अल-कहफ · 67/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
قَالَ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِيَ صَبْرًا ۝٦٧
Qaalaa innaka lan tastatee`a ma`iya sabraa
📖 हिंदी अर्थ
कि जो रहनुमाई का इल्म आपको है (ख़ुदा की तरफ से) सिखाया गया है उसमें से कुछ मुझे भी सिखा दीजिए खिज्र ने कहा (मै सिखा दूँगा मगर) आपसे मेरे साथ सब्र न हो सकेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَن تَسْتَطِيعَ – तुम कभी सक्षम नहीं हो सकोगे
  • صَبْرًا – धैर्य रखना, सहन करना

तफ़सीर:

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने हज़रत ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) से उनके साथ चलने की इच्छा ज़ाहिर की ताकि उनसे वह ज्ञान सीख सकें जो अल्लाह ने उन्हें विशेष रूप से प्रदान किया है, तो हज़रत ख़िज़र ने उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया कि "तुम मेरे साथ धैर्य नहीं रख सकोगे।"

यह बात हज़रत ख़िज़र ने बड़ी ही समझदारी और स्पष्टता के साथ कही। उन्होंने यह इसलिए कहा क्योंकि अल्लाह ने उन्हें जो ज्ञान दिया था, वह बाहरी रूप से देखने में अजीब और अप्रत्याशित लगता था। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास शरीयत का ज्ञान था, जिसके अनुसार वे हर उस चीज़ पर सवाल उठाते जो उनके ज्ञान के विपरीत दिखती। जबकि हज़रत ख़िज़र के कार्य अल्लाह की विशेष प्रेरणा और आंतरिक ज्ञान पर आधारित थे, जिनका बाहरी रूप देखकर कोई भी व्यक्ति उन्हें गलत समझ सकता था।

यहाँ एक बहुत बड़ी सीख है कि इंसान को अपने ज्ञान पर घमंड नहीं करना चाहिए। अल्लाह के पास अनंत ज्ञान है, और वह जिसे चाहता है उसे अपनी विशेष समझ और ज्ञान प्रदान करता है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान पैगंबर को भी यह स्वीकार करना पड़ा कि उनके ज्ञान की एक सीमा है। यह हमें सिखाता है कि हमें हमेशा अल्लाह के ज्ञान के आगे अपनी अक्ल को झुकाना चाहिए और उसके फैसलों पर भरोसा रखना चाहिए, भले ही वे हमारी समझ से परे क्यों न हों।

यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि सच्चा ज्ञान विनम्रता के साथ आता है। जो व्यक्ति जितना अधिक ज्ञानी होता है, वह उतना ही अधिक विनम्र होता है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने हज़रत ख़िज़र से सीखने के लिए अपनी महानता को भुलाकर उनके साथ चलने की इच्छा जताई, और यही विनम्रता हर मुसलमान के लिए एक आदर्श है। अल्लाह हमें भी सच्चा ज्ञान और उसे सीखने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।



📜 आयत 65-69 — सूरा अल-कहफ

65فَوَجَدَا عَبْدًا مِّنْ عِبَادِنَا آتَيْنَاهُ رَحْمَةً مِّنْ عِندِنَا وَعَلَّمْنَاهُ مِن لَّدُنَّا عِلْمًا
तो (जहाँ मछली थी) दोनों ने हमारे बन्दों में से एक (ख़ास) बन्दा खिज्र को पाया जिसको हमने अपनी बारगाह से रहमत (विलायत) का हिस्सा अता किया था
66قَالَ لَهُ مُوسَىٰ هَلْ أَتَّبِعُكَ عَلَىٰ أَن تُعَلِّمَنِ مِمَّا عُلِّمْتَ رُشْدًا
और हमने उसे इल्म लदुन्नी (अपने ख़ास इल्म) में से कुछ सिखाया था मूसा ने उन (ख़िज्र) से कहा क्या (आपकी इजाज़त है कि) मै इस ग़रज़ से आपके साथ साथ रहूँ
67قَالَ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِيَ صَبْرًا
कि जो रहनुमाई का इल्म आपको है (ख़ुदा की तरफ से) सिखाया गया है उसमें से कुछ मुझे भी सिखा दीजिए खिज्र ने कहा (मै सिखा दूँगा मगर) आपसे मेरे साथ सब्र न हो सकेगा
68وَكَيْفَ تَصْبِرُ عَلَىٰ مَا لَمْ تُحِطْ بِهِ خُبْرًا
और (सच तो ये है) जो चीज़ आपके इल्मी अहाते से बाहर हो
69قَالَ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ صَابِرًا وَلَا أَعْصِي لَكَ أَمْرًا
उस पर आप सब्र क्योंकर कर सकते हैं मूसा ने कहा (आप इत्मिनान रखिए) अगर ख़ुदा ने चाहा तो आप मुझे साबिर आदमी पाएँगें
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
67आयत

अनुवाद — अल-कहफ 67

सूरा अल-कहफ आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि जो रहनुमाई का इल्म आपको है (ख़ुदा की तरफ…

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Thursday, October 1, 2026

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