Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَقْصُصْ: इसका अर्थ है "वर्णन मत करो" या "बयान मत करो"।
- فَيَكِيدُوا لَكَ كَيْدًا: अर्थात "वे तुम्हारे विरुद्ध चाल चलेंगे" या "वे तुम्हें नुकसान पहुँचाने की योजना बनाएँगे"।
- عَدُوٌّ مُّبِينٌ: स्पष्ट और प्रत्यक्ष शत्रु।
तफसीर (व्याख्या):
जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने पिता हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) को अपना स्वप्न सुनाया, जिसमें उन्होंने देखा कि ग्यारह तारे, सूर्य और चंद्रमा उन्हें सजदा कर रहे हैं, तो याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने उस स्वप्न का गहरा अर्थ समझ लिया। उन्होंने जान लिया कि अल्लाह ने यूसुफ़ को विशेष सम्मान और पैग़म्बरी के लिए चुना है, और वह अपने भाइयों से श्रेष्ठ होंगे। यह देखते हुए उन्हें डर हुआ कि कहीं यूसुफ़ के भाई इस स्वप्न के बारे में जानकर ईर्ष्या और द्वेष के कारण उन्हें नुकसान न पहुँचाएँ। इसलिए उन्होंने यूसुफ़ से कहा: "मेरे बेटे! यह स्वप्न अपने भाइयों को मत सुनाना, क्योंकि वे इसका अर्थ समझ जाएँगे और तुमसे ईर्ष्या करेंगे, फिर वे तुम्हें नष्ट करने की योजना बनाएँगे।" याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने यह भी समझाया कि शैतान इंसान का खुला दुश्मन है, वह भाइयों के दिलों में ईर्ष्या और बुराई के बीज बोकर उन्हें इस कदर उकसा सकता है कि वे अपने ही भाई के खिलाफ साज़िश करने लगें। शैतान की दुश्मनी स्पष्ट और प्रत्यक्ष है, इसलिए उसके बहकावे से बचना चाहिए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह की नेमतों और विशेष देन को हर किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए, खासकर उन लोगों के सामने जिनमें ईर्ष्या का खतरा हो। अपनी नेमतों की हिफाज़त के लिए उन्हें छिपाना बुद्धिमानी है।
- हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह सलाह हमें सिखाती है कि बड़ों की राय और मार्गदर्शन को महत्व देना चाहिए, क्योंकि उनके पास अनुभव और समझ होती है।
- शैतान इंसान का स्पष्ट शत्रु है, वह भाई-भाई के बीच भी फूट डाल सकता है। इसलिए हमें हमेशा शैतान के वसवसों से सावधान रहना चाहिए और अल्लाह की पनाह माँगनी चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईर्ष्या और द्वेष इंसान को बुरे कामों पर उकसा सकते हैं, इसलिए हमें अपने दिलों को इन बुराइयों से पाक रखना चाहिए और दूसरों की भलाई की कामना करनी चाहिए।
- इस क़िस्से से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफाज़त करता है और उनके लिए बेहतरीन योजना बनाता है, भले ही शुरुआत में मुश्किलें क्यों न आएँ।
📜 आयत 3-7 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 5
सूरा यूसुफ आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : याक़ूब ने कहा ऐ बेटा (देखो ख़बरदार) कहीं अपना ख्वाब…सूरा आयत 5/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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