अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَوْعِيَتِهِمْ: उनके सामान (अनाज के थैले या बर्तन)।
- وِعَاءِ: थैला या बर्तन।
- كِدْنَا: हमने उपाय किया, चालाकी से योजना बनाई।
- دِينِ الْمَلِكِ: राजा के कानून या शासन-व्यवस्था।
- نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ: हम ऊँचे दर्जे बढ़ाते हैं।
- عَلِيمٌ: बहुत अधिक ज्ञान रखने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाई अपने छोटे भाई बिन्यामीन के साथ मिस्र से अनाज लेकर लौटे, तो उन्हें वापस बुलाया गया। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने स्वयं उनके सामान की तलाशी शुरू की। उन्होंने जानबूझकर पहले अपने सगे भाई बिन्यामीन के थैले को छोड़कर बाकी सभी भाइयों के थैलों की तलाशी ली, ताकि किसी को संदेह न हो कि यह कोई पहले से तय की गई योजना है। जब सबके थैलों से कुछ नहीं निकला, तो अंत में बिन्यामीन के थैले की तलाशी हुई और वहाँ से राजा का प्याला (सक़ाया) निकाला गया।
यह सब अल्लाह की ओर से यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के लिए बनाई गई एक युक्ति थी। अल्लाह ने उन्हें यह उपाय सिखाया और प्रेरणा दी। वास्तव में, मिस्र के राजा के कानून के अनुसार, चोर की सज़ा सिर्फ़ जुर्माना या मार-पीट थी, उसे गुलाम नहीं बनाया जा सकता था। इसलिए यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के लिए अपने भाई को रोकना राजा के कानून के तहत संभव नहीं था। लेकिन अल्लाह की इच्छा से यह व्यवस्था बनाई गई कि यूसुफ़ के भाइयों ने स्वयं यह कहा था कि "जिसके सामान में प्याला मिले, उसी को बंदी बना लिया जाए" (यह उनके पिता याक़ूब के धर्म का नियम था)। इस प्रकार अल्लाह ने उन्हीं की ज़ुबान से यह फ़ैसला दिलवाया, ताकि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) अपने भाई को रोक सकें।
अल्लाह जिसे चाहता है, उसे ज्ञान और सम्मान में ऊँचा दर्जा देता है, जैसा कि उसने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को दिया। और हर ज्ञानी व्यक्ति से ऊपर एक और अधिक ज्ञानी होता है, यहाँ तक कि सारा ज्ञान अल्लाह तक पहुँचता है, जो हर चीज़ का जानने वाला है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की योजना सबसे बेहतर होती है: जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तो अल्लाह ऐसे उपाय करता है जिनका अंदाज़ा किसी को नहीं होता। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की मुश्किल को अल्लाह ने इस तरह हल किया कि दुश्मनों को भी पता नहीं चला।
- हर ज्ञानी से बड़ा ज्ञानी होता है: यह आयत इंसान को नम्रता सिखाती है। चाहे इंसान कितना भी बड़ा विद्वान क्यों न हो, उससे बड़ा कोई और ज्ञानी मौजूद है। इसलिए कभी अपने ज्ञान पर घमंड नहीं करना चाहिए। सबसे ऊपर अल्लाह का ज्ञान है, जो छिपी और खुली हर चीज़ को जानता है।
- हलाल और सही तरीके से काम निकालना: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने धोखे या ज़ुल्म का सहारा नहीं लिया, बल्कि एक ऐसा उपाय किया जो शरई तौर पर जायज़ था। इससे सीख मिलती है कि मुश्किलों में भी हमें सही और पाक तरीके अपनाने चाहिए।
- अल्लाह पर भरोसा: जब सारे ज़रिए नाकाम हो जाएँ, तो अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें ऐसे रास्ते दिखाता है जिनका उन्होंने सोचा भी नहीं होता।
- इल्म की बरकत: अल्लाह जिसे चाहता है, उसे इल्म और समझ देता है। यह इल्म इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में ऊँचा दर्जा दिलाता है। इसलिए इल्म हासिल करना और उस पर अमल करना बहुत बड़ी नेमत है।
📜 आयत 74-78 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 76
सूरा यूसुफ आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम लोग तो (अपने यहाँ) ज़ालिमों (चोरों) को इसी तरह…सूरा आयत 76/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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