अल-इसरा · 45/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
وَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ حِجَابًا مَّسْتُورًا ۝٤٥
Wa izaa qaraatal Quraana ja`alnaa bainaka wa bainal lazeena laa yu`minoona bil aakhirati hijaabam mastooraa
📖 हिंदी अर्थ
और जब तुम क़ुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते एक गहरा पर्दा डाल देते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حِجَابًا مَّسْتُورًا: एक ऐसा पर्दा जो पूरी तरह से ढकने वाला हो, अर्थात अत्यंत गुप्त और छिपाने वाला पर्दा।

व्याख्या:

हे नबी! जब आप क़ुरआन की तिलावत करते हैं और ये मुशरिकीन आपकी तिलावत सुनते हैं, तो हमने आपके और उन लोगों के बीच जो आख़िरत (अंतिम दिन) पर ईमान नहीं रखते, एक ऐसा पर्दा डाल दिया है जो उनकी समझ और बुद्धि को क़ुरआन की बातों को समझने से रोक देता है। यह पर्दा उनके दिलों पर है, जिसके कारण वे क़ुरआन की आयतों, उसकी नसीहतों और चेतावनियों से लाभ नहीं उठा पाते। यह उनके कुफ्र और इनकार की सज़ा है। वे क़ुरआन को सुनते तो हैं, लेकिन उनके दिलों पर मुहर लगी होने के कारण वे उसकी हिदायत को महसूस नहीं कर पाते। यह पर्दा उनके लिए अल्लाह की ओर से एक अदृश्य रुकावट है, जो उन्हें सत्य को समझने से वंचित रखती है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत नबी ﷺ के लिए एक बड़ी तसल्ली है कि जो लोग ईमान नहीं लाते, उनका क़ुरआन न समझ पाना आपकी तिलावत में कोई कमी नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से उनकी सज़ा है।
  2. इससे यह सीख मिलती है कि हिदायत पाना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है; जिसे वह चाहे समझ दे और जिसे चाहे समझ से महरूम कर दे। इसलिए हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए।
  3. यह आयत क़ुरआन की अज़मत और उसके असर को दर्शाती है कि जब यह पढ़ा जाता है, तो अल्लाह अपने नबी की हिफ़ाज़त के लिए अदृश्य पर्दे बना देता है, जैसा कि उम्मे जमील (अबू लहब की पत्नी) का क़िस्सा है जो नबी ﷺ को नुक़सान पहुँचाने आई थी, लेकिन अल्लाह ने उसे आपको देखने नहीं दिया।
  4. इस आयत से मुसलमानों को यह सबक मिलता है कि जब वे क़ुरआन पढ़ें, तो अल्लाह से तवक्कुल रखें कि वह उनके दुश्मनों के मकर से उनकी हिफ़ाज़त करेगा, और क़ुरआन की तिलावत में बरकत और हिफ़ाज़त है।
  5. यह हमें यह भी सिखाता है कि अच्छे काम करते रहना चाहिए, चाहे लोग उससे फ़ायदा उठाएँ या न उठाएँ; हमारा फ़र्ज़ सिर्फ़ पहुँचाना है, और हिदायत देना अल्लाह का काम है।


📜 आयत 43-47 — सूरा अल-इसरा

43سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يَقُولُونَ عُلُوًّا كَبِيرًا
जो बेहूदा बातें ये लोग (ख़ुदा की निस्बत) कहा करते हैं वह उनसे बहुत बढ़के पाक व पाकीज़ा और बरतर है
44تُسَبِّحُ لَهُ السَّمَاوَاتُ السَّبْعُ وَالْأَرْضُ وَمَن فِيهِنَّ ۚ وَإِن مِّن شَيْءٍ إِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمْدِهِ وَلَٰكِن لَّا تَفْقَهُونَ تَسْبِيحَهُمْ ۗ إِنَّهُ كَانَ حَلِيمًا غَفُورًا
सातों आसमान और ज़मीन और जो लोग इनमें (सब) उसकी तस्बीह करते हैं और (सारे जहाँन) में कोई चीज़ ऐसी नहीं जो उसकी (हम्द व सना) की तस्बीह न करती हो मगर तुम लोग उनकी तस्बीह नहीं समझते इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा बुर्दबार बख्शने वाला है
45وَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ حِجَابًا مَّسْتُورًا
और जब तुम क़ुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते एक गहरा पर्दा डाल देते हैं
46وَجَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَن يَفْقَهُوهُ وَفِي آذَانِهِمْ وَقْرًا ۚ وَإِذَا ذَكَرْتَ رَبَّكَ فِي الْقُرْآنِ وَحْدَهُ وَلَّوْا عَلَىٰ أَدْبَارِهِمْ نُفُورًا
और (गोया) हम उनके कानों में गरानी पैदा कर देते हैं कि न सुन सकें जब तुम क़ुरान में अपने परवरदिगार का तन्हा ज़िक्र करते हो तो कुफ्फार उलटे पावँ नफरत करके (तुम्हारे पास से) भाग खड़े होते हैं
47نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَسْتَمِعُونَ بِهِ إِذْ يَسْتَمِعُونَ إِلَيْكَ وَإِذْ هُمْ نَجْوَىٰ إِذْ يَقُولُ الظَّالِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلًا مَّسْحُورًا
जब ये लोग तुम्हारी तरफ कान लगाते हैं तो जो कुछ ये ग़ौर से सुनते हैं हम तो खूब जानते हैं और जब ये लोग बाहम कान में बात करते हैं तो उस वक्त ये ज़ालिम (ईमानदारों से) कहते हैं कि तुम तो बस एक (दीवाने) आदमी के पीछे पड़े हो जिस पर किसी ने जादू कर दिया है
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — अल-इसरा 45

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Friday, October 2, 2026

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