अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا تُفْسِدُوا: फ़साद मत करो, यानी ज़मीन में बिगाड़ पैदा मत करो।
- مُصْلِحُونَ: सुधार करने वाले, इस्लाह करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) या अहले-किताब (यहूदियों) से कहा जाता है कि ज़मीन में फ़साद मत फैलाओ — यानी कुफ़्र और गुनाहों के ज़रिए लोगों को ईमान और सच्चाई के रास्ते से रोको मत, मोमिनों के राज़ दुश्मनों तक मत पहुँचाओ, और काफ़िरों से दोस्ती मत करो — तो वे झूठ और हठधर्मी से कहते हैं: "हम तो सिर्फ़ इस्लाह (सुधार) करने वाले हैं।" यानी वे अपने फ़सादी कामों को सुधार और भलाई का नाम देकर सही ठहराने की कोशिश करते हैं, जबकि हक़ीक़त में उनका काम पूरी तरह फ़साद और बिगाड़ है। वे अपने इस झूठे दावे से लोगों को धोखा देना चाहते हैं, जैसे वे "हम ईमान लाए" कहकर झूठ बोलते हैं।
फ़ायदे (सबक़):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि बुराई और फ़साद को कभी भी अच्छाई और सुधार के नाम से पेश नहीं करना चाहिए। अल्लाह के नज़दीक वही काम नेक है जो उसकी रज़ा के मुताबिक़ हो, न कि जो इंसान अपनी मर्ज़ी से अच्छा समझ ले।
- मुनाफ़िक़ों की पहचान यह है कि वे अपने गलत कामों को सही ठहराने के लिए झूठे दावे करते हैं। हमें चाहिए कि हम अपने अमल की हक़ीक़त को परखें और दिखावे से बचें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम किसी को बुराई से रोकें, तो उसका तरीक़ा नर्म और हिकमत वाला हो, और जब हमें कोई नसीहत दे, तो उसे ग़ौर से सुनें और अपने अमल की जाँच करें।
- इस्लाम सिखाता है कि ज़मीन में अमन और सुधार अल्लाह को बहुत पसंद है, और फ़साद व बिगाड़ से बचना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 9-13 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 11
सूरा अल-बकरा आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उनसे कहा जाता है कि मुल्क में फसाद…सूरा आयत 11/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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