अल-बकरा · 56/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
ثُمَّ بَعَثْنَاكُم مِّن بَعْدِ مَوْتِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝٥٦
Summa ba`asnaakum mim ba`di mawtikum la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
फिर तुम्हें तुम्हारे मरने के बाद हमने जिला उठाया ताकि तुम शुक्र करो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بَعَثْنَاكُمْ: हमने तुम्हें जीवित किया, उठाया।
  • مِن بَعْدِ مَوْتِكُمْ: तुम्हारी मृत्यु के पश्चात् (यहाँ मृत्यु से तात्पर्य बिजली गिरने से हुई मृत्यु या बेहोशी की हालत से है)।
  • تَشْكُرُونَ: तुम कृतज्ञता व्यक्त करो, अर्थात् अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने बनी इस्राईल को याद दिलाई कि जब उन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा कि "हम अल्लाह को खुल्लम-खुल्ला नहीं देख सकते जब तक कि वह हमें दिखाई न दे," तो उनके इस अवज्ञाकारी और साहसिक अनुरोध के कारण उन पर बिजली गिरी और वे मर गए या बेहोश हो गए। यह उनकी सज़ा थी। फिर अल्लाह ने अपनी दया और कृपा से उन्हें उस मौत या बेहोशी के बाद दोबारा जीवित किया (यानी उन्हें होश में लाया और उनकी जान लौटाई) ताकि वे अपनी बाकी मुद्दत (आयु) और रोज़ी पूरी कर सकें। यह पुनर्जीवन उनके लिए एक बड़ी नेमत थी, और इसका मक़सद यह था कि वे अल्लाह की इस कृपा पर शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में लगे रहें। यह घटना उन्हें सबक़ सिखाती है कि अल्लाह की शान के बारे में ज़्यादा सवाल-जवाब न करें और अपने नबी की बात मानें।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) असीम है; वह मौत के बाद जीवन देने पर पूरी तरह क़ादिर है, जैसा कि उसने बनी इस्राईल के साथ किया। यह हमें आख़िरत (पुनरुत्थान) के दिन पर ईमान लाने की ताक़त देता है।
  2. अल्लाह की सज़ा के बाद उसकी रहमत (दया) आती है; जब बंदा अपनी ग़लती पर पछताता है, तो अल्लाह उसे माफ़ करके दोबारा जीवन और अवसर देता है। यह हमें तौबा (पश्चाताप) की ओर प्रेरित करता है।
  3. शुक्र (कृतज्ञता) अल्लाह की नेमतों को बढ़ाने का ज़रिया है। जब अल्लाह हमें किसी मुसीबत से निकालता है, तो हमें चाहिए कि उसका शुक्र अदा करें, न कि उसकी नेमतों को भूल जाएँ।
  4. यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों के सामने अपनी अक़्ल और ज़िद को नहीं चलाना चाहिए; सब्र और इताअत (आज्ञापालन) में ही भलाई है।
  5. अल्लाह की हर नेमत का एक मक़सद होता है — वह हमें परखता है कि हम शुक्र करते हैं या नाशुक्री। इसलिए हर हाल में अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — अल-बकरा

54وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِاتِّخَاذِكُمُ الْعِجْلَ فَتُوبُوا إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَاقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۚ إِنَّهُ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ऐ मेरी क़ौम तुमने बछड़े को (ख़ुदा) बना के अपने ऊपर बड़ा सख्त जुल्म किया तो अब (इसके सिवा कोई चारा नहीं कि) तुम अपने ख़ालिक की बारगाह में तौबा करो और वह ये है कि अपने को क़त्ल कर डालो तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है, फिर जब तुमने ऐसा किया तो खुदा ने तुम्हारी तौबा क़ुबूल कर ली बेशक वह बड़ा मेहरबान माफ़ करने वाला है
55وَإِذْ قُلْتُمْ يَا مُوسَىٰ لَن نُّؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى اللَّهَ جَهْرَةً فَأَخَذَتْكُمُ الصَّاعِقَةُ وَأَنتُمْ تَنظُرُونَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से कहा था कि ऐ मूसा हम तुम पर उस वक्त तक ईमान न लाएँगे जब तक हम खुदा को ज़ाहिर बज़ाहिर न देख ले उस पर तुम्हें बिजली ने ले डाला, और तुम तकते ही रह गए
56ثُمَّ بَعَثْنَاكُم مِّن بَعْدِ مَوْتِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
फिर तुम्हें तुम्हारे मरने के बाद हमने जिला उठाया ताकि तुम शुक्र करो
57وَظَلَّلْنَا عَلَيْكُمُ الْغَمَامَ وَأَنزَلْنَا عَلَيْكُمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰ ۖ كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ ۖ وَمَا ظَلَمُونَا وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
और हमने तुम पर अब्र का साया किया और तुम पर मन व सलवा उतारा और (ये भी तो कह दिया था कि) जो सुथरी व नफीस रोज़िया तुम्हें दी हैं उन्हें शौक़ से खाओ, और उन लोगों ने हमारा तो कुछ बिगड़ा नहीं मगर अपनी जानों पर सितम ढाते रहे
58وَإِذْ قُلْنَا ادْخُلُوا هَٰذِهِ الْقَرْيَةَ فَكُلُوا مِنْهَا حَيْثُ شِئْتُمْ رَغَدًا وَادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا وَقُولُوا حِطَّةٌ نَّغْفِرْ لَكُمْ خَطَايَاكُمْ ۚ وَسَنَزِيدُ الْمُحْسِنِينَ
और (वह वक्त भी याद करो) जब हमने तुमसे कहा कि इस गाँव (अरीहा) में जाओ और इसमें जहाँ चाहो फराग़त से खाओ (पियो) और दरवाज़े पर सजदा करते हुए और ज़बान से हित्ता बख्शिश कहते हुए आओ तो हम तुम्हारी ख़ता ये बख्श देगे और हम नेकी करने वालों की नेकी (सवाब) बढ़ा देगें
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अनुवाद — अल-बकरा 56

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Tuesday, August 18, 2026

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