अल-कहफ · 88/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَأَمَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُ جَزَاءً الْحُسْنَىٰ ۖ وَسَنَقُولُ لَهُ مِنْ أَمْرِنَا يُسْرًا ۝٨٨
Wa ammaa man aamana wa `amila saalihan falahoo jazaaa`anil husnaa wa sanaqoolu lahoo min amrinaa yusraa
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स ईमान कुबूल करेगा और अच्छे काम करेगा तो (वैसा ही) उसके लिए अच्छे से अच्छा बदला है और हम बहुत जल्द उसे अपने कामों में से आसान काम (करने) को कहेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آمَنَ: ईमान लाया, दिल से सत्य को स्वीकार किया।
  • عَمِلَ صَالِحًا: नेक और अच्छे कर्म किए।
  • جَزَاءً: बदला, पुरस्कार।
  • الْحُسْنَى: सबसे अच्छा बदला, यानी जन्नत।
  • يُسْرًا: आसानी, नरमी, सहूलियत।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बता रहे हैं जो ईमान लाते हैं और नेक कर्म करते हैं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के पास सबसे अच्छा बदला है—यानी जन्नत। यह बदला उन्हें उनके ईमान और अच्छे कर्मों के कारण मिलेगा, जो अल्लाह की ओर से एक महान उपहार है।

इसके अलावा, अल्लाह फरमाता है कि हम ऐसे लोगों से नरमी और आसानी से पेश आएंगे। यानी उन्हें ऐसे आदेश नहीं देंगे जो उनके लिए मुश्किल हों, बल्कि हर मामले में उनके लिए सहूलियत और आराम का रास्ता अपनाएंगे। यह अल्लाह की रहमत और करम का इज़हार है कि वह अपने नेक बंदों के साथ नर्मी और मेहरबानी का व्यवहार करता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और नेक कर्म ही सफलता की कुंजी हैं। जो व्यक्ति अल्लाह पर ईमान रखता है और अपने जीवन को अच्छे कर्मों से सजाता है, उसके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरी है। अल्लाह उसके साथ नरमी बरतता है और उसके हर काम में आसानी पैदा करता है।

याद रखिए, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए खास है जो उस पर भरोसा करते हैं और उसकी इबादत में अपना जीवन बिताते हैं। जन्नत की खुशखबरी उन्हीं के लिए है जो ईमान और अमल-ए-सालिह को अपना निशाना बनाते हैं। आइए, हम भी अपने जीवन को ईमान और नेकियों से रोशन करें, ताकि हमें भी अल्लाह की इस महान नेमत और आसानी का हिस्सा मिल सके।



📜 आयत 86-90 — अल-कहफ

86حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَغْرِبَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَغْرُبُ فِي عَيْنٍ حَمِئَةٍ وَوَجَدَ عِندَهَا قَوْمًا ۗ قُلْنَا يَا ذَا الْقَرْنَيْنِ إِمَّا أَن تُعَذِّبَ وَإِمَّا أَن تَتَّخِذَ فِيهِمْ حُسْنًا
यहाँ तक कि जब (चलते-चलते) आफताब के ग़ुरूब होने की जगह पहुँचा तो आफताब उनको ऐसा दिखाई दिया कि (गोया) वह काली कीचड़ के चश्में में डूब रहा है और उसी चश्में के क़रीब एक क़ौम को भी आबाद पाया हमने कहा ऐ जुलकरनैन (तुमको एख्तियार है) ख्वाह इनके कुफ्र की वजह से इनकी सज़ा करो (कि ईमान लाए) या इनके साथ हुस्ने सुलूक का शेवा एख्तियार करो (कि खुद ईमान क़ुबूल करें)
87قَالَ أَمَّا مَن ظَلَمَ فَسَوْفَ نُعَذِّبُهُ ثُمَّ يُرَدُّ إِلَىٰ رَبِّهِ فَيُعَذِّبُهُ عَذَابًا نُّكْرًا
जुलकरनैन ने अर्ज़ की जो शख्स सरकशी करेगा तो हम उसकी फौरन सज़ा कर देगें (आख़िर) फिर वह (क़यामत में) अपने परवरदिगार के सामने लौटाकर लाया ही जाएगा और वह बुरी से बुरी सज़ा देगा
88وَأَمَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُ جَزَاءً الْحُسْنَىٰ ۖ وَسَنَقُولُ لَهُ مِنْ أَمْرِنَا يُسْرًا
और जो शख्स ईमान कुबूल करेगा और अच्छे काम करेगा तो (वैसा ही) उसके लिए अच्छे से अच्छा बदला है और हम बहुत जल्द उसे अपने कामों में से आसान काम (करने) को कहेंगे
89ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا
फिर उस ने एक दूसरी राह एख्तियार की
90حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَّمْ نَجْعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتْرًا
यहाँ तक कि जब चलते-चलते आफताब के तूलूउ होने की जगह पहुँचा तो (आफताब) से ऐसा ही दिखाई दिया (गोया) कुछ लोगों के सर पर उस तरह तुलूउ कर रहा है जिन के लिए हमने आफताब के सामने कोई आड़ नहीं बनाया था
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अनुवाद — अल-कहफ 88

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Tuesday, August 18, 2026

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