Summa Yawmal Qiyaamati yukhzeehim wa yaqoolu aina shurakaaa`iyal lazeena kuntum tushaaaqqoona feehim; qaalal lazeena ootul `ilma innal khizyal Yawma wassooo`a `alal kaafireen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(फिर उसी पर इकतिफा नहीं) उसके बाद क़यामत के दिन ख़ुदा उनको रुसवा करेगा और फरमाएगा कि (अब बताओ) जिसको तुमने मेरा यशरीक बना रखा था और जिनके बारे में तुम (ईमानदारों से) झगड़ते थे कहाँ हैं (वह तो कुछ जवाब देगें नहीं मगर) जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म दिया गया है कहेगें कि आज के दिन रुसवाई और ख़राबी (सब कुछ) काफिरों पर ही है
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پھر وہ ان کو قیامت کے دن بھی ذلیل کرے گا اور کہے گا کہ میرے وہ شریک کہاں ہیں جن کے بارے میں تم جھگڑا کرتے تھے۔ جن لوگوں کو علم دیا گیا تھا وہ کہیں گے کہ آج کافروں کی رسوائی اور برائی ہے
फिर क़ियामत के दिन अल्लाह तआला उन्हें (यानी काफ़िरों और मुशरिकों को) बुरी तरह रुसवा करेगा और उन्हें ज़लील करेगा। वह उनसे पूछेगा: "कहाँ हैं मेरे साझीदार, जिन्हें तुम मेरा साझीदार ठहराते थे और जिनकी वजह से तुम अल्लाह के नबियों और मोमिनों से दुश्मनी रखते थे, उनसे झगड़ते थे और उन्हें सताते थे? आज वे क्यों नहीं आते तुम्हें इस अज़ाब से बचाने के लिए?" उस वक़्त वे काफ़िर पूरी तरह निराश और बेबस हो जाएँगे, और उनके पास कोई जवाब नहीं होगा।
उस समय जिन लोगों को अल्लाह ने सच्चा इल्म (दीन की समझ और नबुव्वत का ज्ञान) दिया था, वे कहेंगे: "आज का अपमान, रुसवाई और यातना उन काफ़िरों पर ही है, जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उसके रसूलों को झुठलाया और सच्चाई का विरोध किया।" यह बात वे इसलिए कहेंगे ताकि काफ़िरों की रुसवाई और बढ़े और उन्हें और अधिक शर्मिंदा किया जाए। यह उनके लिए अतिरिक्त अपमान और दुख का कारण होगा।
फ़ायदे (उपदेश):
अल्लाह तआला इंसाफ़ करने वाला है और हर उस शख़्स को उसके किए की सज़ा देगा जिसने उसके साथ शिर्क किया या उसके दीन का विरोध किया। क़ियामत का दिन हक़ और बातिल के बीच फ़ैसले का दिन होगा।
दुनिया में काफ़िरों को चाहे कितनी भी ताक़त और ठाठ-बाठ मिले, उनकी असली हालत क़ियामत के दिन रुसवाई और ज़िल्लत होगी। इसलिए इंसान को दुनिया की चमक-दमक पर नाज़ नहीं करना चाहिए।
सच्चा इल्म (दीन की समझ) इंसान को हक़ पर क़ायम रखता है और आख़िरत में उसके लिए सरफ़राज़ी का ज़रिया बनता है। इल्म वालों की गवाही उस दिन काफ़िरों के ख़िलाफ़ होगी।
यह आयत मोमिनों के लिए सब्र और इस्तिक़ामत की तरग़ीब है कि वे दुनिया में काफ़िरों के विरोध से न घबराएँ, क्योंकि अंजाम उन्हीं के हक़ में बेहतर है।
शिर्क और कुफ़्र का अंजाम बुरा है, और अल्लाह की रहमत से महरूमी ही सबसे बड़ी सज़ा है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अकेले अल्लाह की इबादत करे और उसके रसूलों की पैरवी करे।
(फिर उसी पर इकतिफा नहीं) उसके बाद क़यामत के दिन ख़ुदा उनको रुसवा करेगा और फरमाएगा कि (अब बताओ) जिसको तुमने मेरा यशरीक बना रखा था और जिनके बारे में तुम (ईमानदारों से) झगड़ते थे कहाँ हैं (वह तो कुछ जवाब देगें नहीं मगर) जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म दिया गया है कहेगें कि आज के दिन रुसवाई और ख़राबी (सब कुछ) काफिरों पर ही है
(उनको बकने दो ताकि क़यामत के दिन) अपने (गुनाहों) के पूरे बोझ और जिन लोगों को उन्होंने बे समझे बूझे गुमराह किया है उनके (गुनाहों के) बोझ भी उन्हीं को उठाने पड़ेगें ज़रा देखो तो कि ये लोग कैसा बुरा बोझ अपने ऊपर लादे चले जा रहें हैं
बेशक जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी मक्कारियाँ की थीं तो (ख़ुदा का हुक्म) उनके ख्यालात की इमारत की जड़ की तरफ से आ पड़ा (पस फिर क्या था) इस ख्याली इमारत की छत उन पर उनके ऊपर से धम से गिर पड़ी (और सब ख्याल हवा हो गए) और जिधर से उन पर अज़ाब आ पहुँचा उसकी उनको ख़बर तक न थी
(फिर उसी पर इकतिफा नहीं) उसके बाद क़यामत के दिन ख़ुदा उनको रुसवा करेगा और फरमाएगा कि (अब बताओ) जिसको तुमने मेरा यशरीक बना रखा था और जिनके बारे में तुम (ईमानदारों से) झगड़ते थे कहाँ हैं (वह तो कुछ जवाब देगें नहीं मगर) जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म दिया गया है कहेगें कि आज के दिन रुसवाई और ख़राबी (सब कुछ) काफिरों पर ही है
वह लोग हैं कि जब फरिश्ते उनकी रुह क़ब्ज़ करने लगते हैं (और) ये लोग (कुफ्र करके) आप अपने ऊपर सितम ढ़ाते रहे तो इताअत पर आमादा नज़र आते हैं और (कहते हैं कि) हम तो (अपने ख्याल में) कोई बुराई नहीं करते थे (तो फरिश्ते कहते हैं) हाँ जो कुछ तुम्हारी करतूते थी ख़ुदा उससे खूब अच्छी तरह वाक़िफ हैं
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