मरियम · 45/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
يَا أَبَتِ إِنِّي أَخَافُ أَن يَمَسَّكَ عَذَابٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ فَتَكُونَ لِلشَّيْطَانِ وَلِيًّا ۝٤٥
Yaaa abati innee akhaafu ai yamssaka `azaabum minar Rahmaani fatakoona lish Shaitaani waliyyaa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ अब्बा मैं यक़ीनन इससे डरता हूँ कि (मुबादा) खुदा की तरफ से आप पर कोई अज़ाब नाज़िल हो तो (आख़िर) आप शैतान के साथी बन जाईए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمَسَّكَ – तुम्हें छू ले, तुम पर आ पड़े
  • عَذَابٌ – यातना, अज़ाब
  • وَلِيًّا – साथी, मित्र, करीबी

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरे प्यारे बाप! मैं तुम्हारे बारे में डरता हूँ कि कहीं तुम पर रहमान (अल्लाह) की ओर से अज़ाब न आ जाए। यानी अगर तुम अपनी कुफ्र की हालत पर मर गए, तो अल्लाह तआला की यातना तुम्हें अपनी लपेट में ले लेगी। और फिर तुम शैतान के साथी और उसके करीबी बन जाओगे, और जहन्नुम की आग में उसी के साथ रहोगे।

यह वही प्यारा और नेक बेटा है — हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम — जो अपने बाप को सच्चे दिल से समझा रहा है। वह उन्हें अल्लाह की रहमत की तरफ बुला रहा है, और उस अंजाम से डरा रहा है जो कुफ्र और शिर्क पर मरने वाले का इंतज़ार कर रहा है। वह कहता है: ऐ बाप! मैं तुम्हारी भलाई चाहता हूँ, मैं तुम्हें उस अज़ाब से बचाना चाहता हूँ जो रहमान की तरफ से आएगा।

यहाँ ग़ौर करने की बात यह है कि इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह को "रहमान" (बड़ा मेहरबान) कहकर याद किया — यानी वह अल्लाह जो बहुत रहम करने वाला है, उसकी यातना भी बहुत सख्त होती है जब वह किसी पर आ जाए। और शैतान का साथी बनने का मतलब यह है कि जो शैतान की पैरवी करता है और उसके रास्ते पर चलता है, वह आख़िरत में उसी का हमराज़ होगा — और यह सबसे बड़ी बदबख्ती है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार और सच्ची नेकी यह है कि हम अपने घर वालों को, अपने माँ-बाप को भी सच्चे रास्ते की तरफ बुलाएँ, चाहे वे हमसे कितने ही करीब क्यों न हों। इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बाप से मुहब्बत की, लेकिन अल्लाह की इबादत और सच्चे दीन को सबसे ऊपर रखा। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक़ है — कि हम अपने माँ-बाप और रिश्तेदारों के साथ अच्छा सुलूक करें, उन्हें नेकी की तरफ बुलाएँ, और उनके लिए दुआ करें कि अल्लाह उन्हें सीधा रास्ता दिखाए। क्योंकि आख़िरत में हर इंसान अपने आमाल के लिए ज़िम्मेदार होगा, और सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि हम अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फिरत हासिल कर लें।



📜 आयत 43-47 — सूरा मरियम

43يَا أَبَتِ إِنِّي قَدْ جَاءَنِي مِنَ الْعِلْمِ مَا لَمْ يَأْتِكَ فَاتَّبِعْنِي أَهْدِكَ صِرَاطًا سَوِيًّا
और न कुछ आपके काम ही आ सकता है ऐ मेरे अब्बा यक़ीनन मेरे पास वह इल्म आ चुका है जो आपके पास नहीं आया तो आप मेरी पैरवी कीजिए मैं आपको (दीन की) सीधी राह दिखा दूँगा
44يَا أَبَتِ لَا تَعْبُدِ الشَّيْطَانَ ۖ إِنَّ الشَّيْطَانَ كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ عَصِيًّا
ऐ अब्बा आप शैतान की परसतिश न कीजिए (क्योंकि) शैतान यक़ीनन खुदा का नाफ़रमान (बन्दा) है।
45يَا أَبَتِ إِنِّي أَخَافُ أَن يَمَسَّكَ عَذَابٌ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ فَتَكُونَ لِلشَّيْطَانِ وَلِيًّا
ऐ अब्बा मैं यक़ीनन इससे डरता हूँ कि (मुबादा) खुदा की तरफ से आप पर कोई अज़ाब नाज़िल हो तो (आख़िर) आप शैतान के साथी बन जाईए
46قَالَ أَرَاغِبٌ أَنتَ عَنْ آلِهَتِي يَا إِبْرَاهِيمُ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ لَأَرْجُمَنَّكَ ۖ وَاهْجُرْنِي مَلِيًّا
(आज़र ने) कहा (क्यों) इबराहीम क्या तू मेरे माबूदों को नहीं मानता है अगर तू (इन बातों से) किसी तरह बाज़ न आएगा तो (याद रहे) मैं तुझे संगसार कर दूँगा और तू मेरे पास से हमेशा के लिए दूर हो जा
47قَالَ سَلَامٌ عَلَيْكَ ۖ سَأَسْتَغْفِرُ لَكَ رَبِّي ۖ إِنَّهُ كَانَ بِي حَفِيًّا
इबराहीम ने कहा (अच्छा तो) मेरा सलाम लीजिए (मगर इस पर भी) मैं अपने परवरदिगार से आपकी बख्शिश की दुआ करूँगा
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — मरियम 45

सूरा मरियम आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ अब्बा मैं यक़ीनन इससे डरता हूँ कि (मुबादा) खुदा…

सूरा आयत 45/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए