यूसुफ · 4/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
إِذْ قَالَ يُوسُفُ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ إِنِّي رَأَيْتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوْكَبًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ رَأَيْتُهُمْ لِي سَاجِدِينَ ۝٤
Iz qaala Yoosufu li abeehi yaaa abati innee ra aytu ahada `ashara kawkabanw wash shamsa walqamara ra aytuhum lee saajideen
📖 हिंदी अर्थ
(वह वक्त याद करो) जब यूसूफ ने अपने बाप से कहा ऐ अब्बा मैने ग्यारह सितारों और सूरज चाँद को (ख्वाब में) देखा है मैने देखा है कि ये सब मुझे सजदा कर रहे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कौकबन (كَوْكَبًا): तारा, नक्षत्र।
  • साजिदीन (سَاجِدِينَ): झुकने वाले, सिर झुकाने वाले, सम्मान में झुकने वाले।

व्याख्या:

हे नबी! आप अपनी क़ौम को यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की वह घटना सुनाइए, जब उन्होंने अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) से कहा: "ऐ मेरे पिता! मैंने स्वप्न में ग्यारह तारे देखे, और सूर्य और चंद्रमा को भी देखा। मैंने देखा कि ये सब मुझे सजदा कर रहे हैं।"

यह स्वप्न यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के लिए एक शुभ सूचना थी, जो आगे चलकर पूरी हुई। इस स्वप्न का अर्थ यह था कि अल्लाह उन्हें बड़ा पद और सम्मान प्रदान करेगा, और उनके पिता, माता (या चाची) और उनके ग्यारह भाई सब उनके सामने सम्मान से झुकेंगे। यह उनके भविष्य की महानता और उच्च स्थान की ओर संकेत था, जो अल्लाह ने उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में प्रदान किया। यह स्वप्न उनके जीवन की उस कठिन यात्रा की शुरुआत थी, जिसके अंत में अल्लाह ने उन्हें मिस्र का शासक बनाया और उनके परिवार को उनके सामने झुकने का अवसर दिया।


फ़ायदे:

  1. स्वप्न का महत्व: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को स्वप्न के माध्यम से शुभ सूचना और मार्गदर्शन दे सकता है। यह ईमानवालों के लिए एक रहमत है।
  2. अच्छे स्वप्न की ताबीर: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का स्वप्न हमें सिखाता है कि अच्छे स्वप्न अल्लाह की ओर से होते हैं और उनकी ताबीर (व्याख्या) में भलाई होती है। हमें अच्छे स्वप्न देखने पर अल्लाह की तारीफ़ करनी चाहिए।
  3. पिता-पुत्र का रिश्ता: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने पिता को अपना स्वप्न बताया, जिससे पता चलता है कि बच्चों को अपने माता-पिता के साथ खुलकर बात करनी चाहिए और उनसे सलाह लेनी चाहिए। यह परिवार में प्रेम और विश्वास को बढ़ाता है।
  4. अल्लाह की योजना: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की योजनाएँ हमारी समझ से बेहतर होती हैं। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को कठिनाइयों से गुज़रना पड़ा, लेकिन अंत में अल्लाह ने उन्हें ऊँचा पद दिया। हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
  5. विनम्रता का पाठ: स्वप्न में सजदा करने वाले तारे, सूर्य और चंद्रमा यह दर्शाते हैं कि सारी मख़लूक़ात (सृष्टि) अल्लाह के आगे विनम्र है। हमें भी अल्लाह के सामने पूर्ण विनम्रता और समर्पण के साथ सजदा करना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची इबादत है।


📜 आयत 2-6 — सूरा यूसुफ

2إِنَّا أَنزَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
हमने इस किताब (क़ुरान) को अरबी में नाज़िल किया है ताकि तुम समझो
3نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ أَحْسَنَ الْقَصَصِ بِمَا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ هَٰذَا الْقُرْآنَ وَإِن كُنتَ مِن قَبْلِهِ لَمِنَ الْغَافِلِينَ
(ऐ रसूल) हम तुम पर ये क़ुरान नाज़िल करके तुम से एक निहायत उम्दा क़िस्सा बयान करते हैं अगरचे तुम इसके पहले (उससे) बिल्कुल बेख़बर थे
4إِذْ قَالَ يُوسُفُ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ إِنِّي رَأَيْتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوْكَبًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ رَأَيْتُهُمْ لِي سَاجِدِينَ
(वह वक्त याद करो) जब यूसूफ ने अपने बाप से कहा ऐ अब्बा मैने ग्यारह सितारों और सूरज चाँद को (ख्वाब में) देखा है मैने देखा है कि ये सब मुझे सजदा कर रहे हैं
5قَالَ يَا بُنَيَّ لَا تَقْصُصْ رُؤْيَاكَ عَلَىٰ إِخْوَتِكَ فَيَكِيدُوا لَكَ كَيْدًا ۖ إِنَّ الشَّيْطَانَ لِلْإِنسَانِ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
याक़ूब ने कहा ऐ बेटा (देखो ख़बरदार) कहीं अपना ख्वाब अपने भाईयों से न दोहराना (वरना) वह लोग तुम्हारे लिए मक्कारी की तदबीर करने लगेगें इसमें तो शक़ ही नहीं कि शैतान आदमी का खुला हुआ दुश्मन है
6وَكَذَٰلِكَ يَجْتَبِيكَ رَبُّكَ وَيُعَلِّمُكَ مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ وَيُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكَ وَعَلَىٰ آلِ يَعْقُوبَ كَمَا أَتَمَّهَا عَلَىٰ أَبَوَيْكَ مِن قَبْلُ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और (जो तुमने देखा है) ऐसा ही होगा कि तुम्हारा परवरदिगार तुमको बरगुज़ीदा (इज्ज़तदार) करेगा और तुम्हें ख्वाबो की ताबीर सिखाएगा और जिस तरह इससे पहले तुम्हारे दादा परदादा इबराहीम और इसहाक़ पर अपनी नेअमत पूरी कर चुका है और इसी तरह तुम पर और याक़ूब की औलाद पर अपनी नेअमत पूरी करेगा बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ा वाक़िफकार हकीम है
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — यूसुफ 4

सूरा यूसुफ आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह वक्त याद करो) जब यूसूफ ने अपने बाप से…

सूरा आयत 4/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए