अन-नहल · 79/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
أَلَمْ يَرَوْا إِلَى الطَّيْرِ مُسَخَّرَاتٍ فِي جَوِّ السَّمَاءِ مَا يُمْسِكُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٧٩
Alam yaraw ilat tairi musakhkharaatin fee jawwis samaaa`i maa yumsikuhunna illal laah; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُسَخَّرَاتٍ: वशीभूत, आज्ञाकारी, उड़ने के लिए तैयार की गईं।
  • جَوِّ السَّمَاءِ: आकाश का खुला विस्तार, धरती और आसमान के बीच की हवा।
  • مَا يُمْسِكُهُنَّ: उन्हें (पक्षियों को) थामने वाला, उन्हें गिरने से रोकने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या इन मुशरिकों ने आसमान के खुले विस्तार में उड़ते हुए पक्षियों पर ध्यान नहीं दिया? वे किस प्रकार अल्लाह के आदेश से उड़ने के लिए वशीभूत और तैयार हैं। अल्लाह ने उन्हें पंख दिए, हवा को हल्का बनाया और उन्हें पंखों को फैलाने और सिकोड़ने की प्रेरणा दी। वे बिना किसी सहारे के हवा में उड़ते हैं, फिर भी गिरते नहीं। उन्हें हवा में थामने वाला और गिरने से बचाने वाला केवल अल्लाह ही है, जो अपनी कुदरत से उन्हें संभाले हुए है। यह उड़ान और यह थामना—दोनों ही अल्लाह की महान शक्ति के स्पष्ट प्रमाण हैं। इन निशानियों से वही लोग सबक लेते हैं जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, क्योंकि वे इन संकेतों से सीखते हैं और उनसे अल्लाह की कुदरत को पहचानते हैं। जिन लोगों के दिलों में ईमान नहीं होता, वे इन दृश्यों से कोई सबक नहीं लेते।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत अल्लाह की कुदरत और उसकी बेमिसाल रचना पर गहराई से सोचने की प्रेरणा देती है। पक्षियों की उड़ान जैसी सामान्य चीज़ में भी अल्लाह की अद्भुत शक्ति छिपी है।
  2. यह हमें सिखाती है कि सृष्टि की हर चीज़ में अल्लाह की निशानियाँ मौजूद हैं; बस ज़रूरत है देखने और सोचने की आँखों की।
  3. ईमान वालों के लिए यह आयत उनके विश्वास को मज़बूत करती है कि जो अल्लाह पक्षियों को हवा में थामे हुए है, वही उनके मामलों का संचालक और रक्षक है, और वह हर मुश्किल में उनकी मदद कर सकता है।
  4. यह आयत हमें अल्लाह की नेमतों को याद करने और उसके प्रति आभारी होने की तरफ़ भी ले जाती है, क्योंकि यही नेमतें हमें उसकी क़रीबी और मुहब्बत की ओर खींचती हैं।


📜 आयत 77-81 — सूरा अन-नहल

77وَلِلَّهِ غَيْبُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَا أَمْرُ السَّاعَةِ إِلَّا كَلَمْحِ الْبَصَرِ أَوْ هُوَ أَقْرَبُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और सारे आसमान व ज़मीन की ग़ैब की बातें ख़ुदा ही के लिए मख़सूस हैं और ख़ुदा क़यामत का वाकेए होना तो ऐसा है जैसे पलक का झपकना बल्कि इससे भी जल्दी बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ुदरत कामेला रखता है
78وَاللَّهُ أَخْرَجَكُم مِّن بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ لَا تَعْلَمُونَ شَيْئًا وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۙ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हें तुम्हारी माओं के पेट से निकाला (जब) तुम बिल्कुल नासमझ थे और तुम को कान दिए और ऑंखें (अता की) दिल (इनायत किए) ताकि तुम शुक्र करो
79أَلَمْ يَرَوْا إِلَى الطَّيْرِ مُسَخَّرَاتٍ فِي جَوِّ السَّمَاءِ مَا يُمْسِكُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
80وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّن بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِّن جُلُودِ الْأَنْعَامِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ إِقَامَتِكُمْ ۙ وَمِنْ أَصْوَافِهَا وَأَوْبَارِهَا وَأَشْعَارِهَا أَثَاثًا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
81وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّمَّا خَلَقَ ظِلَالًا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْجِبَالِ أَكْنَانًا وَجَعَلَ لَكُمْ سَرَابِيلَ تَقِيكُمُ الْحَرَّ وَسَرَابِيلَ تَقِيكُم بَأْسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْلِمُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
79आयत

अनुवाद — अन-नहल 79

सूरा अन-नहल आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया…

सूरा आयत 79/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए