अल-इसरा · 74/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
وَلَوْلَا أَن ثَبَّتْنَاكَ لَقَدْ كِدتَّ تَرْكَنُ إِلَيْهِمْ شَيْئًا قَلِيلًا ۝٧٤
Wa law laaa an sabbatnaaka laqad kitta tarkanu ilaihim sha`an qaleela
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम तुमको साबित क़दम न रखते तो ज़रुर तुम भी ज़रा (ज़हूर) झुकने ही लगते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَبَّتْنَاكَ: हमने आपको स्थिर रखा, मज़बूत किया।
  • تَرْكَنُ: झुकना, मेल करना, उनकी तरफ़ रुझान होना।
  • شَيْئًا قَلِيلًا: बहुत थोड़ा सा, हल्का सा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत नबी करीम ﷺ की शान में एक बहुत बड़ी दया और मेहरबानी का ज़िक्र करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐ मेरे नबी! अगर हम आपको सच्चाई पर स्थिर न रखते और आपकी हिफ़ाज़त न करते, तो उन काफ़िरों की तरफ़ आपका दिल हल्का सा झुक जाता—यानी उनकी बातों की तरफ़ थोड़ा सा भी रुझान हो जाता। मगर अल्लाह ने अपनी ख़ास मेहरबानी से आपको महफ़ूज़ रखा और आपको उनके दबाव, चालों और पेशकशों से बचा लिया।

इसका मतलब यह नहीं कि नबी ﷺ में कोई कमी थी, बल्कि यह उनकी इंसानियत का तक़ाज़ा था। वे चाहते थे कि उनकी क़ौम ईमान ले आए, इसलिए वे उन्हें राह पर लाने के लिए बहुत कोशिश करते थे। काफ़िरों ने उन्हें कई तरह के लालच दिए, कई पेशकशें कीं, ताकि वे दीन के कुछ मामलों में उनकी बात मान लें। लेकिन अल्लाह ने अपने नबी को इस क़दर मज़बूती अता की कि उनके दिल में उन काफ़िरों की तरफ़ झुकने का नामोनिशान भी नहीं आया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हिफ़ाज़त सबसे बड़ी नेमत है। जब अल्लाह किसी को सच्चाई पर स्थिर रखता है, तो दुनिया की तमाम ताक़तें, चालें और दबाव उसे रास्ते से नहीं हटा सकतीं। नबी ﷺ की यह मिसाल हमारे लिए सबक़ है कि हम भी अल्लाह से साबित क़दमी की दुआ करें, क्योंकि इंसान अपने दम पर कमज़ोर है, मगर अल्लाह की मदद से वह हर मुश्किल पर क़ाबू पा सकता है।

यह भी याद रखें कि नबी ﷺ मासूम (पाप से पाक) थे और उन्होंने कभी किसी ग़लत काम की तरफ़ रुझान नहीं किया। यह आयत उनकी पाकी और अल्लाह की ख़ास हिफ़ाज़त का सबूत है। अल्लाह ने उन्हें हर उस चीज़ से बचाया जो उनके मक़ाम के लायक़ नहीं थी। यह हमारे लिए इस बात की दलील है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहें और अल्लाह से हिदायत और साबित क़दमी की दुआ करते रहें। दुनिया की मुश्किलें, लालच और दबाव चाहे कितने भी बड़े हों, अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को वह कभी रास्ते से नहीं भटकाता। यही वह नेमत है जो अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को अता की और यही वह चीज़ है जो हर मोमिन को हासिल करनी चाहिए।



📜 आयत 72-76 — सूरा अल-इसरा

72وَمَن كَانَ فِي هَٰذِهِ أَعْمَىٰ فَهُوَ فِي الْآخِرَةِ أَعْمَىٰ وَأَضَلُّ سَبِيلًا
और जो शख़्श इस (दुनिया) में (जान बूझकर) अंधा बना रहा तो वह आख़िरत में भी अंधा ही रहेगा और (नजात) के रास्ते से बहुत दूर भटका सा हुआ
73وَإِن كَادُوا لَيَفْتِنُونَكَ عَنِ الَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ لِتَفْتَرِيَ عَلَيْنَا غَيْرَهُ ۖ وَإِذًا لَّاتَّخَذُوكَ خَلِيلًا
और (ऐ रसूल) हमने तो (क़ुरान) तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा अगर चे लोग तो तुम्हें इससे बहकाने ही लगे थे ताकि तुम क़ुरान के अलावा फिर (दूसरी बातों का) इफ़तेरा बाँधों और (जब तुम ये कर गुज़रते उस वक्त ये लोग तुम को अपना सच्चा दोस्त बना लेते
74وَلَوْلَا أَن ثَبَّتْنَاكَ لَقَدْ كِدتَّ تَرْكَنُ إِلَيْهِمْ شَيْئًا قَلِيلًا
और अगर हम तुमको साबित क़दम न रखते तो ज़रुर तुम भी ज़रा (ज़हूर) झुकने ही लगते
75إِذًا لَّأَذَقْنَاكَ ضِعْفَ الْحَيَاةِ وَضِعْفَ الْمَمَاتِ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ عَلَيْنَا نَصِيرًا
और (अगर तुम ऐसा करते तो) उस वक्त हम तुमको ज़िन्दगी में भी और मरने पर भी दोहरे (अज़ाब) का मज़ा चखा देते और फिर तुम को हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार भी न मिलता
76وَإِن كَادُوا لَيَسْتَفِزُّونَكَ مِنَ الْأَرْضِ لِيُخْرِجُوكَ مِنْهَا ۖ وَإِذًا لَّا يَلْبَثُونَ خِلَافَكَ إِلَّا قَلِيلًا
और ये लोग तो तुम्हें (सर ज़मीन मक्के) से दिल बर्दाश्त करने ही लगे थे ताकि तुम को वहाँ से (शाम की तरफ) निकाल बाहर करें और ऐसा होता तो तुम्हारे पीछे में ये लोग चन्द रोज़ के सिवा ठहरने भी न पाते
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
74आयत

अनुवाद — अल-इसरा 74

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Friday, October 2, 2026

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