों का इरादा यूसुफ़ को नुक़सान पहुँचाने का था, लेकिन अल्लाह तआला ने उनकी इस साज़िश को यूसुफ़ की भलाई और उनके उच्च पद तक पहुँचने का ज़रिया बना दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत है कि वह बुराई से भी भलाई निकालता है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. इंसानियत और रहम: इस आयत से सीख मिलती है कि मुसीबत के वक़्त भी इंसान को रहम और नेकी का रास्ता अपनाना चाहिए। भाइयों में से एक ने क़त्ल से रोका और कम नुक़सान वाला रास्ता सुझाया — यह दिखाता है कि बुराई के माहौल में भी अच्छाई की आवाज़ उठाई जा सकती है।
  2. अल्लाह की तदबीर: इंसान चाहे जितनी साज़िशें करे, अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होता। यूसुफ़ को कुएँ में डाला गया, लेकिन यही उनके मिस्र के अज़ीज़ बनने का पहला क़दम बना। इससे मुसलमान को यक़ीन होता है कि हर मुश्किल में अल्लाह की रहमत छिपी होती है।
  3. गुनाह से बचाव: इस आयत में क़त्ल जैसे बड़े गुनाह से रोका गया है। इससे सबक़ मिलता है कि मुसलमान को हमेशा गुनाह के बड़े रूपों से बचना चाहिए और अगर बुराई करनी ही पड़े (जो गलत है), तो भी कम से कम नुक़सान वाला रास्ता चुनना चाहिए — हालाँकि असल में हर बुराई से बचना ही बेहतर है।
  4. भाईचारे की हिफ़ाज़त: यहूसुफ़ के भाइयों ने ईर्ष्या की वजह से यह क़दम उठाया, लेकिन इससे सबक़ लेना चाहिए कि ईर्ष्या और हसद इंसान को किस हद तक गिरा सकता है। मुसलमान को चाहिए कि वह भाईचारे और रिश्तों की क़द्र करे, और ईर्ष्या से बचे।
  5. अल्लाह पर भरोसा: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को कुएँ में अकेला छोड़ दिया गया, लेकिन अल्लाह ने उन्हें हिफ़ाज़त दी। यह सिखाता है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता बनाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — यूसुफ

8إِذْ قَالُوا لَيُوسُفُ وَأَخُوهُ أَحَبُّ إِلَىٰ أَبِينَا مِنَّا وَنَحْنُ عُصْبَةٌ إِنَّ أَبَانَا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
कि जब (यूसूफ के भाइयों ने) कहा कि बावजूद कि हमारी बड़ी जमाअत है फिर भी यूसुफ़ और उसका हकीक़ी भाई (इब्ने यामीन) हमारे वालिद के नज़दीक बहुत ज्यादा प्यारे हैं इसमें कुछ शक़ नहीं कि हमारे वालिद यक़ीनन सरीही (खुली हुई) ग़लती में पड़े हैं
9اقْتُلُوا يُوسُفَ أَوِ اطْرَحُوهُ أَرْضًا يَخْلُ لَكُمْ وَجْهُ أَبِيكُمْ وَتَكُونُوا مِن بَعْدِهِ قَوْمًا صَالِحِينَ
(ख़ैर तो अब मुनासिब ये है कि या तो) युसूफ को मार डालो या (कम से कम) उसको किसी जगह (चल कर) फेंक आओ तो अलबत्ता तुम्हारे वालिद की तवज्जो सिर्फ तुम्हारी तरफ हो जाएगा और उसके बाद तुम सबके सब (बाप की तवजज्जो से) भले आदमी हो जाओगें
10قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا يُوسُفَ وَأَلْقُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ السَّيَّارَةِ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
उनमें से एक कहने वाला बोल उठा कि यूसुफ को जान से तो न मारो हाँ अगर तुमको ऐसा ही करना है तो उसको किसी अन्धे कुएँ में (ले जाकर) डाल दो कोई राहगीर उसे निकालकर ले जाएगा (और तुम्हारा मतलब हासिल हो जाएगा)
11قَالُوا يَا أَبَانَا مَا لَكَ لَا تَأْمَنَّا عَلَىٰ يُوسُفَ وَإِنَّا لَهُ لَنَاصِحُونَ
सब ने (याक़ूब से) कहा अब्बा जान आख़िर उसकी क्या वजह है कि आप यूसुफ के बारे में हमारा ऐतबार नहीं करते
12أَرْسِلْهُ مَعَنَا غَدًا يَرْتَعْ وَيَلْعَبْ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
हालॉकि हम लोग तो उसके ख़ैर ख्वाह (भला चाहने वाले) हैं आप उसको कुल हमारे साथ भेज दीजिए कि ज़रा (जंगल) से फल वगैरह् खाए और खेले कूदे
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अनुवाद — यूसुफ 10

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Tuesday, August 18, 2026

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