अल-इसरा · 73/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَإِن كَادُوا لَيَفْتِنُونَكَ عَنِ الَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ لِتَفْتَرِيَ عَلَيْنَا غَيْرَهُ ۖ وَإِذًا لَّاتَّخَذُوكَ خَلِيلًا ۝٧٣
Wa in kaadoo la yaftinoonaka `anil lazeee awhainaaa ilaika litaftariya `alainaaa ghairahoo wa izallat takhazooka khaleelaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तो (क़ुरान) तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा अगर चे लोग तो तुम्हें इससे बहकाने ही लगे थे ताकि तुम क़ुरान के अलावा फिर (दूसरी बातों का) इफ़तेरा बाँधों और (जब तुम ये कर गुज़रते उस वक्त ये लोग तुम को अपना सच्चा दोस्त बना लेते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَيَفْتِنُونَكَ (वे आपको फुसला कर बहकाना चाहते थे) — अर्थात आपको मार्ग से विचलित करने की कोशिश करना।
  • لِتَفْتَرِيَ (ताकि आप गढ़ लें) — अर्थात झूठी बातें मिला कर कहें।
  • خَلِيلًا (घनिष्ठ मित्र) — अर्थात सच्चा और विशेष दोस्त।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने आपको उस वह़्य (प्रकाशना) से बहकाने की भरपूर कोशिश की जो हमने आपकी ओर उतारी है। उनकी चाल यह थी कि आप हमारी ओर से कुछ ऐसी बातें गढ़ लें जो उनकी इच्छाओं और मनमानी के अनुकूल हों, ताकि वे आपको अपने करीबी और घनिष्ठ मित्र के रूप में अपना लें। लेकिन अल्लाह ने आपकी रक्षा की और आपको उनके इस फंदे से बचाए रखा।

यह आयत आपको बताती है कि शैतान और उसके साथी हर युग में सच्चे दीन (धर्म) को बदलने और नबियों को झुकाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह अपने नबियों की हिफाज़त करता है। यहाँ अल्लाह नबी ﷺ को तसल्ली दे रहे हैं कि आप उनकी धमकियों और लालच से न डरें, क्योंकि आप अल्लाह की हिफाज़त में हैं।

इस आयत से हमें सबक मिलता है कि सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे दुनिया वाले कितना ही दबाव डालें या लालच दें। अल्लाह का दीन (धर्म) और उसकी वह़्य ही सच्चा रास्ता है, और उस पर अटल रहना ही कामयाबी की शर्त है। जो लोग दुनिया की खुशामद के लिए दीन में हेर-फेर करते हैं, वे अल्लाह की नज़र में बड़े नुक़सान में हैं।

यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अल्लाह का कलाम (क़ुरआन) ही हमारा मार्गदर्शक है, और हमें उसे ही अपनी ज़िंदगी का नियम बनाना है। किसी की खुशी के लिए उसमें कमी या बदलाव नहीं करना चाहिए। अल्लाह अपने सच्चे बंदों की हिफाज़त करता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।



📜 आयत 71-75 — अल-इसरा

71يَوْمَ نَدْعُو كُلَّ أُنَاسٍ بِإِمَامِهِمْ ۖ فَمَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَأُولَٰئِكَ يَقْرَءُونَ كِتَابَهُمْ وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلًا
उस दिन (को याद करो) जब हम तमाम लोगों को उन पेशवाओं के साथ बुलाएँगें तो जिसका नामए अमल उनके दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह लोग (खुश खुश) अपना नामए अमल पढ़ने लगेगें और उन पर रेशा बराबर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
72وَمَن كَانَ فِي هَٰذِهِ أَعْمَىٰ فَهُوَ فِي الْآخِرَةِ أَعْمَىٰ وَأَضَلُّ سَبِيلًا
और जो शख़्श इस (दुनिया) में (जान बूझकर) अंधा बना रहा तो वह आख़िरत में भी अंधा ही रहेगा और (नजात) के रास्ते से बहुत दूर भटका सा हुआ
73وَإِن كَادُوا لَيَفْتِنُونَكَ عَنِ الَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ لِتَفْتَرِيَ عَلَيْنَا غَيْرَهُ ۖ وَإِذًا لَّاتَّخَذُوكَ خَلِيلًا
और (ऐ रसूल) हमने तो (क़ुरान) तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा अगर चे लोग तो तुम्हें इससे बहकाने ही लगे थे ताकि तुम क़ुरान के अलावा फिर (दूसरी बातों का) इफ़तेरा बाँधों और (जब तुम ये कर गुज़रते उस वक्त ये लोग तुम को अपना सच्चा दोस्त बना लेते
74وَلَوْلَا أَن ثَبَّتْنَاكَ لَقَدْ كِدتَّ تَرْكَنُ إِلَيْهِمْ شَيْئًا قَلِيلًا
और अगर हम तुमको साबित क़दम न रखते तो ज़रुर तुम भी ज़रा (ज़हूर) झुकने ही लगते
75إِذًا لَّأَذَقْنَاكَ ضِعْفَ الْحَيَاةِ وَضِعْفَ الْمَمَاتِ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ عَلَيْنَا نَصِيرًا
और (अगर तुम ऐसा करते तो) उस वक्त हम तुमको ज़िन्दगी में भी और मरने पर भी दोहरे (अज़ाब) का मज़ा चखा देते और फिर तुम को हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार भी न मिलता
अल-इसराकुरान सूची
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मक्कीRevelation
73आयत

अनुवाद — अल-इसरा 73

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सूरा आयत 73/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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