अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ: उन्होंने तुम्हारे लिए मिसालें बनाईं, यानी तुम्हें साहिर (जादूगर), शायर (कवि), काहिन (غيب گو) और मजनूं (पागल) जैसे नामों से पुकारा।
- فَضَلُّوا: वे सत्य से भटक गए और गुमराह हो गए।
- فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا: वे कोई रास्ता नहीं पा सकते, न ही हिदायत का रास्ता और न ही तुम्हारा काम बिगाड़ने का।
तफसीर:
ऐ नबी! तुम ग़ौर और हैरत से देखो कि ये लोग तुम्हारे बारे में कैसी-कैसी झूठी मिसालें बनाते हैं। कभी तुम्हें जादूगर कहते हैं, कभी शायर, कभी काहिन (غيب کی خبریں دینے والا) और कभी पागल — यानी हर बार तुम्हारे लिए कोई न कोई बुरी और झूठी विशेषता गढ़ लेते हैं। यह सब कुछ उनकी जिद और सत्य से दूर भागने की वजह से है। इन झूठे आरोपों की वजह से वे खुद ही हिदायत के रास्ते से भटक गए हैं, और अब उनके पास न तो सत्य तक पहुँचने का कोई रास्ता बचा है, और न ही वे तुम्हारे दीन को मिटाने या अल्लाह के नूर को बुझाने की कोई तरकीब पा सकते हैं। उनकी ये सारी कोशिशें बेकार हैं, क्योंकि सत्य तो अल्लाह की तरफ से आया है और वही सब पर ग़ालिब है।
फायदे:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि नबी और सच्चे दावत देने वालों को हमेशा झूठे आरोपों और बुरी मिसालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सत्य पर क़ायम रहना ही कामयाबी की कुंजी है।
- यह आयत मुसलमानों को तसल्ली देती है कि दुश्मनों की साजिशें और बुरी बातें कभी हक़ को नुकसान नहीं पहुँचा सकतीं, क्योंकि अल्लाह अपने नबी और अपने दीन की हिफाज़त खुद करता है।
- इंसान को चाहिए कि वह दूसरों के बारे में बुरी राय और झूठी विशेषताएँ गढ़ने से बचे, क्योंकि यह गुमराही की निशानी है और इंसान को हिदायत के रास्ते से दूर कर देती है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की ताकत झूठ और बहानों से कहीं बड़ी है; जो लोग हक़ का विरोध करते हैं, वे आखिरकार नाकाम और हैरान रह जाते हैं।
📜 आयत 46-50 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 48
सूरा अल-इसरा आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ज़रा देखो तो ये कम्बख्त तुम्हारी निस्बत कैसी…सूरा आयत 48/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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