अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मुजरिमन (مجرمًا): अपराधी, अर्थात वह व्यक्ति जिसने कुफ्र और शिर्क के अपराध किए हों। यहाँ इसका अर्थ है काफिर और मुशरिक।
- ला यमूतु फ़ीहा (لا يموت فيها): उसमें मृत्यु नहीं आएगी, अर्थात वह मरकर आराम नहीं पा सकेगा।
- वला यह्या (ولا يحيى): और न ही वह ऐसी ज़िंदगी जिएगा जिसमें उसे कोई सुख या लाभ मिले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में एक अत्यंत गंभीर और भयावह सत्य को स्पष्ट कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि जो व्यक्ति अपने रब के समक्ष उस हालत में हाज़िर होगा कि वह मुजरिम हो — यानी कुफ्र और शिर्क का अपराधी हो, अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराने वाला हो — तो उसका ठिकाना जहन्नम (नर्क) है। यह कोई साधारण सज़ा नहीं, बल्कि ऐसी सज़ा है जिसमें न मौत आती है और न ही ज़िंदगी का कोई सुख।
ग़ौर फ़रमाइए! इस आयत में अल्लाह ने जहन्नम की सज़ा को इस तरह बयान किया है कि वहाँ का अज़ाब न तो मौत के साथ ख़त्म होता है और न ही ज़िंदगी के साथ कोई राहत मिलती है। यानी वहाँ का निवासी न तो मरता है कि अज़ाब से छुटकारा पा जाए, और न ही उसे वह ज़िंदगी मिलती है जिसमें वह किसी तरह का सुख या आराम महसूस कर सके। यह एक ऐसी हालत है जो हर तरह की राहत से कटी हुई है — न मौत की राहत, न ज़िंदगी का लुत्फ़।
यह आयत हमें अल्लाह के दीन की ओर लौटने की दावत देती है। यह हमें चेतावनी देती है कि कुफ्र और शिर्क का अंजाम कितना भयानक है। लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है — जो कोई भी इस हालत से तौबा करके अल्लाह की ओर लौटेगा, अल्लाह उसे माफ़ करने के लिए तैयार है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी ज़िंदगी का मक़सद क्या है? क्या हम सिर्फ़ इस दुनिया की ख्वाहिशों में डूबे रहें, या फिर उस दिन की तैयारी करें जब हमें अपने रब के सामने खड़ा होना है? अल्लाह ने हमें इतनी बड़ी नेमत दी है — ईमान, इस्लाम, और क़ुरआन — कि हम उसके शुक्र अदा करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाएं।
याद रखिए, अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसी' है। जो शख्स भी अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ़ रुजू' करता है, अल्लाह उसे गले लगाता है और उसके गुनाह माफ़ कर देता है। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाता है। अल्लाह हम सबको इस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 72-76 — ताहा
अनुवाद — ताहा 74
सूरा ताहा आयत 74 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (उसी को) सबसे ज्यादा क़याम है इसमें शक नहीं…सूरा आयत 74/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 72–76. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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