nahnu a`lamu bimaa yastami`oona biheee iz yastami`oona ilaika wa iz hum najwaaa iz yaqooluz zaalimoona in tattabi`oona illaa rajulam mas hooraa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
जब ये लोग तुम्हारी तरफ कान लगाते हैं तो जो कुछ ये ग़ौर से सुनते हैं हम तो खूब जानते हैं और जब ये लोग बाहम कान में बात करते हैं तो उस वक्त ये ज़ालिम (ईमानदारों से) कहते हैं कि तुम तो बस एक (दीवाने) आदमी के पीछे पड़े हो जिस पर किसी ने जादू कर दिया है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
یہ لوگ جب تمہاری طرف کان لگاتے ہیں تو جس نیت سے یہ سنتے ہیں ہم اسے خوب جانتے ہیں اور جب یہ سرگوشیاں کرتے ہیں (یعنی) جب ظالم کہتے ہیں کہ تم ایک ایسے شخص کی پیروی کرتے ہو جس پر جادو کیا گیا ہے
يَسْتَمِعُونَ بِهِ: वे जिस उद्देश्य और नीयत से सुनते हैं।
نَجْوَىٰ: गुप्त परामर्श, चुपके-चुपके बातें करना (यहाँ इसका अर्थ है कि वे आपस में कानाफूसी कर रहे थे)।
مَسْحُورًا: जिस पर जादू कर दिया गया हो, जिसकी अक्ल में फ़र्क़ आ गया हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाता है कि हम उस हालत को भली-भाँति जानते हैं जिसमें क़ुरैश के सरदार आपकी क़ुरआन की तिलावत सुनते हैं। उनका सुनना किसी हिदायत और सच्चाई को क़बूल करने के लिए नहीं होता, बल्कि वे मज़ाक उड़ाने, बुराई करने और आपको नीचा दिखाने की ग़रज़ से सुनते हैं। हम उनकी उस गुप्त सरगोशी से भी पूरी तरह वाक़िफ़ हैं जो वे आपस में करते हैं, जब वे कहते हैं कि "तुम लोग तो सिर्फ़ एक ऐसे शख्स की पैरवी कर रहे हो जिस पर जादू कर दिया गया है, जिसकी अक्ल मारी गई है और उसका कलाम फ़साद-ओ-ख़राबी से भरा है।" यानी वे आप ﷺ को मसहूर (जादू किया हुआ) कहकर आपकी दावत को बदनाम करना चाहते थे, हालाँकि वे ख़ुद जानते थे कि आप सबसे ज़्यादा सच्चे और अमानतदार हैं। अल्लाह ने उनके इस बुरे रवैये और झूठे इल्ज़ाम से आपको बचाया और उनकी साज़िशों को नाकाम किया।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह तआला अपने बंदों के दिलों के हाल और उनकी नीयतों से पूरी तरह वाक़िफ़ है, चाहे वे कितनी ही गुप्त बातें क्यों न करें। यह हमारे लिए तसल्ली का बाइस है कि हमारा रब हमारी हर अच्छी कोशिश को देखता और जानता है।
नबी ﷺ को भी जब लोगों की तरफ़ से तकलीफ़ पहुँचती थी, तो अल्लाह उन्हें दिलासा देता था। इससे हमें सबक मिलता है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को मुख़ालिफ़ों की बातों से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह उनकी हर बात जानता है और अपने नेक बंदों की मदद करता है।
इस्लाम सिखाता है कि जब लोग सच्चाई को नकारने के लिए झूठे इल्ज़ाम लगाते हैं, तो यह उनकी अपनी नाकामी है। हमें अपने अक़ीदे और अमल पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही सबसे बेहतर जानने वाला और हिफ़ाज़त करने वाला है।
जब ये लोग तुम्हारी तरफ कान लगाते हैं तो जो कुछ ये ग़ौर से सुनते हैं हम तो खूब जानते हैं और जब ये लोग बाहम कान में बात करते हैं तो उस वक्त ये ज़ालिम (ईमानदारों से) कहते हैं कि तुम तो बस एक (दीवाने) आदमी के पीछे पड़े हो जिस पर किसी ने जादू कर दिया है
और (गोया) हम उनके कानों में गरानी पैदा कर देते हैं कि न सुन सकें जब तुम क़ुरान में अपने परवरदिगार का तन्हा ज़िक्र करते हो तो कुफ्फार उलटे पावँ नफरत करके (तुम्हारे पास से) भाग खड़े होते हैं
जब ये लोग तुम्हारी तरफ कान लगाते हैं तो जो कुछ ये ग़ौर से सुनते हैं हम तो खूब जानते हैं और जब ये लोग बाहम कान में बात करते हैं तो उस वक्त ये ज़ालिम (ईमानदारों से) कहते हैं कि तुम तो बस एक (दीवाने) आदमी के पीछे पड़े हो जिस पर किसी ने जादू कर दिया है
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