अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَسْتَكْبِرُونَ – अभिमान नहीं करते, घमंड नहीं करते।
- عِبَادَتِهِ – उसकी इबादत (बंदगी) से।
- يَسْتَحْسِرُونَ – थकते नहीं, आजिज़ नहीं होते (यानी कभी ऊबते या थकते नहीं)।
तफसीर:
आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी है—सारा का सारा अल्लाह ही की मिल्कियत है। हर चीज़ उसी की बंदगी में लगी हुई है, चाहे वह इंसान हो, फ़रिश्ते हों, जिन्नात हों या फिर पूरी कायनात। कोई भी मख़लूक़ उसकी मिल्कियत से बाहर नहीं है। लेकिन ख़ास तौर पर अल्लाह ने अपने नज़दीकी फ़रिश्तों का ज़िक्र किया है, जो उसके अर्श के इर्द-गिर्द रहते हैं। ये फ़रिश्ते अल्लाह की इबादत में कोई कसर नहीं छोड़ते। वे न तो इबादत से अभिमान करते हैं और न ही कभी थकते-हारते हैं। उनकी इबादत में न तो कोई कमी आती है और न ही वे ऊबते हैं। वे दिन-रात बिना रुके अल्लाह की तस्बीह और इबादत में मशग़ूल रहते हैं।
यहाँ अल्लाह तआला यह बताना चाहते हैं कि जब फ़रिश्ते—जो अल्लाह के सबसे करीबी और पाक मख़लूक़ हैं—अपनी इबादत को अपने लिए इज़्ज़त समझते हैं और कभी उससे ऊबते नहीं, तो फिर इंसान को क्या हो गया है कि वह अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ता है या उसमें अभिमान करता है? क्या इंसान फ़रिश्तों से बेहतर है? हरगिज़ नहीं। इंसान तो कमज़ोर पैदा किया गया है, उसे तो अल्लाह की इबादत की सख़्त ज़रूरत है। इबादत इंसान के लिए बोझ नहीं, बल्कि रहमत है—यह उसके दिल को सुकून देती है, उसकी रूह को तरावत देती है और उसकी ज़िंदगी को बरकत देती है।
इस आयत में एक बड़ी सीख है कि हमें अल्लाह की इबादत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए, न कि उसे एक बोझ समझना चाहिए। जो लोग अल्लाह की इबादत से दूर रहते हैं, वे असल में अपनी ही रूह को भूखा रखते हैं। अल्लाह की इबादत इंसान को अज़ीज़ बनाती है, उसकी पहचान को ऊँचा करती है और उसे दुनिया और आख़िरत की कामयाबी देती है। फ़रिश्तों का यह हाल देखकर हमें भी चाहिए कि हम अपनी नमाज़, अपने ज़िक्र और अपनी दुआओं को प्यार से अदा करें, क्योंकि यही हमारी सबसे बड़ी इज़्ज़त है। अल्लाह हमें अपनी इबादत में मशग़ूल रहने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो कभी उसकी इबादत से नहीं थकते। आमीन।
📜 आयत 17-21 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 19
सूरा अल-अंबिया आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हालाँकि जो लोग (फरिश्ते) आसमान और ज़मीन में हैं (सब)…सूरा आयत 19/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








