मरियम · 44/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
يَا أَبَتِ لَا تَعْبُدِ الشَّيْطَانَ ۖ إِنَّ الشَّيْطَانَ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ عَصِيًّا ۝٤٤
Yaaa abati laa ta`budish Shaitaana innash Shaitaana kaana lir Rahmaani `asiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ अब्बा आप शैतान की परसतिश न कीजिए (क्योंकि) शैतान यक़ीनन खुदा का नाफ़रमान (बन्दा) है।

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لا تَعْبُدِ الشَّيْطَانَ: शैतान की आज्ञा का पालन मत करो (अर्थात् उसकी बात मानकर मूर्तियों की पूजा मत करो)।
  • عَصِيًّا: अत्यधिक अवज्ञाकारी, सिरकश, जो अल्लाह के आदेश का उल्लंघन करने में हद से गुज़र गया।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरे प्यारे बाप! मैं आपसे विनम्रतापूर्वक और प्रेमपूर्वक कहता हूँ कि आप शैतान की इबादत न करें। यानी उसकी बात मानकर उन मूर्तियों की पूजा न करें, जिनकी पूजा करने के लिए शैतान आपको उकसाता है। क्योंकि जो व्यक्ति किसी की आज्ञा का पालन करते हुए उसकी इच्छा के अनुसार कार्य करता है, वह गोया उसी की इबादत करता है। शैतान ने आपको मूर्तिपूजा का आदेश दिया है, इसलिए उसकी आज्ञा का पालन करना वास्तव में शैतान की ही इबादत है।

याद रखिए, शैतान तो अल्लाह (रहमान) का अत्यंत अवज्ञाकारी और सिरकश है। उसने अल्लाह के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था, जब अल्लाह ने उसे आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करने का आदेश दिया था। उसने घमंड और अहंकार के कारण अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन किया। तो जो व्यक्ति स्वयं अल्लाह का अवज्ञाकारी हो, वह किसी और को सत्य के मार्ग पर कैसे ले जा सकता है? वह तो केवल गुमराही और विनाश की ओर ही ले जाता है।

यह नसीहत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने पिता को दी थी, जो मूर्तिपूजक थे। वे अत्यंत नम्रता, प्रेम और आदर के साथ अपने पिता को सत्य की ओर बुला रहे थे। यह हमारे लिए एक महान शिक्षा है कि सत्य का प्रचार करते समय हमें नम्रता, प्रेम और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए, चाहे सामने वाला कोई भी हो।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि शैतान का अनुसरण करना वास्तव में उसकी इबादत है, और यह सबसे बड़ी भूल है। अल्लाह (रहमान) अत्यंत दयालु है, उसने हमें शैतान के प्रभाव से बचने का रास्ता दिखाया है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की आज्ञा का पालन करें और शैतान के बहकावे से बचें, क्योंकि शैतान हमारा खुला शत्रु है, जबकि अल्लाह हमारा सबसे बड़ा मित्र और रक्षक है। जो व्यक्ति अल्लाह की राह पर चलता है, उसे कभी निराशा नहीं होती, और जो शैतान का अनुसरण करता है, वह अंततः घाटे में रहता है।



📜 आयत 42-46 — सूरा मरियम

42إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ لِمَ تَعْبُدُ مَا لَا يَسْمَعُ وَلَا يُبْصِرُ وَلَا يُغْنِي عَنكَ شَيْئًا
इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे नबी थे जब उन्होंने अपने चचा और मुँह बोले बाप से कहा कि ऐ अब्बा आप क्यों, ऐसी चीज़ (बुत) की परसतिश करते हैं जो ने सुन सकता है और न देख सकता है
43يَا أَبَتِ إِنِّي قَدْ جَاءَنِي مِنَ الْعِلْمِ مَا لَمْ يَأْتِكَ فَاتَّبِعْنِي أَهْدِكَ صِرَاطًا سَوِيًّا
और न कुछ आपके काम ही आ सकता है ऐ मेरे अब्बा यक़ीनन मेरे पास वह इल्म आ चुका है जो आपके पास नहीं आया तो आप मेरी पैरवी कीजिए मैं आपको (दीन की) सीधी राह दिखा दूँगा
44يَا أَبَتِ لَا تَعْبُدِ الشَّيْطَانَ ۖ إِنَّ الشَّيْطَانَ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ عَصِيًّا
ऐ अब्बा आप शैतान की परसतिश न कीजिए (क्योंकि) शैतान यक़ीनन खुदा का नाफ़रमान (बन्दा) है।
45يَا أَبَتِ إِنِّي أَخَافُ أَن يَمَسَّكَ عَذَابٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ فَتَكُونَ لِلشَّيْطَانِ وَلِيًّا
ऐ अब्बा मैं यक़ीनन इससे डरता हूँ कि (मुबादा) खुदा की तरफ से आप पर कोई अज़ाब नाज़िल हो तो (आख़िर) आप शैतान के साथी बन जाईए
46قَالَ أَرَاغِبٌ أَنتَ عَنْ آلِهَتِي يَا إِبْرَاهِيمُ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ لَأَرْجُمَنَّكَ ۖ وَاهْجُرْنِي مَلِيًّا
(आज़र ने) कहा (क्यों) इबराहीम क्या तू मेरे माबूदों को नहीं मानता है अगर तू (इन बातों से) किसी तरह बाज़ न आएगा तो (याद रहे) मैं तुझे संगसार कर दूँगा और तू मेरे पास से हमेशा के लिए दूर हो जा
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अनुवाद — मरियम 44

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Friday, October 2, 2026

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