अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ظَلَّلْنَا: हमने छाया की
- الْغَمَامَ: बादल
- الْمَنَّ: एक मीठा पदार्थ जो शहद जैसा होता था (यह पेड़ों पर ओस की तरह जम जाता था)
- السَّلْوَى: बटेर पक्षी (एक छोटा पक्षी जिसका मांस स्वादिष्ट होता है)
- طَيِّبَاتِ: पवित्र एवं उत्तम चीज़ें
- ظَلَمُونَا: हम पर अत्याचार किया
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने बनी इसराईल पर अपनी महान नेमतों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि जब वे तिह (सीना) नामक मैदान में भटक रहे थे, तो अल्लाह ने उन पर बादलों की छाया कर दी, जो उन्हें सूरज की तपिश से बचाती थी। यह उनके लिए एक अद्भुत रहमत थी कि बिना किसी साधन के उन्हें छाया मिलती रही।
इसके अलावा, अल्लाह ने उन पर "मन्न" (एक मीठा पदार्थ जो शहद जैसा था) और "सलवा" (बटेर पक्षी) उतारा। यानी उन्हें ऊपर से खाने की दो चीज़ें मिलती थीं—एक मीठा पदार्थ और एक स्वादिष्ट पक्षी का मांस। यह उनके लिए पूर्ण भोजन था जो बिना किसी मेहनत के मिलता था।
अल्लाह ने उनसे कहा: "खाओ उन पवित्र और उत्तम चीज़ों में से जो हमने तुम्हें दी हैं।" यानी इन नेमतों का शुक्र अदा करो और इन्हें हलाल समझकर खाओ, और अल्लाह के हुक्म की नाफ़रमानी न करो।
लेकिन बनी इसराईल ने इन नेमतों का शुक्र नहीं किया, बल्कि नाफ़रमानी की और अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना की। अल्लाह फ़रमाता है कि उन्होंने हमारा कुछ नुक़सान नहीं किया, क्योंकि अल्लाह तो बेनियाज़ है और उसे किसी की इबादत से कोई फ़ायदा नहीं, न किसी की नाफ़रमानी से कोई नुक़सान। बल्कि उन्होंने खुद अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म किया, क्योंकि उनके कुकर्मों का अंजाम उन्हीं को भुगतना था—आख़िरत में अज़ाब और दुनिया में रुसवाई।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं और वह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है। जब बंदे मुसीबत में होते हैं, तो अल्लाह उन्हें राहत पहुँचाने के लिए ऐसे ज़रिए पैदा करता है जिनका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता।
- अल्लाह की नेमतों का सही उपयोग यह है कि उनका शुक्र अदा किया जाए और उन्हें हलाल तरीके से इस्तेमाल किया जाए। नेमतों की नाशुक्री इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देती है।
- इंसान का ज़ुल्म और नाफ़रमानी अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, बल्कि उसका नुक़सान खुद इंसान को ही होता है। यह अल्लाह की रहमत और करम की दलील है कि वह अपने बंदों की भलाई चाहता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि मुश्किल वक़्त में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से उम्मीद न खोएँ। अल्लाह हर मुसीबत में राहत का रास्ता निकालता है।
- नेमतों की क़द्र करना और उन्हें अल्लाह की तरफ से समझना इंसान के ईमान की निशानी है, और नाशुक्री इंसान को अल्लाह की नेमतों से महरूम कर देती है।
📜 आयत 55-59 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 57
सूरा अल-बकरा आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तुम पर अब्र का साया किया और तुम…सूरा आयत 57/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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