अल-बकरा · 12/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْمُفْسِدُونَ وَلَٰكِن لَّا يَشْعُرُونَ ۝١٢
Alaaa innahum humul mufsidoona wa laakil laa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
ख़बरदार हो जाओ बेशक यही लोग फसादी हैं लेकिन समझते नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَلَا: यह एक चेतावनी और सावधान करने वाला शब्द है, जिससे सुनने वाले का ध्यान आकर्षित किया जाता है।
  • الْمُفْسِدُونَ: फ़साद करने वाले, बिगाड़ पैदा करने वाले।
  • لَا يَشْعُرُونَ: उन्हें इसका एहसास नहीं होता, वे जानते नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के हाल से पर्दा उठाते हुए फ़रमाता है कि सुन लो! यक़ीनन यही लोग असली फ़सादी हैं। ये जो कुछ कर रहे हैं — ईमान वालों का मज़ाक़ उड़ाना, उन्हें रास्ते से रोकना, और अपने दिलों में कुफ़्र छिपाए रखना — यह सब खुला फ़साद है। लेकिन इनकी नादानी और हठधर्मी की वजह से इन्हें इस बात का एहसास तक नहीं होता कि ये जिसे "इस्लाह" (सुधार) समझ रहे हैं, वह दरअसल ज़मीन पर सबसे बड़ा फ़साद है। ये अपने अंदर के कुफ़्र और बुराई को सच्चाई और भलाई समझते हैं, इसलिए इन्हें अपनी ग़लती का शऊर (एहसास) नहीं होता।

फ़ायदे (सबक़):

  1. इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान का अपने आप को सही समझना ही सबसे बड़ी धोखे की बात है। इंसान को चाहिए कि वह अपने अमल की जाँच कुरआन और सुन्नत की रोशनी में करता रहे, क्योंकि शैतान इंसान को बुराई को भलाई के रूप में दिखाता है।
  2. यह आयत हमें सच्चाई को पहचानने की तरफ़ बुलाती है — कि हम अपनी राय और अपने नफ़्स की बात को सच्चाई पर हावी न होने दें। जो लोग अपनी ज़िद और हठ पर अड़े रहते हैं, वे अक्सर सच्चाई को देखते हुए भी नहीं देख पाते।
  3. इससे हमें यह भी पता चलता है कि फ़साद सिर्फ़ ज़मीन पर लड़ाई-झगड़ा नहीं है, बल्कि लोगों को अल्लाह के दीन से रोकना, ईमान वालों को बदनाम करना और सच्चाई को छिपाना भी बड़ा फ़साद है। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई, ईमानदारी और अल्लाह के दीन की ख़िदमत को अपना निशाना बनाना चाहिए।
  4. यह आयत मुनाफ़िक़ों के हाल से आगाह करती है ताकि मुसलमान उनके हथकंडों से बचे रहें और उनकी बातों पर भरोसा न करें। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपने दिल को साफ़ रखें और अल्लाह से माँगते रहें कि वह हमें सच्चाई को सच्चाई और झूठ को झूठ दिखाए।


📜 आयत 10-14 — सूरा अल-बकरा

10فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَهُمُ اللَّهُ مَرَضًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ
उनके दिलों में मर्ज़ था ही अब खुदा ने उनके मर्ज़ को और बढ़ा दिया और चूँकि वह लोग झूठ बोला करते थे इसलिए उन पर तकलीफ देह अज़ाब है
11وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ قَالُوا إِنَّمَا نَحْنُ مُصْلِحُونَ
और जब उनसे कहा जाता है कि मुल्क में फसाद न करते फिरो (तो) कहते हैं कि हम तो सिर्फ इसलाह करते हैं
12أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْمُفْسِدُونَ وَلَٰكِن لَّا يَشْعُرُونَ
ख़बरदार हो जाओ बेशक यही लोग फसादी हैं लेकिन समझते नहीं
13وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ آمِنُوا كَمَا آمَنَ النَّاسُ قَالُوا أَنُؤْمِنُ كَمَا آمَنَ السُّفَهَاءُ ۗ أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ السُّفَهَاءُ وَلَٰكِن لَّا يَعْلَمُونَ
और जब उनसे कहा जाता है कि जिस तरह और लोग ईमान लाए हैं तुम भी ईमान लाओ तो कहते हैं क्या हम भी उसी तरह ईमान लाएँ जिस तरह और बेवकूफ़ लोग ईमान लाएँ, ख़बरदार हो जाओ लोग बेवक़ूफ़ हैं लेकिन नहीं जानते
14وَإِذَا لَقُوا الَّذِينَ آمَنُوا قَالُوا آمَنَّا وَإِذَا خَلَوْا إِلَىٰ شَيَاطِينِهِمْ قَالُوا إِنَّا مَعَكُمْ إِنَّمَا نَحْنُ مُسْتَهْزِئُونَ
और जब उन लोगों से मिलते हैं जो ईमान ला चुके तो कहते हैं हम तो ईमान ला चुके और जब अपने शैतानों के साथ तनहा रह जाते हैं तो कहते हैं हम तुम्हारे साथ हैं हम तो (मुसलमानों को) बनाते हैं
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अल-बकरा 12

सूरा अल-बकरा आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़बरदार हो जाओ बेशक यही लोग फसादी हैं लेकिन समझते…

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Monday, September 28, 2026

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