मरियम · 58/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ مِن ذُرِّيَّةِ آدَمَ وَمِمَّنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْرَائِيلَ وَمِمَّنْ هَدَيْنَا وَاجْتَبَيْنَا ۚ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُ الرَّحْمَٰنِ خَرُّوا سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩ ۝٥٨
Ulaaa`ikal lazeena an`amal laahu `alaihim minan Nabiyyeena min zurriyyati Aadama wa mimman hamalnaa ma`a Noohinw wa min zurriyyati Ibraaheema wa Israaa`eela wa mimman hadainaa wajta bainaaa; izaa tutlaa `alaihim Aayaatur Rahmaani kharroo sujjadanw wa bukiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
ये अम्बिया लोग जिन्हें खुदा ने अपनी नेअमत दी आदमी की औलाद से हैं और उनकी नस्ल से जिन्हें हमने (तूफ़ान के वक्त) नूह के साथ (कश्ती पर) सवारकर लिया था और इबराहीम व याकूब की औलाद से हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी हमने हिदायत की और मुन्तिख़ब किया जब उनके सामने खुदा की (नाज़िल की हुई) आयतें पढ़ी जाती थीं तो सजदे में ज़ारोक़तार रोते हुए गिर पड़ते थे (58) सजदा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَرُّوا: गिर पड़े, सजदे में झुक गए।
  • بُكِيًّا: रोते हुए (यह 'بُكَاء' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है अत्यधिक रोना)।
  • اجْتَبَيْنَا: हमने चुन लिया, विशेष रूप से अपनी ओर से चुन लिया।

तफसीर:

ये वे महान नबी हैं जिनका ज़िक्र इस सूरह में ज़करिया (अलैहिस्सलाम) से लेकर इदरीस (अलैहिस्सलाम) तक किया गया है। अल्लाह तआला ने उन पर अपनी विशेष कृपा और रहमत की, उन्हें नबुव्वत का शरफ़ अता किया। ये सभी नबी उन चुनी हुई नस्लों से ताल्लुक़ रखते हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से नवाज़ा — कुछ आदम (अलैहिस्सलाम) की औलाद से हैं, कुछ उन लोगों की नस्ल से हैं जिन्हें नूह (अलैहिस्सलाम) के साथ कश्ती में सवार किया गया था, कुछ इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की औलाद से हैं, और कुछ याक़ूब (अलैहिस्सलाम) जिन्हें 'इसराईल' कहा जाता है, की नस्ल से हैं। इसके अलावा, अल्लाह ने उन्हें हिदायत दी और अपनी ख़िदमत के लिए चुन लिया।

इन नबियों की सबसे खूबसूरत सिफ़त यह थी कि जब उनके सामने अल्लाह की आयतें पढ़ी जातीं — जिनमें अल्लाह की वहदानियत, उसकी कुदरत और उसके अहकाम का बयान होता — तो वे तुरंत सजदे में गिर पड़ते और अल्लाह के खौफ़ से रोते हुए उसकी इबादत करते। यह उनका अंदाज़ था — न सिर्फ़ ज़ुबान से, बल्कि पूरे जिस्म और दिल से अल्लाह के आगे झुक जाना। उनका रोना अल्लाह की अज़मत के एहसास से था, न कि किसी दुनियावी ग़म से। यही उनकी नबुव्वत की निशानी थी कि वे अल्लाह की आयतों से बेहद मुतास्सिर होते थे।

दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक़ है। अल्लाह के प्यारे नबी जब अपने रब की आयतें सुनते थे तो सजदे में गिर जाते थे और रोते थे। हमें भी चाहिए कि जब हम क़ुरआन की आयतें सुनें या पढ़ें, तो हमारे दिल नरम हों, हमारी आँखों से आँसू निकलें और हम अल्लाह के आगे झुकें। यही इमान की निशानी है। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो उसकी आयतों के सामने अपने आपको पूरी तरह सरेंडर कर देते हैं। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में क़ुरआन को पढ़ने और समझने का एहतिमाम करें, ताकि हमारे दिल भी उसी तरह नरम हों और हम अल्लाह के क़रीब हो सकें। याद रखें, जो लोग अल्लाह की आयतों से मुतास्सिर होते हैं, अल्लाह उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह देता है।



📜 आयत 56-60 — सूरा मरियम

56وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में इदरीस का भी तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह बड़े सच्चे (बन्दे और) नबी थे
57وَرَفَعْنَاهُ مَكَانًا عَلِيًّا
और हमने उनको बहुत ऊँची जगह (बेहिश्त में) बुलन्द कर (के पहुँचा) दिया
58أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ النَّبِيِّينَ مِن ذُرِّيَّةِ آدَمَ وَمِمَّنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْرَائِيلَ وَمِمَّنْ هَدَيْنَا وَاجْتَبَيْنَا ۚ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُ الرَّحْمَٰنِ خَرُّوا سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩
ये अम्बिया लोग जिन्हें खुदा ने अपनी नेअमत दी आदमी की औलाद से हैं और उनकी नस्ल से जिन्हें हमने (तूफ़ान के वक्त) नूह के साथ (कश्ती पर) सवारकर लिया था और इबराहीम व याकूब की औलाद से हैं और उन लोगों में से हैं जिनकी हमने हिदायत की और मुन्तिख़ब किया जब उनके सामने खुदा की (नाज़िल की हुई) आयतें पढ़ी जाती थीं तो सजदे में ज़ारोक़तार रोते हुए गिर पड़ते थे (58) सजदा
59۞ فَخَلَفَ مِن بَعْدِهِمْ خَلْفٌ أَضَاعُوا الصَّلَاةَ وَاتَّبَعُوا الشَّهَوَاتِ ۖ فَسَوْفَ يَلْقَوْنَ غَيًّا
फिर उनके बाद कुछ नाख़लफ (उनके) जानशीन हुए जिन्होंने नमाज़ें खोयी और नफ़सानी ख्वाहिशों के चेले बन बैठे अनक़रीब ही ये लोग (अपनी) गुमराही (के ख़ामयाजे) से जा मिलेंगे
60إِلَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ شَيْئًا
मगर (हाँ) जिसने तौबा कर लिया और अच्छे-अच्छे काम किए तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे और उन पर कुछ भी जुल्म नहीं किया जाएगा वह सदाबहार बाग़ात में रहेंगे
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
58आयत

अनुवाद — मरियम 58

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सूरा आयत 58/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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