अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَلَا: यह एक चेतावनी और सावधान करने वाला शब्द है, जिससे सुनने वाले का ध्यान आकर्षित किया जाता है।
- الْمُفْسِدُونَ: फ़साद करने वाले, बिगाड़ पैदा करने वाले।
- لَا يَشْعُرُونَ: उन्हें इसका एहसास नहीं होता, वे जानते नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के हाल से पर्दा उठाते हुए फ़रमाता है कि सुन लो! यक़ीनन यही लोग असली फ़सादी हैं। ये जो कुछ कर रहे हैं — ईमान वालों का मज़ाक़ उड़ाना, उन्हें रास्ते से रोकना, और अपने दिलों में कुफ़्र छिपाए रखना — यह सब खुला फ़साद है। लेकिन इनकी नादानी और हठधर्मी की वजह से इन्हें इस बात का एहसास तक नहीं होता कि ये जिसे "इस्लाह" (सुधार) समझ रहे हैं, वह दरअसल ज़मीन पर सबसे बड़ा फ़साद है। ये अपने अंदर के कुफ़्र और बुराई को सच्चाई और भलाई समझते हैं, इसलिए इन्हें अपनी ग़लती का शऊर (एहसास) नहीं होता।
फ़ायदे (सबक़):
- इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान का अपने आप को सही समझना ही सबसे बड़ी धोखे की बात है। इंसान को चाहिए कि वह अपने अमल की जाँच कुरआन और सुन्नत की रोशनी में करता रहे, क्योंकि शैतान इंसान को बुराई को भलाई के रूप में दिखाता है।
- यह आयत हमें सच्चाई को पहचानने की तरफ़ बुलाती है — कि हम अपनी राय और अपने नफ़्स की बात को सच्चाई पर हावी न होने दें। जो लोग अपनी ज़िद और हठ पर अड़े रहते हैं, वे अक्सर सच्चाई को देखते हुए भी नहीं देख पाते।
- इससे हमें यह भी पता चलता है कि फ़साद सिर्फ़ ज़मीन पर लड़ाई-झगड़ा नहीं है, बल्कि लोगों को अल्लाह के दीन से रोकना, ईमान वालों को बदनाम करना और सच्चाई को छिपाना भी बड़ा फ़साद है। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई, ईमानदारी और अल्लाह के दीन की ख़िदमत को अपना निशाना बनाना चाहिए।
- यह आयत मुनाफ़िक़ों के हाल से आगाह करती है ताकि मुसलमान उनके हथकंडों से बचे रहें और उनकी बातों पर भरोसा न करें। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपने दिल को साफ़ रखें और अल्लाह से माँगते रहें कि वह हमें सच्चाई को सच्चाई और झूठ को झूठ दिखाए।
📜 आयत 10-14 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 12
सूरा अल-बकरा आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़बरदार हो जाओ बेशक यही लोग फसादी हैं लेकिन समझते…सूरा आयत 12/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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