यूसुफ · 58/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَجَاءَ إِخْوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُوا عَلَيْهِ فَعَرَفَهُمْ وَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ ۝٥٨
Wa jaaa`a ikhwatu Yoosufa fadakhaloo `alaihi fa`arafahum wa hum lahoo munkiroon
📖 हिंदी अर्थ
(और चूंकि कनआन में भी कहत (सूखा) था इस वजह से) यूसुफ के (सौतेले भाई ग़ल्ला ख़रीदने को मिस्र में) आए और यूसुफ के पास गए तो उनको फौरन ही पहचान लिया और वह लोग उनको न पहचान सके

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَدَخَلُوا عَلَيْهِ: वे यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के पास दाखिल हुए।
  • فَعَرَفَهُمْ: यूसुफ़ ने उन्हें पहचान लिया।
  • وَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ: और वे उसे न पहचान सके (उसकी पहचान से अनजान थे)।

तफ़सीर:

जब कनान (फिलिस्तीन) के इलाक़े में भी क़हत (सूखा और अकाल) पड़ा, तो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के सौतेले भाई, जिन्होंने बचपन में उन्हें कुएँ में डाला था, अनाज लाने के लिए मिस्र पहुँचे। वे उस समय मिस्र के अज़ीज़ (प्रशासक) बने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के सामने पेश हुए। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें तुरंत पहचान लिया, क्योंकि वे उनके भाई थे और उनकी शक्ल-सूरत उन्हें याद थी। लेकिन भाइयों को यूसुफ़ की पहचान न हो सकी, क्योंकि कई साल बीत चुके थे, यूसुफ़ बचपन में ही उनसे जुदा हो गए थे, और अब वे एक शक्तिशाली, सम्मानित और बदली हुई शक्ल वाले शासक के रूप में सामने थे। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका वह छोटा भाई, जिसे उन्होंने कुएँ में फेंका था, आज मिस्र का सर्वोच्च अधिकारी बनकर उनके सामने खड़ा होगा। इसलिए वे उसे पहचान न सके, जबकि यूसुफ़ उन्हें भली-भाँति पहचान रहे थे।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की क़ुदरत: यह आयत दिखाती है कि अल्लाह किसी बंदे को किसी भी हालत से उठाकर किसी भी मुक़ाम तक पहुँचा सकता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को कुएँ से निकालकर अल्लाह ने उन्हें मिस्र का खज़ाना और सत्ता सौंप दी। यह हमें सिखाता है कि मुसीबतों में धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की तदबीर (योजना) सबसे बेहतर होती है।
  2. दुश्मन से भी नेकी: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों को पहचानते हुए भी उनसे बदला नहीं लिया, बल्कि उनके साथ अच्छा व्यवहार किया और उनकी मदद की। यह हमें सिखाता है कि मुसलमान को दरगुज़र (क्षमा) और नेकी का रास्ता अपनाना चाहिए, भले ही सामने वाले ने उसके साथ बुराई की हो।
  3. अल्लाह की मदद का वादा: जो बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है और सब्र करता है, अल्लाह उसे ऐसा मुक़ाम देता है जिसका उसने सपना भी न देखा हो। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की कहानी हर मुसलमान के लिए उम्मीद की किरण है कि मुश्किलों के बाद ही आसानी आती है।
  4. पहचान और अंजाम: यह आयत यह भी सिखाती है कि इंसान की पहचान उसके चेहरे या ओहदे से नहीं, बल्कि उसके अमल (कर्म) और अल्लाह की रज़ा से होती है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की शान अल्लाह ने बढ़ाई, जबकि भाइयों की पहचान उनके किए की सज़ा के रूप में उनके सामने आई।


📜 आयत 56-60 — यूसुफ

56وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ يَتَبَوَّأُ مِنْهَا حَيْثُ يَشَاءُ ۚ نُصِيبُ بِرَحْمَتِنَا مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا نُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ
(ग़रज़ यूसुफ शाही ख़ज़ानो के अफसर मुक़र्रर हुए) और हमने यूसुफ को युं मुल्क (मिस्र) पर क़ाबिज़ बना दिया कि उसमें जहाँ चाहें रहें हम जिस पर चाहते हैं अपना फज़ल करते हैं और हमने नेको कारो के अज्र को अकारत नहीं करते
57وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और जो लोग ईमान लाए और परहेज़गारी करते रहे उनके लिए आख़िरत का अज्र उसी से कही बेहतर है
58وَجَاءَ إِخْوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُوا عَلَيْهِ فَعَرَفَهُمْ وَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ
(और चूंकि कनआन में भी कहत (सूखा) था इस वजह से) यूसुफ के (सौतेले भाई ग़ल्ला ख़रीदने को मिस्र में) आए और यूसुफ के पास गए तो उनको फौरन ही पहचान लिया और वह लोग उनको न पहचान सके
59وَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمْ قَالَ ائْتُونِي بِأَخٍ لَّكُم مِّنْ أَبِيكُمْ ۚ أَلَا تَرَوْنَ أَنِّي أُوفِي الْكَيْلَ وَأَنَا خَيْرُ الْمُنزِلِينَ
और जब यूसुफ ने उनके (ग़ल्ले का) सामान दुरूस्त कर दिया और वह जाने लगे तो यूसुफ़ ने (उनसे कहा) कि (अबकी आना तो) अपने सौतेले भाई को (जिसे घर छोड़ आए हो) मेरे पास लेते आना क्या तुम नहीं देखते कि मै यक़ीनन नाप भी पूरी देता हूं और बहुत अच्छा मेहमान नवाज़ भी हूँ
60فَإِن لَّمْ تَأْتُونِي بِهِ فَلَا كَيْلَ لَكُمْ عِندِي وَلَا تَقْرَبُونِ
पस अगर तुम उसको मेरे पास न लाओगे तो तुम्हारे लिए न मेरे पास कुछ न कुछ (ग़ल्ला वग़ैरह) होगा
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
58आयत

अनुवाद — यूसुफ 58

सूरा यूसुफ आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और चूंकि कनआन में भी कहत (सूखा) था इस वजह…

सूरा आयत 58/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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