अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ: अपनी आत्मा पर अत्याचार करने वाला (अर्थात कुफ्र और अहंकार के कारण स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला)
- تَبِيدَ: नष्ट हो जाना, मिट जाना, समाप्त हो जाना
- أَبَدًا: कभी भी, हमेशा के लिए
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस धनी काफ़िर का वर्णन करती है जो अपने बगीचे में अपने ईमानवाले भाई को ले गया, और वह अपने कुफ्र और अहंकार के कारण अपनी आत्मा पर अत्याचार कर रहा था। उसने अपने बगीचे की शोभा और समृद्धि देखकर अत्यधिक घमंड और गर्व के साथ कहा: "मैं नहीं समझता कि यह बगीचा कभी नष्ट हो सकता है।" उसका यह विश्वास उसकी लंबी आशाओं और सांसारिक जीवन में पूर्ण लिप्तता के कारण था। उसने यह भी कहा कि यदि क़ियामत आएगी भी, तो उसे अपने रब के पास इससे भी बेहतर स्थान मिलेगा, क्योंकि वह अपने आपको विशेष सम्मान का हक़दार समझता था।
यह आयत हमें सिखाती है कि सांसारिक धन-संपत्ति और वैभव पर घमंड करना, और यह सोचना कि यह हमेशा रहेगा, एक बड़ा भ्रम है। यह भ्रम इंसान को अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल कर देता है और उसे अक़ीरत (आख़िरत) के बारे में लापरवाह बना देता है। अल्लाह तआला की कुदरत के आगे कोई भी चीज़ स्थायी नहीं है। जो व्यक्ति अपने धन और संपत्ति पर घमंड करता है, वह वास्तव में अपनी आत्मा पर अत्याचार करता है, क्योंकि वह अपने आपको अल्लाह की रहमत और हिदायत से वंचित कर लेता है।
इस क़िस्से से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने जीवन में अल्लाह की नेमतों को पहचानना चाहिए और उसका शुक्र अदा करना चाहिए, न कि उन पर घमंड करना चाहिए। अल्लाह की नेमतें उसकी ओर से एक परीक्षा हैं, और हमें चाहिए कि हम उन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल करें और उसकी याद में जीवन बिताएँ। याद रखें, यह दुनिया और इसकी सारी चीज़ें फ़ानी (नाशवान) हैं, और असली जीवन आख़िरत का है। जो व्यक्ति इस हक़ीक़त को समझ लेता है, वह कभी घमंड नहीं करता और हमेशा अल्लाह की रहमत का आशिक़ बना रहता है।
📜 आयत 33-37 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 35
सूरा अल-कहफ आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये बातें करता हुआ अपने बाग़ मे भी जा…सूरा आयत 35/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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