ताहा · 56/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَلَقَدْ أَرَيْنَاهُ آيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ ۝٥٦
Wa laqad arainaahu Aayaatinaa kullahaa fakaz zaba wa abaa
📖 हिंदी अर्थ
और मैंने फिरऔन को अपनी सारी निशानियाँ दिखा दी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتِنَا: हमारी निशानियाँ और प्रमाण (चमत्कार)।
  • فَكَذَّبَ: तो उसने झुठलाया।
  • وَأَبَىٰ: और उसने इनकार किया, (सत्य को स्वीकार करने से) मना कर दिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने फ़िरऔन को अपनी सारी निशानियाँ दिखाईं — वे नौ चमत्कार जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के हाथों पर प्रकट हुए, जैसे लाठी का अजगर बनना, हाथ का चमकना, सूखा, अकाल, फसलों का नष्ट होना, टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक और खून। ये सभी अल्लाह की क़ुदरत और एकता के स्पष्ट प्रमाण थे, जो फ़िरऔन की आँखों के सामने आए। लेकिन इन सबको देखने के बाद भी उसने इन्हें झुठलाया और हठधर्मी पर अड़ा रहा। उसने न केवल इन निशानियों को नकारा, बल्कि अल्लाह के दीन (इस्लाम) को क़बूल करने से भी इनकार कर दिया। उसका दिल सत्य के लिए बंद था, और उसका अहंकार उसे रास्ते पर आने से रोक रहा था।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियाँ हर जगह मौजूद हैं — आसमान, ज़मीन, हमारे अपने शरीर और हर पल के हालात में। लेकिन जिस दिल में घमंड और हठ हो, वह सबसे बड़े चमत्कारों को देखकर भी अंधा रहता है। फ़िरऔन का अंजाम हमारे लिए एक सबक़ है कि सत्य को स्वीकार करने में देरी न करें। जब सत्य आपके सामने आए, तो उसे खुले दिल से क़बूल करें, क्योंकि अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो हक़ के आगे झुक जाते हैं। याद रखें, अल्लाह की निशानियाँ सिर्फ़ देखने के लिए नहीं, बल्कि उनसे सीखने और अपनी ज़िंदगी बदलने के लिए आती हैं। जो व्यक्ति इन निशानियों से सबक़ लेता है, वही सच्चा कामयाब है।

🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — ताहा

54كُلُوا وَارْعَوْا أَنْعَامَكُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ
(ताकि) तुम खुद भी खाओ और अपने चारपायों को भी चराओ कुछ शक नहीं कि इसमें अक्लमन्दों के वास्ते (क़ुदरते खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
55۞ مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
हमने इसी ज़मीन से तुम को पैदा किया और (मरने के बाद) इसमें लौटा कर लाएँगे और उसी से दूसरी बार (क़यामत के दिन) तुमको निकाल खड़ा करेंगे
56وَلَقَدْ أَرَيْنَاهُ آيَاتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ
और मैंने फिरऔन को अपनी सारी निशानियाँ दिखा दी
57قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَا مُوسَىٰ
इस पर भी उसने सबको झुठला दिया और न माना (और) कहने लगा ऐ मूसा क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो
58فَلَنَأْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِّثْلِهِ فَاجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَّا نُخْلِفُهُ نَحْنُ وَلَا أَنتَ مَكَانًا سُوًى
कि हम को हमारे मुल्क (मिस्र से) अपने जादू के ज़ोर से निकाल बाहर करो अच्छा तो (रहो) हम भी तुम्हारे सामने ऐसा जादू पेश करते हैं फिर तुम अपने और हमारे दरमियान एक वक्त मुक़र्रर करो कि न हम उसके ख़िलाफ करे और न तुम और मुक़ाबला एक साफ़ खुले मैदान में हो
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अनुवाद — ताहा 56

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सूरा आयत 56/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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