अल-इसरा · 48/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا ۝٤٨
Unzur kaifa daraboo lakal amsaala fadalloo falaa yastatee`oona sabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो ये कम्बख्त तुम्हारी निस्बत कैसी कैसी फब्तियाँ कहते हैं तो (इसी वजह से) ऐसे गुमराह हुए कि अब (हक़ की) राह किसी तरह पा ही नहीं सकते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ: उन्होंने तुम्हारे लिए मिसालें बनाईं, यानी तुम्हें साहिर (जादूगर), शायर (कवि), काहिन (غيب گو) और मजनूं (पागल) जैसे नामों से पुकारा।
  • فَضَلُّوا: वे सत्य से भटक गए और गुमराह हो गए।
  • فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا: वे कोई रास्ता नहीं पा सकते, न ही हिदायत का रास्ता और न ही तुम्हारा काम बिगाड़ने का।

तफसीर:

ऐ नबी! तुम ग़ौर और हैरत से देखो कि ये लोग तुम्हारे बारे में कैसी-कैसी झूठी मिसालें बनाते हैं। कभी तुम्हें जादूगर कहते हैं, कभी शायर, कभी काहिन (غيب کی خبریں دینے والا) और कभी पागल — यानी हर बार तुम्हारे लिए कोई न कोई बुरी और झूठी विशेषता गढ़ लेते हैं। यह सब कुछ उनकी जिद और सत्य से दूर भागने की वजह से है। इन झूठे आरोपों की वजह से वे खुद ही हिदायत के रास्ते से भटक गए हैं, और अब उनके पास न तो सत्य तक पहुँचने का कोई रास्ता बचा है, और न ही वे तुम्हारे दीन को मिटाने या अल्लाह के नूर को बुझाने की कोई तरकीब पा सकते हैं। उनकी ये सारी कोशिशें बेकार हैं, क्योंकि सत्य तो अल्लाह की तरफ से आया है और वही सब पर ग़ालिब है।

फायदे:

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि नबी और सच्चे दावत देने वालों को हमेशा झूठे आरोपों और बुरी मिसालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सत्य पर क़ायम रहना ही कामयाबी की कुंजी है।
  2. यह आयत मुसलमानों को तसल्ली देती है कि दुश्मनों की साजिशें और बुरी बातें कभी हक़ को नुकसान नहीं पहुँचा सकतीं, क्योंकि अल्लाह अपने नबी और अपने दीन की हिफाज़त खुद करता है।
  3. इंसान को चाहिए कि वह दूसरों के बारे में बुरी राय और झूठी विशेषताएँ गढ़ने से बचे, क्योंकि यह गुमराही की निशानी है और इंसान को हिदायत के रास्ते से दूर कर देती है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की ताकत झूठ और बहानों से कहीं बड़ी है; जो लोग हक़ का विरोध करते हैं, वे आखिरकार नाकाम और हैरान रह जाते हैं।


📜 आयत 46-50 — सूरा अल-इसरा

46وَجَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَن يَفْقَهُوهُ وَفِي آذَانِهِمْ وَقْرًا ۚ وَإِذَا ذَكَرْتَ رَبَّكَ فِي الْقُرْآنِ وَحْدَهُ وَلَّوْا عَلَىٰ أَدْبَارِهِمْ نُفُورًا
और (गोया) हम उनके कानों में गरानी पैदा कर देते हैं कि न सुन सकें जब तुम क़ुरान में अपने परवरदिगार का तन्हा ज़िक्र करते हो तो कुफ्फार उलटे पावँ नफरत करके (तुम्हारे पास से) भाग खड़े होते हैं
47نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَسْتَمِعُونَ بِهِ إِذْ يَسْتَمِعُونَ إِلَيْكَ وَإِذْ هُمْ نَجْوَىٰ إِذْ يَقُولُ الظَّالِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلًا مَّسْحُورًا
जब ये लोग तुम्हारी तरफ कान लगाते हैं तो जो कुछ ये ग़ौर से सुनते हैं हम तो खूब जानते हैं और जब ये लोग बाहम कान में बात करते हैं तो उस वक्त ये ज़ालिम (ईमानदारों से) कहते हैं कि तुम तो बस एक (दीवाने) आदमी के पीछे पड़े हो जिस पर किसी ने जादू कर दिया है
48انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो ये कम्बख्त तुम्हारी निस्बत कैसी कैसी फब्तियाँ कहते हैं तो (इसी वजह से) ऐसे गुमराह हुए कि अब (हक़ की) राह किसी तरह पा ही नहीं सकते
49وَقَالُوا أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَدِيدًا
और ये लोग कहते हैं कि जब हम (मरने के बाद सड़ गल कर) हड्डियाँ रह जाएँगें और रेज़ा रेज़ा हो जाएँगें तो क्या नये सिरे से पैदा करके उठा खड़े किए जाएँगें
50۞ قُلْ كُونُوا حِجَارَةً أَوْ حَدِيدًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम (मरने के बाद) चाहे पत्थर बन जाओ या लोहा या कोई और चीज़ जो तुम्हारे ख्याल में बड़ी (सख्त) हो
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
48आयत

अनुवाद — अल-इसरा 48

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Thursday, October 1, 2026

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