Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तलक़्क़ा (تَلَقَّى): ग्रहण करना, स्वीकार करना, सीख लेना।
- कलिमात (كَلِمَات): वचन, बातें — यहाँ पर वे दुआएँ और शब्द जो अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को सिखाए।
- फ़ताबा अलैह (فَتَابَ عَلَيْهِ): अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल की और उन पर रहमत से मुड़ा।
- अत-तव्वाब (التَّوَّاب): बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला।
- अर-रहीम (الرَّحِيم): बहुत दयालु, असीम रहमत वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब आदम (अलैहिस्सलाम) ने भूल से उस पेड़ का फल खाया और अल्लाह की नाराज़गी का सामना किया, तो अल्लाह ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। उसी दरवाज़े से रहमत का रास्ता भी खोला। अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को कुछ ख़ास कलिमात (शब्द) सिखाए — यानी उन्हें तौबा करने का तरीक़ा सिखाया। वे कलिमात ये थे: "रब्बना ज़लमना अन्फ़ुसना..." यानी *"ऐ हमारे रब! हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया, और अगर तूने हमें माफ़ नहीं किया और हम पर रहम नहीं किया, तो हम ज़रूर नुक़सान उठाने वालों में से होंगे।"* (सूरह अल-आराफ़: 23)
आदम (अलैहिस्सलाम) ने इन शब्दों को पूरे दिल से, समझ और फ़ितरत के साथ ग्रहण किया, और अपने रब के सामने झुककर तौबा की। अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल की, उनके गुनाह को माफ़ कर दिया और उन पर अपनी रहमत का साया डाल दिया। यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि वह गुनाह करने वाले बंदे को भी माफ़ी का रास्ता दिखाता है, और जब बंदा सच्चे दिल से लौटता है, तो अल्लाह उसे खुशी-खुशी क़बूल करता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। चाहे गुनाह कितना भी बड़ा हो, अल्लाह की रहमत उससे कहीं बड़ी है। आदम (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी ने भी जब भूल की, तो उन्होंने तौबा की — और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया। तो हम जैसे आम इंसानों को कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह "अत-तव्वाब" है — यानी वह बार-बार तौबा क़बूल करने वाला है। जब भी हमसे कोई गुनाह हो जाए, तो हमें तुरंत अल्लाह की तरफ़ मुड़ना चाहिए, उससे माफ़ी माँगनी चाहिए और पक्का इरादा करना चाहिए कि आगे नहीं दोहराएँगे। अल्लाह की रहमत कभी निराश नहीं करती — बस ज़रूरत है सच्चे दिल से लौटने की। यही इस आयत का सबसे बड़ा पैग़ाम है: "निराशा नहीं, तौबा ही रास्ता है।"
📜 आयत 35-39 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 37
सूरा अल-बकरा आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर आदम ने अपने परवरदिगार से (माज़रत के चन्द अल्फाज़)…सूरा आयत 37/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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