अल-कहफ · 13/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
نَّحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَأَهُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّهُمْ فِتْيَةٌ آمَنُوا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَاهُمْ هُدًى ۝١٣
Nahnu naqussu `alaika naba ahum bilhaqq; innahum fityatun aamanoo bi Rabbihim wa zidnaahum hudaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) अब हम उनका हाल तुमसे बिल्कुल ठीक तहक़ीक़ातन (यक़ीन के साथ) बयान करते हैं वह चन्द जवान थे कि अपने (सच्चे) परवरदिगार पर ईमान लाए थे और हम ने उनकी सोच समझ और ज्यादा कर दी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَقُصُّ — हम सुनाते हैं, बयान करते हैं।
  • نَبَأَهُم — उनकी खबर, उनका वृत्तांत।
  • بِالْحَقِّ — सच्चाई के साथ, पूरी सच्चाई।
  • فِتْيَةٌ — जवान लोग, नौजवान।
  • آمَنُوا — ईमान लाए, विश्वास किया।
  • زِدْنَاهُمْ هُدًى — हमने उन्हें और अधिक मार्गदर्शन दिया, हिदायत में बढ़ोतरी की।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हम आपको इन नौजवानों का वृत्तांत पूरी सच्चाई के साथ सुना रहे हैं। यह कोई कहानी नहीं है, बल्कि एक सच्चा ऐतिहासिक घटनाक्रम है जो हम आपको बता रहे हैं। ये लोग (अस्हाबे कहफ) जवान थे — जवानी के उस दौर में जब इंसान अक्सर दुनिया की चमक-दमक और लज्जतों में डूब जाता है, उन्होंने अपने रब पर ईमान लाया। उन्होंने सच्चे दिल से अपने परवरदिगार को मान लिया और उसकी इबादत को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया।

जब उन्होंने यह कदम उठाया, तो अल्लाह ने उन्हें और हिदायत दी — यानी उनके ईमान में बरकत डाली, उनके दिलों को मजबूत किया और उन्हें सच्चाई पर साबित क़दम रहने की तौफीक दी। यह अल्लाह का कानून है कि जो बंदा उसकी तरफ एक कदम बढ़ाता है, अल्लाह उसकी तरफ दस कदम बढ़ता है। जो सच्चे दिल से ईमान लाता है, अल्लाह उसके दिल में नूर, समझ और साबित क़दमी पैदा कर देता है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है — ईमान सिर्फ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल की गहराई से अल्लाह को रब मानना और उसके हुक्मों के आगे सर झुकाना है। जब बंदा यह करता है, तो अल्लाह उसे हिदायत की और मंज़िलें देता है। जवानी में ईमान और नेकी की राह चुनना बहुत बड़ी कामयाबी है, और अल्लाह ऐसे नौजवानों पर फख्र करता है। यह वृत्तांत हमें बताता है कि सच्चाई पर क़ायम रहने वालों को अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता — वह उन्हें हिदायत, सुकून और कामयाबी से नवाज़ता है।



📜 आयत 11-15 — अल-कहफ

11فَضَرَبْنَا عَلَىٰ آذَانِهِمْ فِي الْكَهْفِ سِنِينَ عَدَدًا
तब हमने कई बरस तक ग़ार में उनके कानों पर पर्दे डाल दिए (उन्हें सुला दिया)
12ثُمَّ بَعَثْنَاهُمْ لِنَعْلَمَ أَيُّ الْحِزْبَيْنِ أَحْصَىٰ لِمَا لَبِثُوا أَمَدًا
फिर हमने उन्हें चौकाया ताकि हम देखें कि दो गिरोहों में से किसी को (ग़ार में) ठहरने की मुद्दत खूब याद है
13نَّحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَأَهُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّهُمْ فِتْيَةٌ آمَنُوا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَاهُمْ هُدًى
(ऐ रसूल) अब हम उनका हाल तुमसे बिल्कुल ठीक तहक़ीक़ातन (यक़ीन के साथ) बयान करते हैं वह चन्द जवान थे कि अपने (सच्चे) परवरदिगार पर ईमान लाए थे और हम ने उनकी सोच समझ और ज्यादा कर दी है
14وَرَبَطْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ إِذْ قَامُوا فَقَالُوا رَبُّنَا رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ لَن نَّدْعُوَ مِن دُونِهِ إِلَٰهًا ۖ لَّقَدْ قُلْنَا إِذًا شَطَطًا
और हमने उनकी दिलों पर (सब्र व इस्तेक़लाल की) गिराह लगा दी (कि जब दक़ियानूस बादशाह ने कुफ्र पर मजबूर किया) तो उठ खड़े हुए (और बे ताम्मुल (खटके)) कहने लगे हमारा परवरदिगार तो बस सारे आसमान व ज़मीन का मालिक है हम तो उसके सिवा किसी माबूद की हरगिज़ इबादत न करेगें
15هَٰؤُلَاءِ قَوْمُنَا اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ آلِهَةً ۖ لَّوْلَا يَأْتُونَ عَلَيْهِم بِسُلْطَانٍ بَيِّنٍ ۖ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
अगर हम ऐसा करे तो यक़ीनन हमने अक़ल से दूर की बात कही (अफसोस एक) ये हमारी क़ौम के लोग हैं कि जिन्होनें ख़ुदा को छोड़कर (दूसरे) माबूद बनाए हैं (फिर) ये लोग उनके (माबूद होने) की कोई सरीही (खुली) दलील क्यों नहीं पेश करते और जो शख़्श ख़ुदा पर झूट बोहतान बाँधे उससे ज्यादा ज़ालिम और कौन होगा
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अनुवाद — अल-कहफ 13

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सूरा आयत 13/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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