Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَوْ مَا: क्यों नहीं? / काश तुम लाते।
- تَأْتِينَا بِالْمَلَائِكَةِ: हमारे पास फ़रिश्तों को लेकर आते।
- إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ: यदि तुम सच्चे लोगों में से हो।
तफ़सीर:
जब नबी करीम ﷺ ने क़ौम को अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो क़ौम के मुकज़्ज़िब (झुठलाने वाले) लोगों ने मज़ाक़ और उपहास के अंदाज़ में कहा: "ऐ वह शख़्स जिस पर क़ुरआन उतारा गया है! तुम तो पागल हो गए हो। अगर तुम सच्चे हो कि अल्लाह ने तुम्हें पैग़म्बर बनाकर भेजा है, तो हमारे पास फ़रिश्तों को लेकर क्यों नहीं आते? वे हमारे सामने तुम्हारी नबुव्वत की गवाही दें और हमें बताएँ कि अल्लाह का अज़ाब हम पर आने वाला है।"
यानी उन्होंने यह माँग इसलिए नहीं की कि वे हिदायत पाना चाहते थे, बल्कि यह उनकी ज़िद, सरकशी और नबी ﷺ का मज़ाक़ उड़ाने का ज़रिया था। वे जानते थे कि फ़रिश्ते उनकी शर्तों पर नहीं आते, बल्कि अल्लाह के हुक्म से आते हैं। उनका असली मक़सद सच्चाई को मानने से इनकार करना था, न कि सच्चाई को जानना।
फ़ायदे:
- अल्लाह के रसूल ﷺ की सच्चाई का सबूत यह है कि उन्होंने कभी भी अपनी मनमानी से कोई माँग पूरी नहीं की, बल्कि हर मामले में अल्लाह के हुक्म का इंतज़ार किया। यही उनकी सच्ची नबुव्वत की निशानी है।
- मुशरिकों की यह माँग सिर्फ़ बहाना थी। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में कई जगह बताया कि अगर फ़रिश्ते भी आ जाते, तो भी वे ईमान नहीं लाते। इससे हमें सबक़ मिलता है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है, और जिसे अल्लाह हिदायत देना चाहे, उसे दलीलें काफ़ी होती हैं; और जिसे गुमराह करना चाहे, उसके लिए मोजिज़े भी नाकाफ़ी हैं।
- इस आयत से पता चलता है कि नबी ﷺ पर ईमान लाने के लिए फ़रिश्तों का देखना ज़रूरी नहीं, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत ही हमारे लिए काफ़ी हैं। यह हमारे लिए रहमत है कि अल्लाह ने हमें ग़ैब पर ईमान लाने की तौफ़ीक़ दी।
- मुसलमान को चाहिए कि वह हर हाल में सब्र और इस्तिक़ामत से काम ले, चाहे लोग उसका मज़ाक़ उड़ाएँ या उस पर बेतुके इल्ज़ाम लगाएँ। नबी ﷺ ने इस मुश्किल वक़्त में भी अपना पैग़ाम पहुँचाना जारी रखा और अल्लाह पर भरोसा किया।
📜 आयत 5-9 — सूरा अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 7
सूरा अल-हिज्र आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर तू अपने दावे में सच्चा है तो फरिश्तों को…सूरा आयत 7/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हिज्र
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


