अन-नहल · 54/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
ثُمَّ إِذَا كَشَفَ الضُّرَّ عَنكُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِّنكُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ ۝٥٤
Summaa izaa kashafad durra `ankum izaa fareequm minkum bi Rabbihim yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब वह तुमसे तकलीफ को दूर कर देता है तो बस फौरन तुममें से कुछ लोग अपने परवरदिगार को शरीक ठहराते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَشَفَ الضُّرَّ: कष्ट और विपत्ति को दूर कर दिया।
  • فَرِيقٌ: एक समूह या गिरोह।
  • يُشْرِكُونَ: शिर्क करते हैं, अर्थात् अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला तुम पर से कष्ट, बीमारी या किसी भी प्रकार की विपत्ति को हटा देता है—जिसे दूर करने के लिए तुमने उसी से प्रार्थना की थी—तो उसी क्षण तुममें से एक समूह अपने रब के साथ शिर्क करने लगता है। वे उसी अल्लाह के साथ दूसरों को पूज्य बना लेते हैं, जिसने उन्हें इस कष्ट से निजात दी। यह अत्यंत आश्चर्यजनक और लज्जाजनक बात है कि जिस रब ने उनकी पुकार सुनी और उन्हें बचाया, उसी के साथ वे दूसरों को साझीदार ठहराते हैं। यह कृतघ्नता और अज्ञानता की पराकाष्ठा है कि संकट के समय एकाग्र होकर अल्लाह को पुकारते हैं, परंतु जैसे ही संकट टलता है, वे उसके साथ शिर्क करने लगते हैं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत मनुष्य की कमज़ोरी और उसकी भूलने की आदत को उजागर करती है—वह संकट में अल्लाह को याद करता है, परंतु सुख-समृद्धि में उसे भूल जाता है। इससे हमें सीखना चाहिए कि हर हालत में अल्लाह का शुक्र अदा करें।
  2. अल्लाह की नेमतों को पहचानना और उसकी एकता (तौहीद) पर स्थिर रहना ही सच्ची कृतज्ञता है। शिर्क करना अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत का इनकार है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह हमारी मुसीबत दूर करता है, तो हमें उसकी ओर और अधिक झुकना चाहिए, न कि उससे दूर होकर दूसरों की ओर मुड़ना चाहिए। यही ईमान की निशानी है कि इंसान हर हाल में अल्लाह को याद रखे।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दयालु है—वह उनकी पुकार सुनता है और कष्ट दूर करता है, फिर भी वे उसके साथ शिर्क करते हैं। यह अल्लाह की सहनशीलता और क्षमा की विशालता को दर्शाता है, जो हमें उसकी ओर रुजू करने की प्रेरणा देता है।


📜 आयत 52-56 — अन-नहल

52وَلَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَهُ الدِّينُ وَاصِبًا ۚ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَتَّقُونَ
और जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं (ग़रज़) सब कुछ उसी का है और ख़ालिस फरमाबरदारी हमेशा उसी को लाज़िम (जरूरी) है तो क्या तुम लोग ख़ुदा के सिवा (किसी और से भी) डरते हो
53وَمَا بِكُم مِّن نِّعْمَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ۖ ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فَإِلَيْهِ تَجْأَرُونَ
और जितनी नेअमतें तुम्हारे साथ हैं (सब ही की तरफ से हैं) फिर जब तुमको तकलीफ छू भी गई तो तुम उसी के आगे फरियाद करने लगते हो
54ثُمَّ إِذَا كَشَفَ الضُّرَّ عَنكُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِّنكُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ
फिर जब वह तुमसे तकलीफ को दूर कर देता है तो बस फौरन तुममें से कुछ लोग अपने परवरदिगार को शरीक ठहराते हैं
55لِيَكْفُرُوا بِمَا آتَيْنَاهُمْ ۚ فَتَمَتَّعُوا ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
ताकि जो (नेअमतें) हमने उनको दी है उनकी नाशुक्री करें तो (ख़ैर दुनिया में चन्द रोज़ चैन कर लो फिर तो अनक़रीब तुमको मालूम हो जाएगा
56وَيَجْعَلُونَ لِمَا لَا يَعْلَمُونَ نَصِيبًا مِّمَّا رَزَقْنَاهُمْ ۗ تَاللَّهِ لَتُسْأَلُنَّ عَمَّا كُنتُمْ تَفْتَرُونَ
और हमने जो रोज़ी उनको दी है उसमें से ये लोग उन बुतों का हिस्सा भी क़रार देते है जिनकी हक़ीकत नहीं जानते तो ख़ुदा की (अपनी) क़िस्म जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ तुम करते थे (क़यामत में) उनकी बाज़पुर्स (पूछ गछ) तुम से ज़रुर की जाएगी
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54आयत

अनुवाद — अन-नहल 54

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सूरा आयत 54/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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