अल-अंबिया · 14/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
قَالُوا يَا وَيْلَنَا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ ۝١٤
Qaaloo yaa wailanaaa innaa kunnaa zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे हाए हमारी शामत बेशक हम सरकश तो ज़रूर थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَا وَيْلَنَا — "हाय हमारी तबाही!" यह अरबी में अफ़सोस और पछतावे का वाक्यांश है, जो किसी बड़ी आपदा या विनाश को देखकर कहा जाता है।
  • ظَالِمِينَ — अत्याचारी, ज़ालिम, जिन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया (यहाँ कुफ़्र और गुनाह के कारण)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह का अज़ाब (यातना) उन ज़ालिमों पर आ पहुँचा, और उन्होंने अपनी आँखों से विनाश के निशान देख लिए, तो उनके पास कोई बहाना या जवाब नहीं बचा। उनकी ज़ुबान से बस यही निकला: "हाय हमारी तबाही! बेशक हम ज़ालिम थे।" यह उनका अपने गुनाहों का इक़रार (स्वीकारोक्ति) था, लेकिन यह इक़रार उस वक़्त किया गया जब उसका कोई फ़ायदा नहीं था।

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह ज़िंदगी भर अपने गुनाहों से तौबा करे और अल्लाह से माफ़ी माँगे, क्योंकि मौत या अज़ाब के आने के बाद पछतावा और इक़रार बेकार है। अल्लाह तआला रहमत वाला है, वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है, लेकिन यह तौबा उसी वक़्त क़बूल होती है जब इंसान ज़िंदा हो और अज़ाब सामने न आया हो।

यह आयत हमें चेतावनी देती है कि ज़ुल्म — चाहे वह अल्लाह के साथ शिर्क करना हो, या लोगों के हक़ मारना हो, या अपनी नफ़्स पर ज़ुल्म करना हो — आख़िरकार इंसान को पछतावे की स्थिति में ला खड़ा करता है। लेकिन अल्लाह ने हम पर यह एहसान किया है कि उसने हमें मौका दिया है, हम अभी भी ज़िंदा हैं, हम अभी भी तौबा कर सकते हैं।

तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को देखें — क्या हम किसी ज़ुल्म में मुब्तला हैं? क्या हम अपने गुनाहों से तौबा करने में देर कर रहे हैं? अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है, और वह अपने बंदों की तौबा से बहुत खुश होता है। हमें चाहिए कि हम इस मौके को ग़नीमत समझें और अपने रब की तरफ पलटें, क्योंकि क़यामत के दिन पछतावा करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अल-अंबिया

12فَلَمَّا أَحَسُّوا بَأْسَنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَرْكُضُونَ
तो जब उन लोगों ने हमारे अज़ाब की आहट पाई तो एका एकी भागने लगे
13لَا تَرْكُضُوا وَارْجِعُوا إِلَىٰ مَا أُتْرِفْتُمْ فِيهِ وَمَسَاكِنِكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْأَلُونَ
(हमने कहा) भागो नहीं और उन्हीं बस्तियों और घरों में लौट जाओ जिनमें तुम चैन करते थे ताकि तुमसे कुछ पूछगछ की जाए
14قَالُوا يَا وَيْلَنَا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ
वह लोग कहने लगे हाए हमारी शामत बेशक हम सरकश तो ज़रूर थे
15فَمَا زَالَت تِّلْكَ دَعْوَاهُمْ حَتَّىٰ جَعَلْنَاهُمْ حَصِيدًا خَامِدِينَ
ग़रज़ वह बराबर यही पड़े पुकारा किए यहाँ तक कि हमने उन्हें कटी हुई खेती की तरह बिछा के ठन्डा करके ढेर कर दिया
16وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاءَ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَاعِبِينَ
और हमने आसमान और ज़मीन को और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है बेकार लगो नहीं पैदा किया
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अनुवाद — अल-अंबिया 14

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Tuesday, August 18, 2026

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