यूसुफ · 3/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ أَحْسَنَ الْقَصَصِ بِمَا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ هَٰذَا الْقُرْآنَ وَإِن كُنتَ مِن قَبْلِهِ لَمِنَ الْغَافِلِينَ ۝٣
Nahnu naqussu `alaika ahsanal qasasi bimaaa awhainaaa ilaika haazal quraana wa in kunta min qablihee laminal ghaafileen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हम तुम पर ये क़ुरान नाज़िल करके तुम से एक निहायत उम्दा क़िस्सा बयान करते हैं अगरचे तुम इसके पहले (उससे) बिल्कुल बेख़बर थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَقُصُّ — हम सुनाते हैं, बयान करते हैं।
  • أَحْسَنَ الْقَصَصِ — सबसे उत्तम किस्सा/वृत्तांत।
  • بِمَا أَوْحَيْنَا — उस वह़्य (प्रकाशना) के माध्यम से जो हमने भेजी।
  • لَمِنَ الْغَافِلِينَ — अवश्य ही बेखबर लोगों में से थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि हम तुम्हें सबसे उत्तम किस्सा सुनाते हैं — वह किस्सा जो सच्चाई, हिकमत, पाठ और बेहतरीन अंदाज़ में पेश किया गया है। यह किस्सा हमने अपनी वह़्य के ज़रिये तुम पर उतारा है, जो यही क़ुरआन है। इस क़ुरआन में यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का पूरा वृत्तांत इस खूबसूरती से बयान किया गया है कि उसमें ईमान, सब्र, अच्छाई, बुराई पर काबू पाने, और अल्लाह पर भरोसे की मिसालें मौजूद हैं। इससे पहले — यानी क़ुरआन के उतरने से पहले — आप ﷺ को इन घटनाओं की कोई जानकारी नहीं थी, और न ही आप इनसे वाक़िफ़ थे। यह बात इस बात का सबूत है कि यह क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से है, क्योंकि आप ﷺ ने ये किस्से किसी किताब से नहीं पढ़े थे और न ही किसी से सुने थे। यह सिर्फ़ अल्लाह की वह़्य है जो आपको दी गई।

फ़ायदे (सबक):

  1. क़ुरआन का हर किस्सा इंसान के लिए रहनुमाई और हिदायत का ज़रिया है, और इसमें पिछली उम्मतों के हालात से सबक लेने की तरग़ीब है।
  2. अल्लाह का कलाम सबसे अच्छा कलाम है, और उसका बयान सबसे खूबसूरत अंदाज़ में होता है — इसलिए क़ुरआन को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है।
  3. नबी ﷺ की सच्चाई इस बात से साबित होती है कि आपने ये किस्से बिना किसी ज़रिये के बयान किए, जो आपके नबुव्वत का सबूत है।
  4. अल्लाह की वह़्य इंसान को जहालत और ग़फ़लत से निकालकर हिदायत और इल्म की रोशनी में ले आती है — इसलिए क़ुरआन से जुड़ाव ही सच्ची कामयाबी है।
  5. इस आयत से मुसलमानों को चाहिए कि वे क़ुरआन के किस्सों को अपनी ज़िंदगी में ढालें, क्योंकि इनमें इंसान की भलाई और कामयाबी के लिए बेहतरीन नमूने मौजूद हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — यूसुफ

1الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
अलिफ़ लाम रा ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है
2إِنَّا أَنزَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
हमने इस किताब (क़ुरान) को अरबी में नाज़िल किया है ताकि तुम समझो
3نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ أَحْسَنَ الْقَصَصِ بِمَا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ هَٰذَا الْقُرْآنَ وَإِن كُنتَ مِن قَبْلِهِ لَمِنَ الْغَافِلِينَ
(ऐ रसूल) हम तुम पर ये क़ुरान नाज़िल करके तुम से एक निहायत उम्दा क़िस्सा बयान करते हैं अगरचे तुम इसके पहले (उससे) बिल्कुल बेख़बर थे
4إِذْ قَالَ يُوسُفُ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ إِنِّي رَأَيْتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوْكَبًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ رَأَيْتُهُمْ لِي سَاجِدِينَ
(वह वक्त याद करो) जब यूसूफ ने अपने बाप से कहा ऐ अब्बा मैने ग्यारह सितारों और सूरज चाँद को (ख्वाब में) देखा है मैने देखा है कि ये सब मुझे सजदा कर रहे हैं
5قَالَ يَا بُنَيَّ لَا تَقْصُصْ رُؤْيَاكَ عَلَىٰ إِخْوَتِكَ فَيَكِيدُوا لَكَ كَيْدًا ۖ إِنَّ الشَّيْطَانَ لِلْإِنسَانِ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
याक़ूब ने कहा ऐ बेटा (देखो ख़बरदार) कहीं अपना ख्वाब अपने भाईयों से न दोहराना (वरना) वह लोग तुम्हारे लिए मक्कारी की तदबीर करने लगेगें इसमें तो शक़ ही नहीं कि शैतान आदमी का खुला हुआ दुश्मन है
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
3आयत

अनुवाद — यूसुफ 3

सूरा यूसुफ आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) हम तुम पर ये क़ुरान नाज़िल करके तुम…

सूरा आयत 3/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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