حِجَابًا مَّسْتُورًا: एक ऐसा पर्दा जो पूरी तरह से ढकने वाला हो, अर्थात अत्यंत गुप्त और छिपाने वाला पर्दा।
व्याख्या:
हे नबी! जब आप क़ुरआन की तिलावत करते हैं और ये मुशरिकीन आपकी तिलावत सुनते हैं, तो हमने आपके और उन लोगों के बीच जो आख़िरत (अंतिम दिन) पर ईमान नहीं रखते, एक ऐसा पर्दा डाल दिया है जो उनकी समझ और बुद्धि को क़ुरआन की बातों को समझने से रोक देता है। यह पर्दा उनके दिलों पर है, जिसके कारण वे क़ुरआन की आयतों, उसकी नसीहतों और चेतावनियों से लाभ नहीं उठा पाते। यह उनके कुफ्र और इनकार की सज़ा है। वे क़ुरआन को सुनते तो हैं, लेकिन उनके दिलों पर मुहर लगी होने के कारण वे उसकी हिदायत को महसूस नहीं कर पाते। यह पर्दा उनके लिए अल्लाह की ओर से एक अदृश्य रुकावट है, जो उन्हें सत्य को समझने से वंचित रखती है।
फ़ायदे:
यह आयत नबी ﷺ के लिए एक बड़ी तसल्ली है कि जो लोग ईमान नहीं लाते, उनका क़ुरआन न समझ पाना आपकी तिलावत में कोई कमी नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से उनकी सज़ा है।
इससे यह सीख मिलती है कि हिदायत पाना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है; जिसे वह चाहे समझ दे और जिसे चाहे समझ से महरूम कर दे। इसलिए हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए।
यह आयत क़ुरआन की अज़मत और उसके असर को दर्शाती है कि जब यह पढ़ा जाता है, तो अल्लाह अपने नबी की हिफ़ाज़त के लिए अदृश्य पर्दे बना देता है, जैसा कि उम्मे जमील (अबू लहब की पत्नी) का क़िस्सा है जो नबी ﷺ को नुक़सान पहुँचाने आई थी, लेकिन अल्लाह ने उसे आपको देखने नहीं दिया।
इस आयत से मुसलमानों को यह सबक मिलता है कि जब वे क़ुरआन पढ़ें, तो अल्लाह से तवक्कुल रखें कि वह उनके दुश्मनों के मकर से उनकी हिफ़ाज़त करेगा, और क़ुरआन की तिलावत में बरकत और हिफ़ाज़त है।
यह हमें यह भी सिखाता है कि अच्छे काम करते रहना चाहिए, चाहे लोग उससे फ़ायदा उठाएँ या न उठाएँ; हमारा फ़र्ज़ सिर्फ़ पहुँचाना है, और हिदायत देना अल्लाह का काम है।
सातों आसमान और ज़मीन और जो लोग इनमें (सब) उसकी तस्बीह करते हैं और (सारे जहाँन) में कोई चीज़ ऐसी नहीं जो उसकी (हम्द व सना) की तस्बीह न करती हो मगर तुम लोग उनकी तस्बीह नहीं समझते इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा बुर्दबार बख्शने वाला है
और (गोया) हम उनके कानों में गरानी पैदा कर देते हैं कि न सुन सकें जब तुम क़ुरान में अपने परवरदिगार का तन्हा ज़िक्र करते हो तो कुफ्फार उलटे पावँ नफरत करके (तुम्हारे पास से) भाग खड़े होते हैं
जब ये लोग तुम्हारी तरफ कान लगाते हैं तो जो कुछ ये ग़ौर से सुनते हैं हम तो खूब जानते हैं और जब ये लोग बाहम कान में बात करते हैं तो उस वक्त ये ज़ालिम (ईमानदारों से) कहते हैं कि तुम तो बस एक (दीवाने) आदमी के पीछे पड़े हो जिस पर किसी ने जादू कर दिया है
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