अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَهَّزَهُم (उन्हें सामान दिया): उन्हें यात्रा के लिए आवश्यक राशन और सामान दिया।
- بِجَهَازِهِمْ (उनके सामान के साथ): हर एक को एक ऊँट का बोझ अनाज दिया।
- أُوفِي الْكَيْلَ (मैं पूरा नापता हूँ): मैं नाप में पूरा-पूरा देता हूँ, कोई कमी नहीं करता।
- خَيْرُ الْمُنزِلِينَ (सबसे अच्छा मेहमाननवाज़): सबसे अच्छा अतिथि-सत्कार करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों को उनकी ज़रूरत का पूरा सामान दिया और हर एक को एक ऊँट का बोझ अनाज दिया, और उनकी ख़ूब अच्छी मेहमाननवाज़ी भी की, तो उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि उनका एक और भाई है जो उनके पिता (हज़रत याक़ूब) के पास रह गया है। यह सुनकर यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उनसे कहा: "अपने उस भाई को (जो तुम्हारे पिता की तरफ़ से है) मेरे पास लेकर आओ।" उन्होंने यह बात इसलिए कही ताकि वे उस भाई (बिन्यामीन) को देख सकें, जो उनका सगा भाई था।
फिर उन्होंने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा: "क्या तुम नहीं देखते कि मैं नाप में पूरा-पूरा देता हूँ और कोई कमी नहीं करता? और मैं सबसे अच्छा मेहमाननवाज़ हूँ?" यानी मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार किया है, तुम्हें पूरा राशन दिया है और अच्छी मेहमाननवाज़ी की है। यदि तुम अपने उस भाई को लेकर आओगे, तो मैं तुम्हें और भी अधिक दूँगा और उसका भी पूरा हिस्सा दूँगा। यह कहकर उन्होंने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करेगा और उनके भाई का स्वागत करेगा।
फ़ायदे (उपदेश):
- अच्छे व्यवहार और मेहमाननवाज़ी की प्रेरणा: यह आयत हमें सिखाती है कि मेहमानों की ख़ातिरदारी और उनके साथ अच्छा व्यवहार करना इस्लामी अख़लाक़ का हिस्सा है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों के साथ भले व्यवहार से उनके दिल जीत लिए।
- पूरा-पूरा हक़ देना: "मैं पूरा नापता हूँ" से हमें सीख मिलती है कि लेन-देन में पूरा-पूरा हक़ देना चाहिए और किसी को कमी नहीं देनी चाहिए। यह अल्लाह की नज़र में बहुत पसंदीदा अमल है।
- रिश्तों की अहमियत: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई बिन्यामीन को बुलाने की तमन्ना की, जिससे पता चलता है कि ख़ून के रिश्ते और भाईचारे की मोहब्बत इस्लाम में बहुत अहम है। हमें अपने रिश्तेदारों से जुड़े रहना चाहिए और उनके साथ नेकी करनी चाहिए।
- हालात से सबक़: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपनी पहचान छिपाकर भी भलाई की। यह हमें सिखाता है कि नेकी और भलाई केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा के लिए करनी चाहिए, चाहे लोग हमें पहचानें या न पहचानें।
📜 आयत 57-61 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 59
सूरा यूसुफ आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब यूसुफ ने उनके (ग़ल्ले का) सामान दुरूस्त कर…सूरा आयत 59/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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