अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- غَيَابَةِ الْجُبِّ: कुएँ की गहराई या तल, जहाँ पहुँचकर चीज़ आँखों से ओझल हो जाए।
- السَّيَّارَةِ: क़ाफ़िला, यात्री, या राहगीरों का समूह।
- يَلْتَقِطْهُ: उसे उठा ले, बिना तलाश किए पा ले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उन्हें मार डालने या दूर फेंक देने की साज़िश रची, तो उन्हीं में से एक व्यक्ति (जो अक्सर बड़ा भाई या रहमदिल भाई था) बोला: "यूसुफ़ को क़त्ल मत करो। यह बहुत बड़ा ज़ुल्म और भयानक गुनाह होगा। इसके बजाय, उसे कुएँ की गहराई में डाल दो, जहाँ से वह निकल न सके। वहाँ से कोई गुज़रता हुआ क़ाफ़िला या यात्री उसे उठा ले जाएगा, और इस तरह हम उससे छुटकारा पा लेंगे।" उसने यह सुझाव इसलिए दिया ताकि भाइयों को क़त्ल के गुनाह से बचाया जा सके, और यह भी कहा: "अगर तुम लोगों ने यूसुफ़ के बारे में कुछ करने का फ़ैसला ही कर लिया है, तो यही रास्ता अपनाओ — क़त्ल नहीं, बल्कि कुएँ में डाल देना।"
यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि भाइयों का इरादा यूसुफ़ को नुक़सान पहुँचाने का था, लेकिन अल्लाह तआला ने उनकी इस साज़िश को यूसुफ़ की भलाई और उनके उच्च पद तक पहुँचने का ज़रिया बना दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत है कि वह बुराई से भी भलाई निकालता है।
फ़ायदे (सबक़):
- इंसानियत और रहम: इस आयत से सीख मिलती है कि मुसीबत के वक़्त भी इंसान को रहम और नेकी का रास्ता अपनाना चाहिए। भाइयों में से एक ने क़त्ल से रोका और कम नुक़सान वाला रास्ता सुझाया — यह दिखाता है कि बुराई के माहौल में भी अच्छाई की आवाज़ उठाई जा सकती है।
- अल्लाह की तदबीर: इंसान चाहे जितनी साज़िशें करे, अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होता। यूसुफ़ को कुएँ में डाला गया, लेकिन यही उनके मिस्र के अज़ीज़ बनने का पहला क़दम बना। इससे मुसलमान को यक़ीन होता है कि हर मुश्किल में अल्लाह की रहमत छिपी होती है।
- गुनाह से बचाव: इस आयत में क़त्ल जैसे बड़े गुनाह से रोका गया है। इससे सबक़ मिलता है कि मुसलमान को हमेशा गुनाह के बड़े रूपों से बचना चाहिए और अगर बुराई करनी ही पड़े (जो गलत है), तो भी कम से कम नुक़सान वाला रास्ता चुनना चाहिए — हालाँकि असल में हर बुराई से बचना ही बेहतर है।
- भाईचारे की हिफ़ाज़त: यहूसुफ़ के भाइयों ने ईर्ष्या की वजह से यह क़दम उठाया, लेकिन इससे सबक़ लेना चाहिए कि ईर्ष्या और हसद इंसान को किस हद तक गिरा सकता है। मुसलमान को चाहिए कि वह भाईचारे और रिश्तों की क़द्र करे, और ईर्ष्या से बचे।
- अल्लाह पर भरोसा: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को कुएँ में अकेला छोड़ दिया गया, लेकिन अल्लाह ने उन्हें हिफ़ाज़त दी। यह सिखाता है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता बनाता है।
📜 आयत 8-12 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 10
सूरा यूसुफ आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनमें से एक कहने वाला बोल उठा कि यूसुफ को…सूरा आयत 10/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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