ताहा · 55/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
۞ مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ ۝٥٥
Minhaa khalaqnaakum wa feehaa nu`eedukum wa minhaa nukhrijukum taaratan ukhraa
📖 हिंदी अर्थ
हमने इसी ज़मीन से तुम को पैदा किया और (मरने के बाद) इसमें लौटा कर लाएँगे और उसी से दूसरी बार (क़यामत के दिन) तुमको निकाल खड़ा करेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مِنْهَا – उसी (ज़मीन) से
  • خَلَقْنَاكُمْ – हमने तुम्हें पैदा किया
  • نُعِيدُكُمْ – हम तुम्हें लौटाएँगे
  • نُخْرِجُكُمْ – हम तुम्हें निकालेंगे
  • تَارَةً أُخْرَى – एक और बार (दूसरी बार)

तफ़सीर:

ऐ लोगों! अल्लाह तआला तुम्हें याद दिला रहा है कि तुम्हारी पैदाइश की शुरुआत कैसे हुई। उसी ज़मीन से, जिस पर तुम चलते हो, जिसमें तुम बोते हो और जिससे तुम्हारा रिज़्क़ निकलता है — उसी मिट्टी से अल्लाह ने तुम्हारे पहले बाप आदम (अलैहिस्सलाम) को पैदा किया। और चूँकि तुम सब आदम की औलाद हो, इसलिए तुम्हारी असल जड़ भी मिट्टी ही है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और उसी में हम तुम्हें लौटाएँगे।" यानी जब तुम्हारी मौत आएगी, तो तुम्हें उसी ज़मीन में दफ़न किया जाएगा। तुम्हारा शरीर मिट्टी में मिल जाएगा और वही तुम्हारी आख़िरी मंज़िल होगी। ये कोई बुरी ख़बर नहीं, बल्कि ये अल्लाह की क़ुदरत का एक क़ानून है — जिस तरह इंसान मिट्टी से बना, उसी तरह उसे मिट्टी में वापस जाना है।

और फिर सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी — "और उसी से हम तुम्हें एक और बार निकालेंगे।" यानी क़यामत के दिन अल्लाह तुम्हें फिर से ज़िंदा करके उसी ज़मीन से निकालेगा, जैसे उसने पहली बार पैदा किया था। ये उस अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है जिसने पहली बार पैदा किया। जो पहली बार पैदा कर सकता है, वो दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

इस आयत में अल्लाह ने इंसान की कहानी को तीन मरहलों में बयान किया है — पैदाइश, मौत और दोबारा उठना। ये तीनों मरहले अल्लाह के इख़्तियार में हैं। ये आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का कोई आख़िरी अंजाम नहीं है, बल्कि मौत के बाद एक और ज़िंदगी है जहाँ हमें अपने आमाल का हिसाब देना है। इसलिए हमें चाहिए कि इस ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत करें, उसके हुक्मों पर चलें और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हम क़ब्रों से उठकर अपने रब के सामने हाज़िर होंगे।

ये आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है और यक़ीन दिलाती है कि मौत के बाद की ज़िंदगी हक़ है। जो इंसान इस हक़ीक़त को समझ ले, वो अपनी ज़िंदगी को बेकार नहीं गँवाता, बल्कि उसे अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारता है। अल्लाह हम सबको इस हक़ीक़त को समझने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 53-57 — सूरा ताहा

53الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ مَهْدًا وَسَلَكَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا وَأَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّن نَّبَاتٍ شَتَّىٰ
वह वही है जिसने तुम्हारे (फ़ायदे के) वास्ते ज़मीन को बिछौना बनाया और तुम्हारे लिए उसमें राहें निकाली और उसी ने आसमान से पानी बरसाया फिर (खुदा फरमाता है कि) हम ही ने उस पानी के ज़रिए से मुख्तलिफ़ क़िस्मों की घासे निकाली
54كُلُوا وَارْعَوْا أَنْعَامَكُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ
(ताकि) तुम खुद भी खाओ और अपने चारपायों को भी चराओ कुछ शक नहीं कि इसमें अक्लमन्दों के वास्ते (क़ुदरते खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
55۞ مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
हमने इसी ज़मीन से तुम को पैदा किया और (मरने के बाद) इसमें लौटा कर लाएँगे और उसी से दूसरी बार (क़यामत के दिन) तुमको निकाल खड़ा करेंगे
56وَلَقَدْ أَرَيْنَاهُ آيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ
और मैंने फिरऔन को अपनी सारी निशानियाँ दिखा दी
57قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسَىٰ
इस पर भी उसने सबको झुठला दिया और न माना (और) कहने लगा ऐ मूसा क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — ताहा 55

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सूरा आयत 55/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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