अल-अंबिया · 107/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِّلْعَالَمِينَ ۝١٠٧
Wa maaa arsalnaaka illaa rahmatal lil`aalameen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको सारे दुनिया जहाँन के लोगों के हक़ में अज़सरतापा रहमत बनाकर भेजा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَحْمَةً — रहमत, दया, करुणा
  • لِلْعَالَمِينَ — सारे संसारों के लिए, समस्त मनुष्यों और जिन्नों के लिए

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपको इसलिए नहीं भेजा कि आप केवल किसी एक क़ौम या एक ज़माने के लिए हों, बल्कि हमने आपको सारे जहानों के लिए रहमत बनाकर भेजा है। यह आपकी रिसालत (पैग़म्बरी) की सबसे बड़ी विशेषता है कि आप पूरी मानवजाति और जिन्नात के लिए रहमत बनकर आए।

यह रहमत दो तरह की है — एक रहमत उन लोगों के लिए जो आप पर ईमान लाए, उन्हें दुनिया में हिदायत, सुकून और इत्मिनान मिला और आख़िरत में जन्नत की नेअमतें नसीब होंगी। दूसरी रहमत उन लोगों के लिए भी है जिन्होंने आपको नहीं माना, क्योंकि आपके आने की बरकत से उन पर अज़ाब में ताख़ीर (देरी) कर दी गई, उन्हें मौका दिया गया कि वे तौबा कर लें। पहले की उम्मतों पर जब हक़ बात पहुँचती थी और वे झुठला देते थे तो उन पर अज़ाब आ जाता था, लेकिन इस उम्मत को यह रहमत मिली कि उन पर अज़ाब में देरी की गई।

आप ﷺ की सीरत ही रहमत है — आपका अख़लाक़, आपकी शफ़क़त, आपका हलीमी और रहीमी होना, आपका उम्मत की हिदायत के लिए बेचैन रहना, यह सब आपके रहमत होने की निशानियाँ हैं। आप ﷺ ने कभी किसी से बदला नहीं लिया, दुश्मनों के लिए भी आपने दुआएँ कीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम दहशत और तशद्दुद का दीन नहीं, बल्कि रहमत और मुहब्बत का दीन है। हमें भी अपने अंदर यह सिफ़त पैदा करनी चाहिए कि हम सारे इंसानों के लिए रहमत का सबब बनें। जिस तरह नबी ﷺ सारे जहान के लिए रहमत थे, उसी तरह उनकी उम्मत को भी दुनिया के लिए रहमत बनकर आना है — अपने अख़लाक़ से, अपने सुलूक से, अपनी दुआओं से और अपनी दावत से।

यह आयत मोमिन के दिल में नबी ﷺ की मुहब्बत को और बढ़ाती है और यह एहसास दिलाती है कि हम उस रहमत के वारिस हैं जो अल्लाह ने पूरी कायनात के लिए भेजी। जो शख्स इस रहमत को क़ुबूल कर ले वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब है।

🎧 सुनें

📜 आयत 105-109 — अल-अंबिया

105وَلَقَدْ كَتَبْنَا فِي الزَّبُورِ مِن بَعْدِ الذِّكْرِ أَنَّ الْأَرْضَ يَرِثُهَا عِبَادِيَ الصَّالِحُونَ
और हमने तो नसीहत (तौरेत) के बाद यक़ीनन जुबूर में लिख ही दिया था कि रूए ज़मीन के वारिस हमारे नेक बन्दे होंगे
106إِنَّ فِي هَٰذَا لَبَلَاغًا لِّقَوْمٍ عَابِدِينَ
इसमें शक नहीं कि इसमें इबादत करने वालों के लिए (एहकामें खुदा की) तबलीग़ है
107وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِّلْعَالَمِينَ
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको सारे दुनिया जहाँन के लोगों के हक़ में अज़सरतापा रहमत बनाकर भेजा
108قُلْ إِنَّمَا يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
तुम कह दो कि मेरे पास तो बस यही ''वही'' आई है कि तुम लोगों का माबूद बस यकता खुदा है तो क्या तुम (उसके) फरमाबरदार बन्दे बनते हो
109فَإِن تَوَلَّوْا فَقُلْ آذَنتُكُمْ عَلَىٰ سَوَاءٍ ۖ وَإِنْ أَدْرِي أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٌ مَّا تُوعَدُونَ
फिर अगर ये लोग (उस पर भी) मुँह फेरें तो तुम कह दो कि मैंने तुम सबको यकसाँ ख़बर कर दी है और मैं नहीं जानता कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वायदा किया गया है क़रीब आ पहुँचा या (अभी) दूर है
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अनुवाद — अल-अंबिया 107

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सूरा आयत 107/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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