ताहा · 54/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
كُلُوا وَارْعَوْا أَنْعَامَكُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ ۝٥٤
Kuloo war`aw an`aamakum; inna fee zaalika la Aayaatil li ulin nuhaa
📖 हिंदी अर्थ
(ताकि) तुम खुद भी खाओ और अपने चारपायों को भी चराओ कुछ शक नहीं कि इसमें अक्लमन्दों के वास्ते (क़ुदरते खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كُلُوا (खाओ) – यहाँ अर्थ है, पृथ्वी से उगाई गई अच्छी-अच्छी चीज़ों में से खाओ।
  • وَارْعَوْا (और चराओ) – अर्थात अपने जानवरों को इन पौधों पर चरने दो।
  • أَنْعَامَكُمْ (अपने चौपायों) – ऊँट, गाय, बकरी आदि पशु।
  • لَآيَاتٍ (निश्चय ही निशानियाँ हैं) – अल्लाह की क़ुदरत और वहदानियत की दलीलें।
  • لِأُولِي النُّهَىٰ (बुद्धि वालों के लिए) – उन लोगों के लिए जो अक्ल और समझ रखते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी असीम रहमत और क़ुदरत का ज़िक्र करते हुए इंसानों को खिताब किया है। वह फ़रमाता है कि ऐ लोगो! उन पाक और अच्छी चीज़ों में से खाओ जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से उगाई हैं, और अपने जानवरों को भी इन्हीं पौधों पर चराओ। यानी अल्लाह ने यह सब कुछ तुम्हारे लिए ही पैदा किया है—न सिर्फ़ तुम्हारे खाने के लिए, बल्कि तुम्हारे पशुओं के चारे के लिए भी। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने ज़मीन से तरह-तरह की फ़सलें, फल, अनाज और हरियाली निकाली, ताकि इंसान और जानवर दोनों की गुज़र-बसर हो सके।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "इसमें बुद्धि वालों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं।" यानी जो लोग अक्ल और समझ रखते हैं, वे इन चीज़ों को देखकर अल्लाह की क़ुदरत, उसकी वहदानियत और उसकी रहमत पर ग़ौर करते हैं। जब वे देखते हैं कि एक छोटा-सा बीज ज़मीन में डाला जाता है, फिर अल्लाह उससे तरह-तरह के फल, अनाज और पौधे उगाता है, तो उन्हें यक़ीन हो जाता है कि यह सब किसी बड़े कारीगर का काम है। यह कोई आप-से-आप नहीं हो गया। यही चीज़ें उन्हें अल्लाह की तरफ़ ले जाती हैं और उसकी इबादत के लिए मजबूर करती हैं।

इस आयत में एक बड़ी सीख है कि इंसान को अपनी रोज़ी में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि यह सब अल्लाह की देन है। जो लोग इन नेअमतों को देखकर अल्लाह को याद करते हैं और उसकी इबादत करते हैं, वही असली बुद्धिमान हैं। और जो लोग इन सब चीज़ों को देखकर भी अल्लाह को भूल जाते हैं, वे अक्ल से काम नहीं लेते।

प्यारे भाइयो और बहनो! जब आप अपने सामने हरियाली, फल और अनाज देखें, तो एक पल के लिए रुककर सोचें—यह सब किसने पैदा किया? यही सोच इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसकी मोहब्बत को दिल में बढ़ाती है। अल्लाह ने यह सब कुछ हमारे लिए पैदा किया है, तो क्या हमें उसका शुक्र नहीं अदा करना चाहिए? क्या हमें उसकी इबादत नहीं करनी चाहिए? यही तो असली कामयाबी है कि इंसान अपने रब को पहचाने और उसकी बताई हुई राह पर चले।



📜 आयत 52-56 — सूरा ताहा

52قَالَ عِلْمُهَا عِندَ رَبِّي فِي كِتَابٍ ۖ لَّا يَضِلُّ رَبِّي وَلَا يَنسَى
मूसा ने कहा इन बातों का इल्म मेरे परवरदिगार के पास एक किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है मेरा परवरदिगार न बहकता है न भूलता है
53الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ مَهْدًا وَسَلَكَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا وَأَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّن نَّبَاتٍ شَتَّىٰ
वह वही है जिसने तुम्हारे (फ़ायदे के) वास्ते ज़मीन को बिछौना बनाया और तुम्हारे लिए उसमें राहें निकाली और उसी ने आसमान से पानी बरसाया फिर (खुदा फरमाता है कि) हम ही ने उस पानी के ज़रिए से मुख्तलिफ़ क़िस्मों की घासे निकाली
54كُلُوا وَارْعَوْا أَنْعَامَكُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ
(ताकि) तुम खुद भी खाओ और अपने चारपायों को भी चराओ कुछ शक नहीं कि इसमें अक्लमन्दों के वास्ते (क़ुदरते खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
55۞ مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
हमने इसी ज़मीन से तुम को पैदा किया और (मरने के बाद) इसमें लौटा कर लाएँगे और उसी से दूसरी बार (क़यामत के दिन) तुमको निकाल खड़ा करेंगे
56وَلَقَدْ أَرَيْنَاهُ آيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ
और मैंने फिरऔन को अपनी सारी निशानियाँ दिखा दी
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
54आयत

अनुवाद — ताहा 54

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Saturday, October 3, 2026

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